{"_id":"57a8d48f4f1c1bb461ee4946","slug":"yamunanagar-inld-crop-insurence","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसल बीमा योजना के विरोध पर सड़क पर उतरी इनेलो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसल बीमा योजना के विरोध पर सड़क पर उतरी इनेलो
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2016 12:20 AM IST
विज्ञापन
राष्ट्रपति के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इनेलो कार्यकर्ताओं ने सोमवार सुबह जगाधरी अनाजमंडी गेट पर फसल बीमा योजना के विरोध में एक घंटे तक धरना दिया। इसकी अगुवाई इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने की। कार्यकर्ताओं ने जहां सरकार विरोधी नारेबाजी की, वहीं नेताओं ने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए खूब शब्द बाण चलाए। बाद में कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे 73 पर रोष मार्च निकाला और लघु सचिवालय पहुंच कर डीसी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंप कर फसल बीमा योजना में फेरबदल की मांग की।
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाली है। इसे जबरन किसानों पर थौंप कर सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। भाजपा ने सत्ता में आने के बाद स्वामीनाथन रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। फसल बीमा योजना के तहत किसान की फसल को प्रति एकड़ न मानकर गांव को इकाई माना जा रहा है। जिससे किसानों का पैसा कुछ बीमा कंपनियों को जाएगा। उनकी मांग है कि योजना के तहत किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए गांव को इकाई न मानकर किसान के खेत को इकाई माना जाए।
प्रदर्शन में पूर्व विधायक दिलबाग सिंह, ईश्वर पलाका, दलमीरा राम सैनी, खिलाराम नरवाल, जाहिद खान, महीपाल सिंह, चरण सिंह, डिप्टी मेयर रामपाल, राजकुमार बुबका, गुरविंद्र तेजली, गुरविंद्र खेड़ी, मकसूद अली, सुरेश शर्मा, नरेंद्र चुघ, गुरप्रीत सिंह चावला, हरकीरत खुराना व सुरेंद्र सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
योजनाएं बंद कर दी
इनेलो नेताओं ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने किसानों के हित में अनेक योजनाएं शुरू की थी। किसानों को निर्धारित फसल मूल्य पर बोनस दिया जाता था। लेकिन वह भी खत्म कर दिया गया। यदि प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल खराब हो जाती थी, तो सरकार उसका मुआवजा दिया करती थी। ये दोनों अधिकार मौजूदा सरकार ने खत्म कर दिए है।
सरकार करे भुगतान
इनेलो नेताओं ने मांग की कि यदि सरकार चाहती है कि बीमा योजना सही तरह से चले तो इसका जो पैसा है, वह सरकार दे न कि किसानों से लिया जाए। इसके साथ ही जो इकाई की शर्त रखी गई है वह गांव को नहीं बल्कि खेतों को माना जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो इनेलो प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेंगी और यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा।
विज्ञापन
इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाली है। इसे जबरन किसानों पर थौंप कर सरकार किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है। भाजपा ने सत्ता में आने के बाद स्वामीनाथन रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। फसल बीमा योजना के तहत किसान की फसल को प्रति एकड़ न मानकर गांव को इकाई माना जा रहा है। जिससे किसानों का पैसा कुछ बीमा कंपनियों को जाएगा। उनकी मांग है कि योजना के तहत किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए गांव को इकाई न मानकर किसान के खेत को इकाई माना जाए।
विज्ञापन
प्रदर्शन में पूर्व विधायक दिलबाग सिंह, ईश्वर पलाका, दलमीरा राम सैनी, खिलाराम नरवाल, जाहिद खान, महीपाल सिंह, चरण सिंह, डिप्टी मेयर रामपाल, राजकुमार बुबका, गुरविंद्र तेजली, गुरविंद्र खेड़ी, मकसूद अली, सुरेश शर्मा, नरेंद्र चुघ, गुरप्रीत सिंह चावला, हरकीरत खुराना व सुरेंद्र सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
योजनाएं बंद कर दी
इनेलो नेताओं ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल ने किसानों के हित में अनेक योजनाएं शुरू की थी। किसानों को निर्धारित फसल मूल्य पर बोनस दिया जाता था। लेकिन वह भी खत्म कर दिया गया। यदि प्राकृतिक आपदा के कारण किसान की फसल खराब हो जाती थी, तो सरकार उसका मुआवजा दिया करती थी। ये दोनों अधिकार मौजूदा सरकार ने खत्म कर दिए है।
सरकार करे भुगतान
इनेलो नेताओं ने मांग की कि यदि सरकार चाहती है कि बीमा योजना सही तरह से चले तो इसका जो पैसा है, वह सरकार दे न कि किसानों से लिया जाए। इसके साथ ही जो इकाई की शर्त रखी गई है वह गांव को नहीं बल्कि खेतों को माना जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो इनेलो प्रदेश के सभी मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेंगी और यह मुद्दा विधानसभा में उठाया जाएगा।