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AI Saree Trend : एआई में फोटो क्रिएटिव बनाने के चक्कर में हो सकती है ठगी, साइबर विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
Thu, 18 Sep 2025 08:03 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 18 Sep 2025 08:03 PM IST
सार
Google Gemini Nano Banana Trend Warning : आजकल इंटरनेट पर एक नया ट्रेंड छाया हुआ है, जिसमें महिलाएं अपनी तस्वीरें एआई मॉडल को अपलोड करके खुद को साड़ी में देख रही हैं। एआई के जरिए कपल फोटो भी आराम से बन जा रहे हैं वो भी स्टाइलिश लुक में। लोग भी धड़ाधड़ सोशल मीडिया पर इन्हें पोस्ट भी कर रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एआई पर फोटो अपलोड करने से आपकी प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। जानें साइबर विशेषज्ञों ने क्या कहा?
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
सोशल मीडिया पर एआई से फोटो क्रिएटिव बनाने के ट्रेंड में ठगी का शिकार हो सकते हैं। हर दिन सोशल मीडिया पर इस तरह के ट्रेंड को अपना कर लोगों की निजी जानकारियों को चुरा सकते हैं। इसमें थर्ड पार्टी एप्स फोटो में बदलाव करने के साथ गलत तरीके से इनका प्रयोग कर सकते हैं। लोगों को देखा-देखी में इस ट्रेंड को अपनाने के चलते साइबर विशेषज्ञों ने भी सतर्क रहने की सलाह दी है।
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मोबाइल में आए दिन नए-नए अपडेट के साथ ही नई तकनीकें जुड़ रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर लोग फोटो को क्रिएटिव बनाने के चलते एआई एप का प्रयोग कर रहे हैं। इनसे तस्वीरें तो क्रिएटिव बनाकर लोग मनोरंजन तो कर रहे हैं, लेकिन इनसे खुद ही अपनी जानकारियों को शातिरों तक पहुंचाने का अवसर दे रहे हैं। इस एप से व्यक्ति स्वयं अपनी फोटो दे रहे हैं और यह एप निजी डाटा को एकत्रित कर रहा है। इससे फोटो को एडिट कर क्रिएटिव बनाने के बाद दे तो रही है, लेकिन ओरिजनल तस्वीर थर्ड पार्टी एप के पास ही रह जाती है। ऐसे में एप के डाटा में सेंधमारी कर शातिर ओरिजन फोटो के माध्यम से ब्लैक मेल भी कर सकते हैं।
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उधर, एएसपी साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला प्रवीण धीमान ने बताया कि सोशल मीडिया पर एआई तकनीक से फोटो को क्रिएटिव बनाने का ट्रेंड आजकल ज्यादा चला हुआ है। इस ट्रेंड से लोग परेशानी में भी पड़ सकते हैं, क्योंकि इसमें ओरिजनल फोटो को लोग इसमें भेज रहे हैं। इस ट्रेंड से अभी तक किसी ठगी व अन्य मामला सामने तो नहीं आया है, लेकिन इससे सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी एप के प्रयोग के दौरान फोन से एक्सेस मांगी जाती है और इसे ऑन करने से फोटो, नंबर और अन्य जानकारियां थर्ड पार्टी एप तक पहुंच जाती हैं। ऐसे में कोई भी एप का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए और इन्हें पंजीकृत प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करना चाहिए।
साइबर पुलिस ने जारी की चेतावनी, चेहरे व निजी डेटा चोरी का खतरा
साइबर पुलिस ने लोगों को एआई आधारित टूल्स और एप्लिकेशन पर अपनी फोटो या निजी जानकारी अपलोड करने से पहले सतर्क रहने की चेतावनी दी है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल किया गया है। इनमें चेहरे की पहचान से लेकर व्यक्तिगत विवरण चुराए जाने तक का खतरा है।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, कई एआई टूल्स फोटो को ‘फेस रिकग्निशन डेटाबेस’ में सेव कर लेते हैं और आगे उन्हें विज्ञापन, डीपफेक या पहचान चोरी जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह उपयोगकर्ताओं की लोकेशन, मोबाइल डिवाइस का आईपी एड्रेस, ब्राउजिंग पैटर्न और अन्य संवेदनशील जानकारी भी ट्रैक की जा सकती है।
साइबर पुलिस का कहना है कि लोकेशन ट्रैकिंग और पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) अब बड़ा खतरा बन गया है। संदिग्ध एआई प्लेटफॉर्म आपके चेहरे के साथ बायोमेट्रिक डेटा, सोशल मीडिया प्रोफाइल और बैंकिंग जानकारी तक जोड़ सकते हैं, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और वित्तीय नुकसान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सुझाव दिया है कि किसी भी एआई टूल पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और नियमों को पढ़ें, बिना जरूरत अनुमति न दें और अनजाने प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील डेटा साझा करने से बचें। यदि किसी को संदेहास्पद गतिविधि नजर आती है तो तुरंत साइबर पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
साइबर पुलिस ने लोगों को एआई आधारित टूल्स और एप्लिकेशन पर अपनी फोटो या निजी जानकारी अपलोड करने से पहले सतर्क रहने की चेतावनी दी है। हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल किया गया है। इनमें चेहरे की पहचान से लेकर व्यक्तिगत विवरण चुराए जाने तक का खतरा है।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, कई एआई टूल्स फोटो को ‘फेस रिकग्निशन डेटाबेस’ में सेव कर लेते हैं और आगे उन्हें विज्ञापन, डीपफेक या पहचान चोरी जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह उपयोगकर्ताओं की लोकेशन, मोबाइल डिवाइस का आईपी एड्रेस, ब्राउजिंग पैटर्न और अन्य संवेदनशील जानकारी भी ट्रैक की जा सकती है।
साइबर पुलिस का कहना है कि लोकेशन ट्रैकिंग और पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ्ट) अब बड़ा खतरा बन गया है। संदिग्ध एआई प्लेटफॉर्म आपके चेहरे के साथ बायोमेट्रिक डेटा, सोशल मीडिया प्रोफाइल और बैंकिंग जानकारी तक जोड़ सकते हैं, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और वित्तीय नुकसान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। सुझाव दिया है कि किसी भी एआई टूल पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और नियमों को पढ़ें, बिना जरूरत अनुमति न दें और अनजाने प्लेटफॉर्म पर संवेदनशील डेटा साझा करने से बचें। यदि किसी को संदेहास्पद गतिविधि नजर आती है तो तुरंत साइबर पुलिस हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।