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जिले की नौ सौ हेक्टेयर भूमि में लहलहाएंगे बगीचे
Updated Fri, 11 May 2018 10:32 PM IST
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आम
- फोटो : amar ujala
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बिलासपुर।
बागवानों के लिए चोखी कमाई का अच्छा मौका। बागवान अपनी जमीन की उर्वरकता के मुताबिक बगीचे लगाकर अच्छी-खासी कमाई कर सकता है। इसके लिए बागवानों को बागवानी विभाग उद्यान विकास योजना के तहत उच्च गुणवत्ता के फलों के पौधे मुहैया करवाए जाएंगे। ये पौधे मौसम और जमीन की उर्वरकता के मुताबिक वितरित किए जाएंगे। इनमें बिलासपुर के मौसम के मुताबिक आम और अनार आदि के पौधे शामिल हैं। जबकि ठंडे इलाकों में सेब की विभिन्न किस्मों के पौधे बागवानों को उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस योजना के तहत राज्य में किसान समूहों का गठन किया जाएगा। एक समूह के पास कम से कम 10 हेक्टेयर से लेकर 50 हेक्टेयर तक जमीन होनी चाहिए। जहां बागवानी विभाग की मदद से बगीचा तैयार किया जाएगा, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। कार्यकारी उपनिदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि उक्त राशि विश्व बैंक की ओर से खर्च की जा रही है। अकेले बिलासपुर जिले में ही 900 हेक्टेयर जमीन पर बगीचे लगाए जाने हैं। हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग बागवानों को बेहतर किस्म के पौधों की व्यवस्था करवाएगा। योजना के लिए जहां जमीन किसान की होगी, वहां पानी की पूरी व्यवस्था आईपीएच को करवानी है। परियोजना का कार्यकाल सात वर्ष का है। इसके तहत विभाग द्वारा बागवानों को पौधों को कब और कौन सी खाद देनी है, इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। अगर पौधों का अच्छी तरह से विकास नहीं हो रहा है तो इसकी भी जानकारी उद्यान विभाग की ओर से बागवानों को दी जाएगी। बागवानों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उद्यान विभाग बिलासपुर के कार्यकारी उपनिदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि इस परियोजना के तहत बागवानों के समूहों का गठन किया जाएगा। इस परियोजना के लिए समूहों के पास अपनी 10 हेक्टेयर से लेकर 50 हेक्टेयर तक जमीन होनी चाहिए। योजना के तहत बिलासपुर में ही 900 हेक्टेयर भूमि में यह परियोजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में योजना का लाभ बागवानों को मिलेगा। राज्य में बागवानों के उत्थान के लिए बागवानी विभाग उद्यान विकास योजना के तहत 1167 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
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बागवानों के लिए चोखी कमाई का अच्छा मौका। बागवान अपनी जमीन की उर्वरकता के मुताबिक बगीचे लगाकर अच्छी-खासी कमाई कर सकता है। इसके लिए बागवानों को बागवानी विभाग उद्यान विकास योजना के तहत उच्च गुणवत्ता के फलों के पौधे मुहैया करवाए जाएंगे। ये पौधे मौसम और जमीन की उर्वरकता के मुताबिक वितरित किए जाएंगे। इनमें बिलासपुर के मौसम के मुताबिक आम और अनार आदि के पौधे शामिल हैं। जबकि ठंडे इलाकों में सेब की विभिन्न किस्मों के पौधे बागवानों को उपलब्ध करवाए जाएंगे। इस योजना के तहत राज्य में किसान समूहों का गठन किया जाएगा। एक समूह के पास कम से कम 10 हेक्टेयर से लेकर 50 हेक्टेयर तक जमीन होनी चाहिए। जहां बागवानी विभाग की मदद से बगीचा तैयार किया जाएगा, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। कार्यकारी उपनिदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि उक्त राशि विश्व बैंक की ओर से खर्च की जा रही है। अकेले बिलासपुर जिले में ही 900 हेक्टेयर जमीन पर बगीचे लगाए जाने हैं। हिमाचल प्रदेश उद्यान विभाग बागवानों को बेहतर किस्म के पौधों की व्यवस्था करवाएगा। योजना के लिए जहां जमीन किसान की होगी, वहां पानी की पूरी व्यवस्था आईपीएच को करवानी है। परियोजना का कार्यकाल सात वर्ष का है। इसके तहत विभाग द्वारा बागवानों को पौधों को कब और कौन सी खाद देनी है, इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। अगर पौधों का अच्छी तरह से विकास नहीं हो रहा है तो इसकी भी जानकारी उद्यान विभाग की ओर से बागवानों को दी जाएगी। बागवानों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उद्यान विभाग बिलासपुर के कार्यकारी उपनिदेशक विनोद शर्मा ने बताया कि इस परियोजना के तहत बागवानों के समूहों का गठन किया जाएगा। इस परियोजना के लिए समूहों के पास अपनी 10 हेक्टेयर से लेकर 50 हेक्टेयर तक जमीन होनी चाहिए। योजना के तहत बिलासपुर में ही 900 हेक्टेयर भूमि में यह परियोजना शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में योजना का लाभ बागवानों को मिलेगा। राज्य में बागवानों के उत्थान के लिए बागवानी विभाग उद्यान विकास योजना के तहत 1167 करोड़ रुपये खर्च करेगा।