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चार घंटे अटकी रही नदी खोखली करने वालों की सांसे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2016 11:52 PM IST
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बाढ़
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रेत-बजरी चोरी करने वालों को यमुना नदी ने अपना रोद्र रूप दिखा दिया। यदि प्रशासन वायु सेना की मदद न लेता तो यमुना नदी इन्हें अपने आगोश में समा लेती। चार घंटे तक नदी में फंसे रहे सात लोगों की सांसें उस टीले पर लगातार हो रहे कटाव को देखकर अटकी हुई थी।
यमुना नदी में चोरी छिपे रेत-बजरी निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को यमुना में जिस समय बाढ़ आई, उस समय ढाई दर्जन से अधिक लोग नदी से रेत-बजरी निकालने में जुटे थे। यमुना का जलस्तर बढ़ने पर भी वे नदी से बाहर नहीं निकले और रेत-बजरी को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरते रहे। उधर, हथनीकुंड बैराज से लगातार पानी बढ़ता रहा। नदी में पांच से छह फुट तक पानी आने पर ये लोग अपनी जान बचाने के लिए किनारे की ओर लपके, लेकिन बहाव तेज होने के कारण वे नदी में फंस कर रह गए। कुछ व्यक्ति नदी से निकलने में सफल रहे। नदी में रेत-बजरी निकालने वाले अपने साथ हवा से भी ट्यूब लेकर जाते हैं ताकि यमुना में पानी आने पर वे उसकी मदद से बाहर निकल सके। करीब दो दर्जन व्यक्ति ट्यूब की मदद से किनारे पर पहुंच गए। कुछ को उनके साथियों ने नदी से बाहर निकाला, लेकिन सात व्यक्ति एक टीले पर फंस गए। इनमें कोली गांव का बलबीर, सिंहराम, सोहनलाल, रामपाल, अमित व दुखन थे। सहारनपुर का रमेश ट्यूब लेकर इन्हें बचाने के लिए ट्यूब लेकर टीले तक पहुंचा, लेकिन अधिक पानी के कारण वह भी टीले पर फंस गया।
-बार-बार लगाते रहे गुहार-
सात व्यक्ति जिस टीले पर फंसे थे, उसमें लगातार कटाव हो रहा था। कटाव को देखकर उनके चेहरे पीले पड़ने लगे। ये लोग करीब 12 बजे टीले पर फंसे थे। चार घंटे तक टीले में करीब 20 फुट तक कटाव हो गया था। इतनी देर तक बचाव कार्य शुरू न होने पर इन्हें अपनी जिदंगी खतरे में नजर आने लगी। वे बार-बार हाथ हिलाकर नदी के किनारे खड़े लोगों से उन्हें बचाने की गुहार लगाते रहे।
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-तिनकों की तरह नदी में बह गईं ट्रैक्टर-ट्रालियां-
यमुना नदी में जिस समय पानी बढ़ना शुरू हुआ, उस समय नदी में करीब आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रालियां व कुछ रेहड़ियां भी थी। जलस्तर बढने के कारण छह ट्रैक्टर-ट्राली पानी में बह गईं। ये ट्रैक्टर-ट्रालियां बल्लेवाला के पप्पू, भूरा व शिवकुमार, मांडेवाला के राजकुमार, भूड़कला के रामकिशन व गिरिजा की थी। इसके अलावा बल्लेवाला के ऋषि व सोनू की रेहड़ियां भी पानी में बह गई।
कोई चारा न देख लिया एयरलिफ्ट का फैसला
