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Himachal Pradesh: जहां नहीं मिलता था पीने का पानी, अब वहां चल रहा अटूट लंगर; कहानी बाबा कमलाहिया मंदिर की

Sun, 30 Mar 2025 04:34 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 30 Mar 2025 04:34 PM IST
सार

चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर रविवार को कमलाह किले में स्थित प्राचीन बाबा कमलाहिया मंदिर में 100वें भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें खुद विधायक चंद्रशेखर विशेष रूप से मौजूद रहे। 
 

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Baba Kamalahia Temple Mandi Himachal Pradesh Unbroken Langar
प्राचीन बाबा कमलाहिया मंदिर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

राजाओं के दौर में अभेद्य माने गए कमलाह किले में स्थित प्राचीन बाबा कमलाहिया मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कभी पानी के लिए भी तरसते थे, लेकिन आज इस मंदिर परिसर में आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली पेट नहीं लौटता। गत दो वर्षों से मंदिर परिसर में स्थानीय विधायक चंद्रशेखर के प्रयासों से भंडारे की मुहिम को शुरू किया गया था।

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चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर रविवार को इस प्रयास के 100वें भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें खुद विधायक चंद्रशेखर विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने यहां नवरात्रों पर हुए हवन यज्ञ में भी भाग लिया और पूर्णाहूति डाली। वर्ष 2023 में जब चंद्रशेखर यहां जातर लेकर आए थे तो उसी दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों के सहयोग से यहां पर भंडारे को शुरू करने का ऐलान किया था। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी का गठन किया गया।
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अब यह कमेटी हर रविवार और विशेष अवसरों पर मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन करती है। विधायक चंद्रशेखर ने इसके लिए सभी को बधाई दी और कहा कि बाबा कमलाहिया मंदिर में सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बाबा के मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधा मिले, इस दिशा में प्रयास जारी हैं।

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स्थानीय निवासी प्रकाश चंद ने बताया कि कुछ लोगों ने भंडारे को राजनीतिक रूप देने की कोशिश की थी और इसके आयोजन को लेकर कई तरह के आरोप लगाए थे, लेकिन बाबा कमलाहिया की कृपा, विधायक चंद्रशेखर और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज 100वें भंडारे का सफल आयोजन हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी यह क्रम इसी तरह से जारी रहेगा।

मंदिर आई श्रद्धालु सपना ठाकुर ने बताया कि मंदिर सड़क से काफी दूर है और एक तीखी चढ़ाई चढ़ने के बाद ही यहां पहुंचा जा सकता है। मंदिर परिसर के पास दुकानों की कोई सुविधा नहीं है, ऐसे में लोगों को यहां कुछ भी नहीं मिलता, लेकिन जो भंडारा यहां पर शुरू हुआ है उससे अब हर श्रद्धालु को भोजन मिल पा रहा है। उन्होंने इस शुरूआत के लिए आयोजकों को बधाई दी।

जानिए क्यों अभेद्य माना गया है कमलाह किला
4500 फीट की उंचाई पर बसे कमलाह किले को अभेद्य किला माना गया। यह एक ऐसी चोटी पर है जहां से चारों तरफ आसानी से नजर रखी जा सकती है और इस पर चढ़ना आसान नहीं है। यहां तीखी चढ़ाई चढ़ने के बाद ही पहुंचा जा सकता है। यह मंडी रियासत का आखिरी हिस्सा था और कमलाह किले का निर्माण राजा सूर्यसेन ने वर्ष 1625 में करवाया था।


 
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