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जिला प्रशासन की मंडे मीटिंग जनता पर पड़ रही भारी
Updated Mon, 27 Aug 2018 11:20 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। जिला प्रशासन की मंडे मीटिंग आम लोगों के लिए परेशानियों का कारण बनी हुई है। जहां सारे अधिकारी मंडे मीटिंग में व्यस्त रहते हैं वहीं आम लोगों को घंटों लाइन में खड़े होकर खाली हाथ घर लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के जिला महा सचिव संदीप सांख्यान ने कहा कि प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदारी तय करनी होगी ताकि आम लोगों को परेशानियों से दो चार न होना पड़े। उन्होंने कहा कि मंडे मीटिंग पर ऐसा कोई बड़ा कार्य नहीं किया जाता जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़े।
जबकि उपायुक्त कार्यालय का हाल यह है कि विकासात्मक रूप में इनकी परफार्मेंस नकारात्मक साबित हो रही है। हलकों में समय पर कोई पटवारी पटवारखानों में नहीं मिलता है। ग्राम पंचायत कार्यालयों में कोई भी पंचायत सचिव समय पर नहीं मिलता हैं। बजाए और जिलों के बिलासपुर जिला की ऑनलाइन जमाबंदियां अभी भी ठीक से ऑनलाइन नहीं हो पा रही हैं।
जबकि उपायुक्त कार्यालय अपनी जवाबदेही देने में बिल्कुल निकम्मा साबित हो रहा है। सिर्फ सरकारी मीटिंगों और बैठकों का दौर ही इस कार्यालय की जवाबदेही रह गया है। अब तो जिला बिलासपुर में कई पटवार सर्कलों में नए पटवारी भी नियुक्त किए जा चुके हैं। तब भी आम लोगों के समय पर न तो इंतकाल हो पा रहे हैं और न ही जमाबंदियां और न ही अन्य जरूरी काम हो पा रहे हैं। वहीं 27 अगस्त सोमवार को भी कार्यालय में मंडे मीटिंग के नाम से बैठक शुरू हो गई। करीब लंच तक कोई भी अधिकारी अपनी सीट पर नहीं बैठ पाया था। जबकि आम लोगों की कतारें इन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालयों के अंदर और बाहर लगी हुई थीं जिस कारण आम लोगों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। जिला कांग्रेस ने मांग की है कि अगर अधिकारियों को बैठक करनी है जो लंच के बाद की जाए ताकि आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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बिलासपुर। जिला प्रशासन की मंडे मीटिंग आम लोगों के लिए परेशानियों का कारण बनी हुई है। जहां सारे अधिकारी मंडे मीटिंग में व्यस्त रहते हैं वहीं आम लोगों को घंटों लाइन में खड़े होकर खाली हाथ घर लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस के जिला महा सचिव संदीप सांख्यान ने कहा कि प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदारी तय करनी होगी ताकि आम लोगों को परेशानियों से दो चार न होना पड़े। उन्होंने कहा कि मंडे मीटिंग पर ऐसा कोई बड़ा कार्य नहीं किया जाता जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़े।
जबकि उपायुक्त कार्यालय का हाल यह है कि विकासात्मक रूप में इनकी परफार्मेंस नकारात्मक साबित हो रही है। हलकों में समय पर कोई पटवारी पटवारखानों में नहीं मिलता है। ग्राम पंचायत कार्यालयों में कोई भी पंचायत सचिव समय पर नहीं मिलता हैं। बजाए और जिलों के बिलासपुर जिला की ऑनलाइन जमाबंदियां अभी भी ठीक से ऑनलाइन नहीं हो पा रही हैं।
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जबकि उपायुक्त कार्यालय अपनी जवाबदेही देने में बिल्कुल निकम्मा साबित हो रहा है। सिर्फ सरकारी मीटिंगों और बैठकों का दौर ही इस कार्यालय की जवाबदेही रह गया है। अब तो जिला बिलासपुर में कई पटवार सर्कलों में नए पटवारी भी नियुक्त किए जा चुके हैं। तब भी आम लोगों के समय पर न तो इंतकाल हो पा रहे हैं और न ही जमाबंदियां और न ही अन्य जरूरी काम हो पा रहे हैं। वहीं 27 अगस्त सोमवार को भी कार्यालय में मंडे मीटिंग के नाम से बैठक शुरू हो गई। करीब लंच तक कोई भी अधिकारी अपनी सीट पर नहीं बैठ पाया था। जबकि आम लोगों की कतारें इन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यालयों के अंदर और बाहर लगी हुई थीं जिस कारण आम लोगों को भारी परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। जिला कांग्रेस ने मांग की है कि अगर अधिकारियों को बैठक करनी है जो लंच के बाद की जाए ताकि आम लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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