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सूखे पेड़ों को कटवाने में विभाग सुस्त
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Updated Wed, 23 Mar 2016 12:31 AM IST
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ढाई किलोमीटर में मिलें एक दर्जन सूखे पेड़
अमर उजाला की टीम ने नेशनल हाईवे 73 पर कमानी चौक से हुडा चौकी मोड़ तक करीब ढाई किलोमीटर तक सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का जायजा दिया। इस दौरान करीब एक दर्जन सूखे पेड़ नजर आए, जो गिरने की कगार पर हैं। संत निश्चल सिंह स्कूल के नजदीक सूखे पेड़ हाईटेंशन तार की ओर झुके हुए हैं, जो बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। वहीं दो दर्जन से अधिक सफेदे के पेड़ों की टहनियां सड़क की ओर झुकी हुई हैं। मार्च व अप्रैल में आंधी-तूफान आते हैं। सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा के लिए इन टहनियों को भी काटना जरूरी है।
-सूखे पेड़ों की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाते हैं महीनों
डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी कमेटी की बैठकों में पिछले तीन साल से सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। प्रोजक्टर के माध्यम से इन पेड़ों को अधिकारियों को दिखाया गया। हर बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन पेड़ों को कटवाने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालात यह है कि पेड़ कटवाने में विभाग की कार्यवाही इतनी सुस्त होती है कि जब तक वे पेड़ काटे जाते हैं, तब तक दर्जनों अन्य पेड़ सूख चुके होते हैं। ऐसे मेें विभागीय कार्यवाही फिर नए सिरे से शुरू होती है, यानि सूखे पेड़ों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। फिर फाइल को अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद पेड़ों को कटवाने की कार्रवाई आरंभ की जाती है। अमर उजाला ने जिन सूखे पेड़ों को हाई लाइट किया, उनमें अधिकतर को संबंधित विभाग रिपोर्ट तैयार कर चुका है, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इन्हें काटा नहीं गया है।
-सूखे पेड़ों ने तीन साल मेें ली तीन की जान
जुलाई 2012 में औरंगाबाद के नजदीक एक सूखा पेड़ मोटरसाइकिल सवार पब्लिक हेल्थ विभाग के एक आपरेटर के ऊपर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वर्ष 2012 में ही सरनी चौक के नजदीक भगत सिंह पार्क में लगा एक पेड़ देर शाम आई आंधी में सड़क पर गिर गया। छोटा माडल टाउन निवासी एक ठेकेदार पेड़ के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। करीब ढाई साल पहले नेशनल हाईवे 73 ए पर गांव पीपली माजरा के नजदीक एक सूखे पेड़ की मोटी टहनी एक स्कूटर सवार पर गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
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अमर उजाला की टीम ने नेशनल हाईवे 73 पर कमानी चौक से हुडा चौकी मोड़ तक करीब ढाई किलोमीटर तक सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का जायजा दिया। इस दौरान करीब एक दर्जन सूखे पेड़ नजर आए, जो गिरने की कगार पर हैं। संत निश्चल सिंह स्कूल के नजदीक सूखे पेड़ हाईटेंशन तार की ओर झुके हुए हैं, जो बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। वहीं दो दर्जन से अधिक सफेदे के पेड़ों की टहनियां सड़क की ओर झुकी हुई हैं। मार्च व अप्रैल में आंधी-तूफान आते हैं। सड़क से गुजरने वालों की सुरक्षा के लिए इन टहनियों को भी काटना जरूरी है।
-सूखे पेड़ों की रिपोर्ट तैयार करने में लग जाते हैं महीनों
डिस्ट्रिक रोड सेफ्टी कमेटी की बैठकों में पिछले तीन साल से सड़क किनारे लगे सूखे पेड़ों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। प्रोजक्टर के माध्यम से इन पेड़ों को अधिकारियों को दिखाया गया। हर बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन पेड़ों को कटवाने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालात यह है कि पेड़ कटवाने में विभाग की कार्यवाही इतनी सुस्त होती है कि जब तक वे पेड़ काटे जाते हैं, तब तक दर्जनों अन्य पेड़ सूख चुके होते हैं। ऐसे मेें विभागीय कार्यवाही फिर नए सिरे से शुरू होती है, यानि सूखे पेड़ों की पहचान कर उनकी रिपोर्ट तैयार की जाती है। फिर फाइल को अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद पेड़ों को कटवाने की कार्रवाई आरंभ की जाती है। अमर उजाला ने जिन सूखे पेड़ों को हाई लाइट किया, उनमें अधिकतर को संबंधित विभाग रिपोर्ट तैयार कर चुका है, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी इन्हें काटा नहीं गया है।
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-सूखे पेड़ों ने तीन साल मेें ली तीन की जान
जुलाई 2012 में औरंगाबाद के नजदीक एक सूखा पेड़ मोटरसाइकिल सवार पब्लिक हेल्थ विभाग के एक आपरेटर के ऊपर गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। वर्ष 2012 में ही सरनी चौक के नजदीक भगत सिंह पार्क में लगा एक पेड़ देर शाम आई आंधी में सड़क पर गिर गया। छोटा माडल टाउन निवासी एक ठेकेदार पेड़ के नीचे दब गया, जिससे उसकी मौत हो गई। करीब ढाई साल पहले नेशनल हाईवे 73 ए पर गांव पीपली माजरा के नजदीक एक सूखे पेड़ की मोटी टहनी एक स्कूटर सवार पर गिर गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई।
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