नदी में लोगों के फंसे होने की सूचना मिलने पर डीसी डॉ एसएस फूलिया, एसपी मनीष चौधरी, सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरीदेव कांबोज, डीडीपीओ गगनदीप सिंह तुरंत मौके पर पहुंच गए। बाढ़ बचाव के लिए जिले में बुलाई गई एचडीआरएफ की टीम भी मौके पर आ गई। गोताखोरों ने टीले तक पहुंचने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन नदी में पानी का बहाव इतना अधिक था कि उसमें उतरना खतरे से खाली नहीं था। इसके बाद बोट के माध्यम से उन्हें निकालने की योजना बनाई गई, लेकिन नदी का बहाव इसमें भी आड़े आया। उधर, टीले का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके बाद डीसी ने यमुना नदी का पानी कम करने के लिए सिंचाई विभाग के एक्सईएन को कहा। एक्सईएन ने हथनीकुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर में 20 हजार व पूर्वी यमुना नहर में चार हजार क्यूसिक पानी निकाला गया, जिससे नदी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ। लेकिन पानी का बहाव फिर भी कम नहीं हुआ। रेस्क्यू आपरेशन शुरू करने के लिए पानी का बहाव कम होना जरूरी था। लेकिन इसका इंतजार करने में अंधेरा हो जाता। मौके पर मौजूद डीसी ने तुरंत मुख्यमंत्री व आला अधिकारियों से फोन पर बात की और टीले पर फंसे लोगों को बचाने के लिए सेना के हेलीकाप्टर को भेजने का आग्रह किया। इसके बाद करीब चार बजे सरसावा एयरफोर्स से एक हेलीकाप्टर मौके पर आया और टीले पर फंसे लोगों को हेलीकाप्टर से लिफ्ट किया गया।
ग्रामीण रखें यमुना की स्थिति पर नजर
रादौर। हथनीकुंड बैराज से यमुना नदी में डेढ़ लाख क्यूसिक से अधिक पानी छोड़ने से बुधवार शाम जठलाना क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया। बीडीपीओ रादौर दीनानाथ शर्मा, निगरानी कमेटी के चेयरमैन अर्जुन पंडित ने विभिन्न घाटों का दौरा कर बाढ़ राहत कार्यों का निरीक्षण किया। वहीं प्रशासन की ओर से जठलाना क्षेत्र के यमुना नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी करा ग्रामीणों को चेताया कि वे यमुना की स्थिति पर नजर रखें और रात के समय गांव में पहरा लगाएं। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई कि कोई भी ग्रामीण यमुना में पानी छोड़े जाने के कारण यमुना पार खेतों में न जाए। कोई भी सूचना ग्रामीण कंट्रोल रूम के नंबर 01732-237899 पर दे सकता है।
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यमुना नदी में चोरी छिपे रेत-बजरी निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार को यमुना में जिस समय बाढ़ आई, उस समय ढाई दर्जन से अधिक लोग नदी से रेत-बजरी निकालने में जुटे थे। यमुना का जलस्तर बढ़ने पर भी वे नदी से बाहर नहीं निकले और रेत-बजरी को ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरते रहे। उधर, हथनीकुंड बैराज से लगातार पानी बढ़ता रहा। नदी में पांच से छह फुट तक पानी आने पर ये लोग अपनी जान बचाने के लिए किनारे की ओर लपके, लेकिन बहाव तेज होने के कारण वे नदी में फंस कर रह गए। कुछ व्यक्ति नदी से निकलने में सफल रहे। नदी में रेत-बजरी निकालने वाले अपने साथ हवा से भी ट्यूब लेकर जाते हैं ताकि यमुना में पानी आने पर वे उसकी मदद से बाहर निकल सके। करीब दो दर्जन व्यक्ति ट्यूब की मदद से किनारे पर पहुंच गए। कुछ को उनके साथियों ने नदी से बाहर निकाला, लेकिन सात व्यक्ति एक टीले पर फंस गए। इनमें कोली गांव का बलबीर, सिंहराम, सोहनलाल, रामपाल, अमित व दुखन थे। सहारनपुर का रमेश ट्यूब लेकर इन्हें बचाने के लिए ट्यूब लेकर टीले तक पहुंचा, लेकिन अधिक पानी के कारण वह भी टीले पर फंस गया।
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-बार-बार लगाते रहे गुहार-
