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वृंदावन के कलाकारों ने श्री कृष्ण लीलाओं का किया मंचन
yamuna nagar beauro
Updated Fri, 17 Mar 2017 11:58 PM IST
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- फोटो : amar uajala, yamuna nagar
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गोबिंद पुरी में चल रहे श्री रास लीला उत्सव के दूसरे दिन वृंदावन से आए रास मंडली सदस्यों ने माखन चोर लीला व भगवान श्री कृष्ण की अन्य लीलाओं का मंचन किया गया। जिसका शुभारंभ इलेवन स्टार मार्निंग क्लब व गोवर्धन परिक्रमा मंडल के सदस्य वीरेंद्र त्यागी, एमआर शर्मा, अनिल कुमार, प्रवीन शर्मा, सुरेश कुमार, सेवा पाल, परीक्षित त्यागी, गौरव मोनू, राजन, शुभ रत्न, कंवरपाल, कष्ट निवारण समिति के सदस्य राकेश त्यागी व पार्षद कुसुम त्यागी ने भगवान श्री कृष्ण व राधा जी की आरती उतारकर किया।
वृंदावन की रास मंडली द्वारा भगवान श्री कृष्ण की माखन चोरी लीला व नंद उत्सव का मंचन किया गया। पूरे बृज से गोप गोपिकाएं नंद उत्सव में भाग लेने के लिए गोकुल पहुंचती हैं। जहां नंद बाबा सभी को अपनी खुशियों में शामिल करते हुए उन पर हीरे मोतियों की मालाओं की बौछार कर देते है। यहां बधाई का दौर चलता है और पूरा बृज भगवान श्री कृष्ण की जन्म की खुशी में झूम उठता है। हर कोई माता यशोदा को बधाई दे रहा है और फल स्वरूप उपहार बांटे जा रहे हैं। रास लीला के माध्यम से दिखाया गया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण बाल्य अवस्था में विभिन्न लीलाओं के माध्यम से समाज को संदेश देते थे। भगवान श्री कृष्ण किस प्रकार माता यशोदा से ताजा मक्खन खाने की हठ करते है और कहते है कि वे बासी मक्खन नही खाएंगे। मक्खन लीला करने के दौरान मटकियां भी फोड़ते है और अपने गोपाल साथियों को मक्खन का भोग लगाते है। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने संदेश देते हुए कि उन्हें धन या अन्य किसी वस्तु की चाह नही है। जो लोग दिखावे के लिए उन्हें धन व आभूषण आदि चढ़ाते हैं उससे वे खुश नही होते, बल्कि वे तो भाव के भूखे है। भाव से उनको यदि तुलसी का पत्ता भी भेंट किया जाए तो वे उसे हर्ष के साथ स्वीकार करते हैं। मौके पर रास मंडली के सदस्य द्वारा भजन अमृत वर्षा भी की गई। इस प्रकार अन्य लीलाओं का भी मंचन हुआ, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हुए।
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वृंदावन की रास मंडली द्वारा भगवान श्री कृष्ण की माखन चोरी लीला व नंद उत्सव का मंचन किया गया। पूरे बृज से गोप गोपिकाएं नंद उत्सव में भाग लेने के लिए गोकुल पहुंचती हैं। जहां नंद बाबा सभी को अपनी खुशियों में शामिल करते हुए उन पर हीरे मोतियों की मालाओं की बौछार कर देते है। यहां बधाई का दौर चलता है और पूरा बृज भगवान श्री कृष्ण की जन्म की खुशी में झूम उठता है। हर कोई माता यशोदा को बधाई दे रहा है और फल स्वरूप उपहार बांटे जा रहे हैं। रास लीला के माध्यम से दिखाया गया कि किस प्रकार भगवान श्री कृष्ण बाल्य अवस्था में विभिन्न लीलाओं के माध्यम से समाज को संदेश देते थे। भगवान श्री कृष्ण किस प्रकार माता यशोदा से ताजा मक्खन खाने की हठ करते है और कहते है कि वे बासी मक्खन नही खाएंगे। मक्खन लीला करने के दौरान मटकियां भी फोड़ते है और अपने गोपाल साथियों को मक्खन का भोग लगाते है। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने संदेश देते हुए कि उन्हें धन या अन्य किसी वस्तु की चाह नही है। जो लोग दिखावे के लिए उन्हें धन व आभूषण आदि चढ़ाते हैं उससे वे खुश नही होते, बल्कि वे तो भाव के भूखे है। भाव से उनको यदि तुलसी का पत्ता भी भेंट किया जाए तो वे उसे हर्ष के साथ स्वीकार करते हैं। मौके पर रास मंडली के सदस्य द्वारा भजन अमृत वर्षा भी की गई। इस प्रकार अन्य लीलाओं का भी मंचन हुआ, जिसे देखकर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हुए।
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