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परमात्मा को अपने भीतर खोजें : मामचंद
Mon, 31 Aug 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 31 Aug 2026 01:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। थाना छप्पर-अधोया रोड स्थित श्री गुरु रविदास आश्रम में सत्संग हुआ। संत शिरोमणि सतगुरु रविदास मिशन बेगमपुरा कल्याण सत्संग सभा की ओर से करवाया गया।
मुख्य सेवादार महंत मामचंद दास ने कहा कि गुरु रविदास ने अपनी वाणी में कहा है कि परमात्मा को कहीं बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है। वह हमारे भीतर ही है। परमात्मा को हासिल का करने का एकमात्र रास्ता सिमरण और सत्संग है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने कहा है कि भक्ति के लिए कोई विशेष कपड़े पहनने अथवा जटाएं रखना जरूरी नहीं हैं। शांत चित से कहीं भी बैठकर किसी भी पहनावे में भक्ति की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भक्ति के बल पर गुरु रविदास महाराज ने परमात्मा को पाया और बड़े-बड़े राजा महाराजा उनके शिष्य बने। उनकी वाणी लोगों को सही राह दिखाने का काम कर रही है। इसलिए अंधविश्वास और पाखंड छोड़कर सतगुरु की शरण में आ जाएं।उन्होंने कहा कि बच्चों को भी सत्संग में लेकर जाएं ताकि वह गुणवान बनें और छोटी उम्र से ही उन्हें प्रभु भक्ति की लगन लग जाए।
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उन्होंने बताया कि गुरु रविदास और बाबा साहेब आंबेडकर ने शिक्षित बनने का जो उपदेश दिया है, उस पर अमल जरूर करें। सत्संग में भजनों से गुरु महिमा का गुणगान किया गया। इसके बाद लंगर लगाया गया। इस दौरान संदीप कुमार, बाबू राम, महेंद्र, बलराम सहित काफी संगत मौजूद रही।
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जगाधरी। थाना छप्पर-अधोया रोड स्थित श्री गुरु रविदास आश्रम में सत्संग हुआ। संत शिरोमणि सतगुरु रविदास मिशन बेगमपुरा कल्याण सत्संग सभा की ओर से करवाया गया।
मुख्य सेवादार महंत मामचंद दास ने कहा कि गुरु रविदास ने अपनी वाणी में कहा है कि परमात्मा को कहीं बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है। वह हमारे भीतर ही है। परमात्मा को हासिल का करने का एकमात्र रास्ता सिमरण और सत्संग है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास ने कहा है कि भक्ति के लिए कोई विशेष कपड़े पहनने अथवा जटाएं रखना जरूरी नहीं हैं। शांत चित से कहीं भी बैठकर किसी भी पहनावे में भक्ति की जा सकती है।
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उन्होंने कहा कि भक्ति के बल पर गुरु रविदास महाराज ने परमात्मा को पाया और बड़े-बड़े राजा महाराजा उनके शिष्य बने। उनकी वाणी लोगों को सही राह दिखाने का काम कर रही है। इसलिए अंधविश्वास और पाखंड छोड़कर सतगुरु की शरण में आ जाएं।उन्होंने कहा कि बच्चों को भी सत्संग में लेकर जाएं ताकि वह गुणवान बनें और छोटी उम्र से ही उन्हें प्रभु भक्ति की लगन लग जाए।
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उन्होंने बताया कि गुरु रविदास और बाबा साहेब आंबेडकर ने शिक्षित बनने का जो उपदेश दिया है, उस पर अमल जरूर करें। सत्संग में भजनों से गुरु महिमा का गुणगान किया गया। इसके बाद लंगर लगाया गया। इस दौरान संदीप कुमार, बाबू राम, महेंद्र, बलराम सहित काफी संगत मौजूद रही।