सात व्यक्ति जिस टीले पर फंसे थे, उसमें लगातार कटाव हो रहा था। कटाव को देखकर उनके चेहरे पीले पड़ने लगे। ये लोग करीब 12 बजे टीले पर फंसे थे। चार घंटे तक टीले में करीब 20 फुट तक कटाव हो गया था। इतनी देर तक बचाव कार्य शुरू न होने पर इन्हें अपनी जिदंगी खतरे में नजर आने लगी। वे बार-बार हाथ हिलाकर नदी के किनारे खड़े लोगों से उन्हें बचाने की गुहार लगाते रहे।
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-तिनकों की तरह नदी में बह गईं ट्रैक्टर-ट्रालियां-
यमुना नदी में जिस समय पानी बढ़ना शुरू हुआ, उस समय नदी में करीब आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रालियां व कुछ रेहड़ियां भी थी। जलस्तर बढने के कारण छह ट्रैक्टर-ट्राली पानी में बह गईं। ये ट्रैक्टर-ट्रालियां बल्लेवाला के पप्पू, भूरा व शिवकुमार, मांडेवाला के राजकुमार, भूड़कला के रामकिशन व गिरिजा की थी। इसके अलावा बल्लेवाला के ऋषि व सोनू की रेहड़ियां भी पानी में बह गई।
कोई चारा न देख लिया एयरलिफ्ट का फैसला
नदी में लोगों के फंसे होने की सूचना मिलने पर डीसी डॉ एसएस फूलिया, एसपी मनीष चौधरी, सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरीदेव कांबोज, डीडीपीओ गगनदीप सिंह तुरंत मौके पर पहुंच गए। बाढ़ बचाव के लिए जिले में बुलाई गई एचडीआरएफ की टीम भी मौके पर आ गई। गोताखोरों ने टीले तक पहुंचने की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन नदी में पानी का बहाव इतना अधिक था कि उसमें उतरना खतरे से खाली नहीं था। इसके बाद बोट के माध्यम से उन्हें निकालने की योजना बनाई गई, लेकिन नदी का बहाव इसमें भी आड़े आया। उधर, टीले का कटाव लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके बाद डीसी ने यमुना नदी का पानी कम करने के लिए सिंचाई विभाग के एक्सईएन को कहा। एक्सईएन ने हथनीकुंड बैराज से पश्चिमी यमुना नहर में 20 हजार व पूर्वी यमुना नहर में चार हजार क्यूसिक पानी निकाला गया, जिससे नदी का जलस्तर थोड़ा कम हुआ। लेकिन पानी का बहाव फिर भी कम नहीं हुआ। रेस्क्यू आपरेशन शुरू करने के लिए पानी का बहाव कम होना जरूरी था। लेकिन इसका इंतजार करने में अंधेरा हो जाता। मौके पर मौजूद डीसी ने तुरंत मुख्यमंत्री व आला अधिकारियों से फोन पर बात की और टीले पर फंसे लोगों को बचाने के लिए सेना के हेलीकाप्टर को भेजने का आग्रह किया। इसके बाद करीब चार बजे सरसावा एयरफोर्स से एक हेलीकाप्टर मौके पर आया और टीले पर फंसे लोगों को हेलीकाप्टर से लिफ्ट किया गया।
ग्रामीण रखें यमुना की स्थिति पर नजर
रादौर। हथनीकुंड बैराज से यमुना नदी में डेढ़ लाख क्यूसिक से अधिक पानी छोड़ने से बुधवार शाम जठलाना क्षेत्र में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया। बीडीपीओ रादौर दीनानाथ शर्मा, निगरानी कमेटी के चेयरमैन अर्जुन पंडित ने विभिन्न घाटों का दौरा कर बाढ़ राहत कार्यों का निरीक्षण किया। वहीं प्रशासन की ओर से जठलाना क्षेत्र के यमुना नदी किनारे बसे गांवों में मुनादी करा ग्रामीणों को चेताया कि वे यमुना की स्थिति पर नजर रखें और रात के समय गांव में पहरा लगाएं। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई कि कोई भी ग्रामीण यमुना में पानी छोड़े जाने के कारण यमुना पार खेतों में न जाए। कोई भी सूचना ग्रामीण कंट्रोल रूम के नंबर 01732-237899 पर दे सकता है।