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डेंगू कार्ड पर नहीं, सरकारी लैब की रिपोर्ट पर करें भरोसा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Aug 2016 12:01 AM IST
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डेंगू, मच्छर
- फोटो : file photo
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जिले में डेंगू का डंक लोगों को चुभने लगा है। अब तक दो डेंगू पॉजिटिव केस मिल चुके हैं। माना जा रहा है कि डेंगू पीड़ितों की संख्या में इजाफा संभव है। पिछले साल भी डेंगू जिले में बेकाबू था। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से निपटने के इंतजाम कर लिए हैं। सामने आ चुका है कि बीते सालों में प्राइवेट अस्पतालों में डेंगू को हौव्वा बनाकर बुखार पीड़ितों की जेबें ढीली करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई। डेंगू, इसके बचाव और इलाज के बारे में लोगों में अज्ञानता होने के कारण इसके पीड़ितों की संख्या बढ़ती रही है। अब स्वास्थ्य अधिकारी आम जनता को आगाह कर रहे हैं कि न तो दवा स्टोर पर उपलब्ध डेंगू कार्ड और न ही निजी लैब की रिपोर्ट पर आंख मूंद भरोसा न करें। सरकारी लैब में डेंगू का टेस्ट जरूर कराएं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू बुखार का प्रकोप अगस्त से नवंबर माह में तेजी से बढ़ता है। सितंबर और अक्टूबर मेें यह पीक पर होता है। डेंगू बुखार एडीज नाम के मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में ही हाथ और पैरों में काटता है। डेंगू के लार्वा साफ और रुके हुए पानी में होते हैं। घरों की छतों पर पुराने बर्तनों, टायरों और कूलरों में जमा पानी में डेंगू के लार्वा पनपते हैं।
सरकारी लैब में डेंगू की जांच मुफ्त
डेंगू होने पर पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या काफी घट जाती है। हालांकि प्लेटलेट्स कम होने के और भी कारण हो सकते हैं। निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों को डेंगू का मरीज बताकर उन्हें भयभीत कर दिया जाता है। इसके बाद इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली जाती है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यदि प्राइवेट अस्पताल में डाक्टर किसी बुखार पीड़ित को डेंगू बताते हैं तो मरीज के रक्त की जांच सरकारी लैब में करवाकर सच्चाई जानी जा सकती है। सिविल अस्पताल, जगाधरी में एसएसएच लैब में डेंगू की मुफ्त जांच की जाती है। लैब के इंचार्ज डॉ देवेंद्र छाबड़ा हैं। प्राइवेट लैब में भी डेंगू की जांच करवाई जा सकती है। इसके लिए एनएच वन एलाजया बेस टेस्ट ही मान्य हैं। केंद्र सरकार द्वारा एनएच वन एलायजा बेस टेस्ट का शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है। यदि कोई लैब इससे अधिक शुल्क लेता है तो स्वास्थ्य विभाग में इसकी शिकायत की जा सकती है।
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डेंगू कार्ड के रिजल्ट पर शंका
डेंगू की जांच के लिए इन दिनों मेडिकल स्टोर में डेंगू कार्ड भी मिल रहे हैं। कार्ड बनाने वाली कंपनियों के अनुसार इस कार्ड से मिनटों में डेंगू पीड़ित होने का पता चल जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस कार्ड की रिपोर्ट को परफेक्ट नहीं मानता। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक प्राइवेट अस्पतालों में इस कार्ड की रिपोर्ट केे आधार पर बुखार पीड़ितों को डेंगू मानकर इलाज भी किया जाता रहा है। पिछले साल इस कार्ड की रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए गए केसों की सरकारी लैब में दोबारा जांच की गई तो वे निगेटिव निकले।
एक यूनिट प्लेटलेट्स की बोतल 300 में
सामान्य व्यक्ति के शरीर में डेढ़ लाख से दो लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं। डेंगू होने पर पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाती है। कई बार प्लेटलेट्स 20 हजार या इससे भी कम हो जाते हैं। डेंगू पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा को निर्धारित संख्या तक पहुंचाने के लिए उसे प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते है, जो कि ट्रामा सेंटर के ब्लड बैंक में मिल जाते है। ब्लड बैंक में एक यूनिट प्लेटलेट्स बोतल की कीमत 300 रुपये है।
ट्रामा सेंटर में बनाया डेंगू वार्ड
डेंगू सीजन शुरू होने पर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। इसके लिए ट्रामा सेंटर में डेंगू वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में दो बेड और अन्य चिकित्सा इंतजाम मौजूद हैं। हालांकि अभी तक सरकारी अस्पताल में डेंगू का एक भी मरीज सामने नहीं आया है।
ऐसे बचें डेंगू के मच्छर एडीज से
-डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में पनपता है। इससे बचने के लिए कूलर आदि का पानी प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर बदलें।
-पानी की टंकियों को खुली न रखें।
-बेकार टायर, खाली बर्तन आदि में पानी खड़ा न होने दें, ताकि डेंगू फैलाने वाले मच्छर का लार्वा न पनप सके।
-रात को सोते समय शरीर को ढ़ककर सोएं और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
-डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है, इसलिए ऐसे कपड़े पहने जो बदन को पूरी तरह ढके।
-ये भी जानें-
-डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है, बुखार उतारने के लिए पैरासीटामोल ले सकते हैं।
-एस्प्रीन या इबुब्रेफे न का इस्तेमाल स्वयं न करें तथा डॉक्टर की सलाह लें।
