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चादर शरीफ की रस्म के दौरान झूमे जायरीन
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उर्स के दौरान चादर शरीफ की रस्म के लिए जाते जायरीन। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। ऐतिहासिक दरगाह रोजा शरीफ का 451वां उर्स सोमवार को पूरे परवान पर रहा। उर्स के तीसरे दिन दरगाह परिवार की ओर से शाही लवाजमे के साथ पीरजादा के घर से निकले जुलूस में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की।
जुलूस में बैंड बाजों की धुन पर मस्त कलंदरों फकीरों के करतब देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इससे पूर्व कव्वाली में सहारनपुर से आए कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समा बांध दिया। दरगाह के सामने वाले चौक में खादिमों की मौजूदगी फातिहा ख्वानी की रस्म अदायगी हुई।
इस दौरान जायरीन की ओर से मेवा और मिष्ठानों के थाल सजाए गए। भीड़ को पंजाब से आए सेवादारों ने मानव श्रृंखला बनाकर नियंत्रित किया। दरगाह में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पीरजादा सैय्यद कुमैसुल कादरी नुरू मियां के साथ लोगों ने देश में अमन और चैन की दुआएं मांगी और चादर लेकर दरगाह की तरफ चले।
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उर्स के दौरान दंगल कराया गया। दंगल में दिल्ली, हरियाणा, यूपी व राजस्थान के पहलवानों ने हिस्सा लिया। चार घंटों तक चले दंगल में शुरू से लेकर अंत तक दर्शक जमे रहे। एक पहलवान ने बताया कि साढौरा नदी के आसपास की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इससे दंगल करने का भी स्थान नहीं बचा है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
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साढौरा। ऐतिहासिक दरगाह रोजा शरीफ का 451वां उर्स सोमवार को पूरे परवान पर रहा। उर्स के तीसरे दिन दरगाह परिवार की ओर से शाही लवाजमे के साथ पीरजादा के घर से निकले जुलूस में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने शिरकत की।
जुलूस में बैंड बाजों की धुन पर मस्त कलंदरों फकीरों के करतब देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इससे पूर्व कव्वाली में सहारनपुर से आए कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर समा बांध दिया। दरगाह के सामने वाले चौक में खादिमों की मौजूदगी फातिहा ख्वानी की रस्म अदायगी हुई।
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इस दौरान जायरीन की ओर से मेवा और मिष्ठानों के थाल सजाए गए। भीड़ को पंजाब से आए सेवादारों ने मानव श्रृंखला बनाकर नियंत्रित किया। दरगाह में सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में पीरजादा सैय्यद कुमैसुल कादरी नुरू मियां के साथ लोगों ने देश में अमन और चैन की दुआएं मांगी और चादर लेकर दरगाह की तरफ चले।
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उर्स के दौरान दंगल कराया गया। दंगल में दिल्ली, हरियाणा, यूपी व राजस्थान के पहलवानों ने हिस्सा लिया। चार घंटों तक चले दंगल में शुरू से लेकर अंत तक दर्शक जमे रहे। एक पहलवान ने बताया कि साढौरा नदी के आसपास की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। इससे दंगल करने का भी स्थान नहीं बचा है। प्रशासन को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।