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सदर क्षेत्र की लड़कियों को शादी के लिए मिलने वाली अनुदान राशि बंद
Updated Sat, 20 Jan 2018 10:53 PM IST
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खेमराज शर्मा
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बिलासपुर।
नयनादेवी ट्रस्ट की बैठक में सदर विधानसभा क्षेत्र के गरीब लड़कियों को शादी के लिए मिलने वाली अनुदान राशि पर रोक लगा दी है। इस अनुदान राशि के लिए केवल स्वारघाट क्षेत्र के लोगों को ही रखा गया है। इसे लेकर सदर के पूर्व विधायक बंबर ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है।
उल्लेखनीय है कि नयनादेवी ट्रस्ट की ओर से गरीब परिवारों की लड़कियों को शादी के लिए अनुदान राशि दी जाती थी। इसमें बीपीएल, आईआरडीपी के अलावा जिनकी सालाना आय 35 हजार है वे लोग आते थे। इसके अलावा जिन्हें लड़कियों की शादियों के लिए पैसे की कमी होती थी वे फार्म से आवेदन करते हैं। इसके बाद उन्हें ट्रस्ट की ओर से 5100 रुपये दिए जाते हैं। पिछली कांग्रेस सरकार ने दो साल पहले राशि को बढ़ा कर 15 हजार रुपये कर दी थी। इसके अलावा अनुदान राशि के साथ लड़कियों को साड़ियां और सूट भी दिए जाते थे। लेकिन ट्रस्ट की बैठक में ये फैसला लिया गया कि सदर के लोगों के लिए इस राशि को बंद किया जाए। इसका मुख्य कारण अनुदान राशि को भी बढ़ाया जाना बताया जा रहा है। जबकि नयना देवी ट्रस्ट हर साल तीन करोड़ रुपये इनकम टैक्स के रूप में सरकार को देता है।
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15 हजार के साथ मिलते थे पांच सूट और दो साड़ियां
पात्र लड़कियों को अनुदान राशि के तहत 15 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इसके साथ-साथ पांच सूट और दो साड़ियां भी दी जाती हैं। अनुदान राशि को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को इनकम सर्टिफिकेट, पटवारी की रिपोर्ट, मेरिज कार्ड, अकाउंट नंबर देना पड़ता है। इस अनुदान राशि के लिए सालाना आय 35 हजार रुपये निर्धारित की गई है।
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सरकार कर रहे भेदभाव : बंबर
सदर से पूर्व विधायक बंबर का कहना है कि सदर क्षेत्र के लोगों को भाजपा सरकार बनने के बाद यह पहला तोहफा है। इससे साफ होता है कि सरकार भेदभाव कर रही है। उनके कार्यकाल में उन्होंने अनुदान राशि को भी बढ़ाया था। इसेे अब बंद कर दिया है।
बैठक में लिया फैसला
नयना देवी मंदिर अधिकारी मदन चंदेल का कहना है कि ट्रस्ट की बैठक में ये निर्णय लिया गया था कि स्वारघाट उपमंडल के तहत आने वाले क्षेत्र के लोगों को ही यह सुविधा मिलेगी। बैठक की अध्यक्षता मंदिर न्यास कमिश्नर और उपायुक्त बिलासपुर करते हैं। इसमें मंदिर न्यास के चैयरमैन और एसडीएम नयनादेवी भी होते हैं। इसके अलावा न्यासी भी होते हैं। इसके बाद सभी संयुक्त रूप से फैसला लेते हैं।