-डेंगू के हर रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
-किसी भी प्रकार का बुखार होने पर रक्त की जांच अवश्य करवाएं, ताकि बुखार की किस्म का पता चल सके और उसी बुखार का इलाज किया जा सके।
वर्जन-
यदि प्राइवेट अस्पताल में डाक्टर पेशेंट को डेेंगू बताते है तो सरकारी लैब से जांच करवाकर यह सुनिश्चित कर लेें कि डेंगू है या नहीं। सरकारी ब्लड बैंक मे प्लेटलेट्स उपलब्ध है। ट्रामा सेंटर में डेंगू वार्ड भी बना दिया गया है। अभी तक डेंगू के दो पॉजिटिव केस मिले हैं।
डॉ वीके जैन, जिला मलेरिया अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेंगू बुखार का प्रकोप अगस्त से नवंबर माह में तेजी से बढ़ता है। सितंबर और अक्टूबर मेें यह पीक पर होता है। डेंगू बुखार एडीज नाम के मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन में ही हाथ और पैरों में काटता है। डेंगू के लार्वा साफ और रुके हुए पानी में होते हैं। घरों की छतों पर पुराने बर्तनों, टायरों और कूलरों में जमा पानी में डेंगू के लार्वा पनपते हैं।
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सरकारी लैब में डेंगू की जांच मुफ्त
डेंगू होने पर पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या काफी घट जाती है। हालांकि प्लेटलेट्स कम होने के और भी कारण हो सकते हैं। निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों को डेंगू का मरीज बताकर उन्हें भयभीत कर दिया जाता है। इसके बाद इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम ऐंठ ली जाती है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक यदि प्राइवेट अस्पताल में डाक्टर किसी बुखार पीड़ित को डेंगू बताते हैं तो मरीज के रक्त की जांच सरकारी लैब में करवाकर सच्चाई जानी जा सकती है। सिविल अस्पताल, जगाधरी में एसएसएच लैब में डेंगू की मुफ्त जांच की जाती है। लैब के इंचार्ज डॉ देवेंद्र छाबड़ा हैं। प्राइवेट लैब में भी डेंगू की जांच करवाई जा सकती है। इसके लिए एनएच वन एलाजया बेस टेस्ट ही मान्य हैं। केंद्र सरकार द्वारा एनएच वन एलायजा बेस टेस्ट का शुल्क 600 रुपये निर्धारित किया गया है। यदि कोई लैब इससे अधिक शुल्क लेता है तो स्वास्थ्य विभाग में इसकी शिकायत की जा सकती है।
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डेंगू कार्ड के रिजल्ट पर शंका
डेंगू की जांच के लिए इन दिनों मेडिकल स्टोर में डेंगू कार्ड भी मिल रहे हैं। कार्ड बनाने वाली कंपनियों के अनुसार इस कार्ड से मिनटों में डेंगू पीड़ित होने का पता चल जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस कार्ड की रिपोर्ट को परफेक्ट नहीं मानता। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक प्राइवेट अस्पतालों में इस कार्ड की रिपोर्ट केे आधार पर बुखार पीड़ितों को डेंगू मानकर इलाज भी किया जाता रहा है। पिछले साल इस कार्ड की रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए गए केसों की सरकारी लैब में दोबारा जांच की गई तो वे निगेटिव निकले।
एक यूनिट प्लेटलेट्स की बोतल 300 में
सामान्य व्यक्ति के शरीर में डेढ़ लाख से दो लाख तक प्लेटलेट्स होते हैं। डेंगू होने पर पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाती है। कई बार प्लेटलेट्स 20 हजार या इससे भी कम हो जाते हैं। डेंगू पीड़ित के रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा को निर्धारित संख्या तक पहुंचाने के लिए उसे प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते है, जो कि ट्रामा सेंटर के ब्लड बैंक में मिल जाते है। ब्लड बैंक में एक यूनिट प्लेटलेट्स बोतल की कीमत 300 रुपये है।
ट्रामा सेंटर में बनाया डेंगू वार्ड
डेंगू सीजन शुरू होने पर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। इसके लिए ट्रामा सेंटर में डेंगू वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में दो बेड और अन्य चिकित्सा इंतजाम मौजूद हैं। हालांकि अभी तक सरकारी अस्पताल में डेंगू का एक भी मरीज सामने नहीं आया है।
ऐसे बचें डेंगू के मच्छर एडीज से
-डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में पनपता है। इससे बचने के लिए कूलर आदि का पानी प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर बदलें।
-पानी की टंकियों को खुली न रखें।
-बेकार टायर, खाली बर्तन आदि में पानी खड़ा न होने दें, ताकि डेंगू फैलाने वाले मच्छर का लार्वा न पनप सके।
-रात को सोते समय शरीर को ढ़ककर सोएं और मच्छरदानी का प्रयोग करें।
-डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है, इसलिए ऐसे कपड़े पहने जो बदन को पूरी तरह ढके।
-ये भी जानें-
-डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है, बुखार उतारने के लिए पैरासीटामोल ले सकते हैं।
-एस्प्रीन या इबुब्रेफे न का इस्तेमाल स्वयं न करें तथा डॉक्टर की सलाह लें।
-डेंगू के हर रोगी को प्लेटलेट्स की आवश्यकता नहीं पड़ती। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
-किसी भी प्रकार का बुखार होने पर रक्त की जांच अवश्य करवाएं, ताकि बुखार की किस्म का पता चल सके और उसी बुखार का इलाज किया जा सके।
वर्जन-
यदि प्राइवेट अस्पताल में डाक्टर पेशेंट को डेेंगू बताते है तो सरकारी लैब से जांच करवाकर यह सुनिश्चित कर लेें कि डेंगू है या नहीं। सरकारी ब्लड बैंक मे प्लेटलेट्स उपलब्ध है। ट्रामा सेंटर में डेंगू वार्ड भी बना दिया गया है। अभी तक डेंगू के दो पॉजिटिव केस मिले हैं।
डॉ वीके जैन, जिला मलेरिया अधिकारी