कृषि विश्वविद्यालय अध्ययन: हिमाचल में मिली दीमक की नई प्रजाति, पहुंचाती है ज्यादा नुकसान
प्रदेश में दीमक की नई प्रजाति मिली है। स्टाइलोटर्मीस फैवोलस प्रजाति की यह दीमक प्रदेश में पाई जाने वाली दो अन्य प्राजातियों की तरह यह भी लकड़ी को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।
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हिमाचल प्रदेश में दीमक की नई प्रजाति मिली है। स्टाइलोटर्मीस फैवोलस प्रजाति की यह दीमक प्रदेश में पाई जाने वाली दो अन्य प्राजातियों की तरह यह भी लकड़ी को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। हिमाचल प्रदेश के जंगलों और लकड़ी से जुड़ी पारिस्थितिकी को लेकर चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध पत्र में प्रदेश में लकड़ी खाने वाली दीमकों की तीन प्रमुख प्रजातियों-आर्कोटर्मोप्सिस रॉटोनी, निओटर्मीस बोसी और स्टाइलोटर्मीस फैवोलस की मौजूदगी दर्ज की गई है।
इनमें स्टाइलोटर्मीस फैवोलस को कुल्लू घाटी में ब्यास नदी के किनारे दर्ज किया गया है। दीमक लकड़ी को अंदर से खाकर उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता को कम कर सकती है। कुछ प्रजातियां जीवित पेड़ों के तनों को भी अपना भोजन बनाती हैं, जिससे वनस्पति को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। यह अध्ययन हिमांशु ठाकुर, कुलदीप सिंह वर्मा, रविंद्र सिंह चंदेल और पूनम जसरोटिया ने किया है। शोधपत्र का शीर्षक “ऑब्जर्वेशंस ऑन सम बायो-इकोलॉजिकल एट्रिब्यूट्स ऑफ क्रिप्टिक वन-पीस वुड-फीडिंग टर्माइट्स (ब्लैटोडिया, आइसोप्टेरा) इन हिमाचल प्रदेश (इंडिया)” है। यह शोधपत्र हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है।
ब्यास किनारे दर्ज हुई स्टाइलोटर्मीस फैवोलस
अध्ययन के दौरान हिमाचल प्रदेश में लकड़ी खाने वाली दीमकों की तीन प्रजातियों की पारिस्थितिकी और वितरण का अध्ययन किया गया। स्टाइलोटर्मीस फैवोलस को कुल्लू घाटी में ब्यास नदी के किनारे दर्ज किया गया। यह प्रजाति स्टाइलोटर्मिटिडी समूह से संबंधित है। दीमक दक्षिण एशिया में जीवित पेड़ों के तनों में भी भोजन करती हैं। ऐसे में वन क्षेत्र के पेड़ों पर इनके संभावित प्रभाव को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
लकड़ी के बड़े लट्ठों में मिलीं सैकड़ों दीमक
दीमकों की कॉलोनी के आकार को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। आर्कोटर्मोप्सिस रॉटोनी की बड़ी लकड़ी के लट्ठों में करीब 250 से 1,050 तक दीमक पाई गईं। वहीं, छोटे पेड़ के ठूंठों में इनकी संख्या 100 से कम रही। स्टाइलोटर्मीस फैवोलस के एक पेड़ के तने में करीब 1,500 दीमकों का समूह दर्ज किया गया, जिसमें लगभग 115 से 130 सैनिक दीमक थीं।
हिमाचल की पारिस्थितिकी समझने में मिलेगी मदद
अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार, दीमक केवल लकड़ी को नुकसान पहुंचाने वाला कीट नहीं है, बल्कि जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका भी है। लकड़ी और वनस्पति पदार्थ को तोड़ने में दीमक योगदान देती हैं, जिससे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है। हिमाचल में इनकी विभिन्न प्रजातियों के वितरण, आवास और जैव-पारिस्थितिक विशेषताओं का अध्ययन प्रदेश के वन पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा। साथ ही, लकड़ी और जीवित पेड़ों पर इनके संभावित नुकसान का आकलन करने में भी यह शोध उपयोगी साबित हो सकता है।