एशियन गेम्स: सीमा को दौड़ता देख भावुक हुआ परिवार, छठे स्थान पर रहने पर भी बढ़ा मान, देखें वीडियो
शाम करीब सवा पांच बजे शुरू हुई दौड़ को देखने के लिए परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्य टीवी के सामने बैठ गए। स्पर्धा में सीमा पदक हासिल नहीं कर सकीं और उन्हें छठे स्थान से संतोष करना पड़ा।
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एशियन गेम्स की 5,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में सोमवार शाम चंबा की धाविका सीमा के उतरते ही उनके घर में उत्साह का माहौल बन गया। शाम करीब सवा पांच बजे शुरू हुई दौड़ को देखने के लिए परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्य टीवी के सामने बैठ गए। स्पर्धा में सीमा पदक हासिल नहीं कर सकीं और उन्हें छठे स्थान से संतोष करना पड़ा। बावजूद परिवार के सदस्यों का कहना है कि बेटी ने शानदार प्रदर्शन कर चंबा और परिवार का मान बढ़ाया है। कुछ दिन पहले ही सीमा ने 10 हजार मीटर दौड़ में हिस्सा लेकर कांस्य पदक जीता था। लगातार स्पर्धाओं में भाग लेने के कारण उनका शरीर थका हुआ था, उन्होंने 5,000 मीटर दौड़ में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया। सीमा की मां केसरी देवी ने बताया कि 5,000 मीटर में छठा स्थान हासिल करना भी परिवार के लिए गर्व की बात है।
पावरलिफ्टर राजेश ठाकुर का एशियन गेम्स के लिए चयन
चुराह क्षेत्र के पावरलिफ्टर राजेश ठाकुर का अगले एशियन गेम्स के लिए चयन होने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। राजेश ठाकुर इससे पहले भी राष्ट्रीय और विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उनके एशियन गेम्स के लिए चयन की खबर मिलते ही चुराह क्षेत्र में खुशी का माहौल है। राजेश ठाकुर ने पावरलिफ्टिंग के क्षेत्र में कड़ी मेहनत और लगन के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उन्होंने क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।
भावना की सफलता से कोच डीआर चौधरी की मेहनत लाई रंग
वहीं जापान में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की सदस्य मंडी जिले की भावना ठाकुर कामयाबी के पीछे नाचन के जरल गांव निवासी सेवानिवृत्त कोच डीआर चौधरी की वर्षों की मेहनत भी रही है। चौधरी ने भावना को शुरुआती दौर से प्रशिक्षण देकर खेल की बारीकियां सिखाईं। डीआर चौधरी ने वर्ष 1980 में उत्तर प्रदेश के फतेहगढ़ से कोचिंग कॅरिअर शुरू किया। वहां उन्होंने राजपूत रेजिमेंट और बाद में इंडिया सर्विस के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा। सिरडा स्पोर्ट्स एकेडमी के एक्सटेंशन सेंटर में खिलाड़ियों को तैयार करते रहे। वर्ष 2014 के ट्रायल में भावना ठाकुर का चयन हुआ। इसके बाद चौधरी के मार्गदर्शन में उन्होंने सीनियर नेशनल, जूनियर नेशनल, फेडरेशन कप, खेलो इंडिया यूथ गेम्स और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी जैसी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। डीआर चौधरी ने कहा कि किसी खिलाड़ी को शुरुआती स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचते देखना प्रशिक्षक के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है। भावना के पिता प्रेम सिंह ने कहा कि बेटी ने देश के लिए इतना बड़ा सम्मान हासिल किया है। इसके पीछे उसकी और उसके गुरु की मेहनत है। उन्होंने सरकार से भावना को डीएसपी रैंक की नौकरी देने की मांग की है।
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