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इंसान यदि ठान ले तो कुछ भी नामुंकिन नहीं : रोशन लाल
yamunanagar beuro
Updated Thu, 20 Apr 2017 12:05 AM IST
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- फोटो : yamunanagar
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प्लाईवुड व्यापारी से टीवी सीरियल अग्निफेरा के प्रोड्यूसर बने रोशन कांबोज बुधवार को अपने शहर यमुनानगर पहुंचे। साबापुर के रहने वाले रोशन लाल कांबोज ने पत्रकारों से बातचीत में बताया दौलत कमाने के लिए उन्होंने बॉलीवुड की दुनिया में कदम नहीं रखा बल्कि यह साबित करना चाहते थे कि इंसान यदि ठान ले तो कुछ भी नामुंकिन नहीं है।
बशर्ते लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिद और जुनून दोनों होने चाहिए। नाटक लिखने का शौक उनको बचपन से है। अप्रैल-1982 में बीकॉम करने के बाद उन्होंने चौपाल नामक सीरियल की पटकथा लिखी। इस सीरियल की 52 एपीसोड थे। संबंधित सामग्री लेकर वह हरियाणा फिल्म एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष लहरी सिंह से मिले। उन्होंने पहले सात एपीसोड अपने पास रख लिए और वापस भेज दिया। उनको मेहनत का फल नहीं मिला। उनको टीवी सीरियल 19 मार्च 2016 को एंड टीवी पर सीरियल के प्रसारण की अनुमति मिल गई। उन्होंने बताया कि अब से पहले 15 एपीसोड प्रसारित हो चुके हैं। सीरियल के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर कुठाराघात किया गया है और यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि झ़ूठी शान शौकत के लिए माता-पिता को अपनी इच्छाएं बच्चों पर नहीं थौपनी चाहिए। झूठ की बुनियाद पर रिश्ते नहीं टिकते। सुखी जीवन व रिश्तों की प्रगाड़ता के लिए सच्चाई जरूरी होती है।
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बशर्ते लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिद और जुनून दोनों होने चाहिए। नाटक लिखने का शौक उनको बचपन से है। अप्रैल-1982 में बीकॉम करने के बाद उन्होंने चौपाल नामक सीरियल की पटकथा लिखी। इस सीरियल की 52 एपीसोड थे। संबंधित सामग्री लेकर वह हरियाणा फिल्म एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष लहरी सिंह से मिले। उन्होंने पहले सात एपीसोड अपने पास रख लिए और वापस भेज दिया। उनको मेहनत का फल नहीं मिला। उनको टीवी सीरियल 19 मार्च 2016 को एंड टीवी पर सीरियल के प्रसारण की अनुमति मिल गई। उन्होंने बताया कि अब से पहले 15 एपीसोड प्रसारित हो चुके हैं। सीरियल के माध्यम से सामाजिक बुराइयों पर कुठाराघात किया गया है और यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि झ़ूठी शान शौकत के लिए माता-पिता को अपनी इच्छाएं बच्चों पर नहीं थौपनी चाहिए। झूठ की बुनियाद पर रिश्ते नहीं टिकते। सुखी जीवन व रिश्तों की प्रगाड़ता के लिए सच्चाई जरूरी होती है।
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