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दिवाली की रात ध्वनि डेंजर जोन को कर सकती है पार
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Tue, 10 Nov 2015 11:57 PM IST
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जगाधरी। दिवाली के दिन बजने वाले पटाखे हवा में जहर घोलने का काम करते हैं, जबकि उनसे निकलने वाली ध्वनि डेंजर जोन को क्रास कर जाती है। ऐसा हम नहीं, बल्कि विशेषज्ञों का कहना है।
दिवाली की रात को अधिक मात्रा में पटाखे फोड़े जाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पटाखों से सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसिज निकली है। जो हवा में जहर घोलने का काम करती है। सांस के जरिए यही जहरीली हवा हमारे अंदर चली जाती है। जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।
बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक हवा में मौजूद धूल कण एसपीएम (सस्पेंडिड पॉर्टिक्यूलर मैटर) की मात्रा 200 माइक्रोग्राम पर मिट्रिक क्यूब होनी चाहिए, लेकिन दिवाली पर यह मात्रा तीन गुणा अधिक तक पहुंच जाती है। पिछली साल दिवाली पर लिए गए सैंपल के आधार पर यह मात्रा 552 माइक्रोग्राम पर मिट्रिक क्यूब आंकी गई। इसके अलावा सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी निर्धारित मानकों से ज्यादा पाई गई।
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डेंजर जोन क्रास कर जाता है ध्वनि का स्तर
दिवाली के दिन ध्वनि का स्तर डेंजर जोन को भी क्रास कर जाता है। ऐसा हम नहीं कर रहे बल्कि यह खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई सैंपलिंग से हुआ है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक जब पटाखा बजता है, तो उस समय ध्वनि का स्तर 100 डेसीबल से ज्यादा तक पहुंच जाता है। जो कि कानों के लिए हानिकारक है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल फव्वारा चौक पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर 73 डेसीबल दर्ज किया गया। जबकि नेहरू पार्क के पास 69 डीबी और बस स्टैंड यमुनानगर के पास 70 डीबी दर्ज किया गया। बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक रिहायसी क्षेत्र में रात के समय ध्वनि की मात्रा 45 डीबी, औद्योगिक क्षेत्र में 65 डीबी और कमर्शियल क्षेत्र में 55 डीबी निर्धारित की गई है।
फट सकता है कान का पर्दा
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. जनक का कहना है कि कान का अंदरूनी भाग 80 से 90 डेसीबल तक ध्वनि को सुन सकता है। इससे ज्यादा ध्वनि अंदरूनी कान को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। अगर ज्यादा जोर से आवाज को सुन लिया जाए, तो नुकसान पहुंचना लाजमी है। अगर पटाखे की आवाज काफी तेज हो तो कान के बीच का पर्दा फटने का डर बना रहता है। जहां तक संभव हो सकें, कम से कम पटाखें चलाए या फिर कान में रूई लगा लें।
जहरीली गैस से हो सकती है सांस की बीमारी
बाल रोग विशेषज्ञ डा. विजय दहिया का कहना है कि दिवाली के दिन बजने वाले पटाखों से जो जहरीली गैस निकलती हैं, उनसे सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लोगों को एलर्जी की दिक्कतें शुरू हो जाती है।
बोर्ड द्वारा दिवाली के दिन शाम छह बजे से लेकर रात 12 बजे तक फव्वारा चौक, नेहरू पार्क और बस स्टैंड यमुनानगर के पास हर घंटे ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे। जिन्हें हेड ऑफिस भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चल पाएगा कि दिवाली के दिन ध्वनि प्रदूषण का स्तर क्या रहा।
डा. जयभगवान, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुनानगर।
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दिवाली की रात को अधिक मात्रा में पटाखे फोड़े जाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पटाखों से सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसिज निकली है। जो हवा में जहर घोलने का काम करती है। सांस के जरिए यही जहरीली हवा हमारे अंदर चली जाती है। जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है।
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बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक हवा में मौजूद धूल कण एसपीएम (सस्पेंडिड पॉर्टिक्यूलर मैटर) की मात्रा 200 माइक्रोग्राम पर मिट्रिक क्यूब होनी चाहिए, लेकिन दिवाली पर यह मात्रा तीन गुणा अधिक तक पहुंच जाती है। पिछली साल दिवाली पर लिए गए सैंपल के आधार पर यह मात्रा 552 माइक्रोग्राम पर मिट्रिक क्यूब आंकी गई। इसके अलावा सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा भी निर्धारित मानकों से ज्यादा पाई गई।
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डेंजर जोन क्रास कर जाता है ध्वनि का स्तर
दिवाली के दिन ध्वनि का स्तर डेंजर जोन को भी क्रास कर जाता है। ऐसा हम नहीं कर रहे बल्कि यह खुलासा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई सैंपलिंग से हुआ है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक जब पटाखा बजता है, तो उस समय ध्वनि का स्तर 100 डेसीबल से ज्यादा तक पहुंच जाता है। जो कि कानों के लिए हानिकारक है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक पिछले साल फव्वारा चौक पर ध्वनि प्रदूषण का स्तर 73 डेसीबल दर्ज किया गया। जबकि नेहरू पार्क के पास 69 डीबी और बस स्टैंड यमुनानगर के पास 70 डीबी दर्ज किया गया। बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों के मुताबिक रिहायसी क्षेत्र में रात के समय ध्वनि की मात्रा 45 डीबी, औद्योगिक क्षेत्र में 65 डीबी और कमर्शियल क्षेत्र में 55 डीबी निर्धारित की गई है।
फट सकता है कान का पर्दा
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. जनक का कहना है कि कान का अंदरूनी भाग 80 से 90 डेसीबल तक ध्वनि को सुन सकता है। इससे ज्यादा ध्वनि अंदरूनी कान को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। अगर ज्यादा जोर से आवाज को सुन लिया जाए, तो नुकसान पहुंचना लाजमी है। अगर पटाखे की आवाज काफी तेज हो तो कान के बीच का पर्दा फटने का डर बना रहता है। जहां तक संभव हो सकें, कम से कम पटाखें चलाए या फिर कान में रूई लगा लें।
जहरीली गैस से हो सकती है सांस की बीमारी
बाल रोग विशेषज्ञ डा. विजय दहिया का कहना है कि दिवाली के दिन बजने वाले पटाखों से जो जहरीली गैस निकलती हैं, उनसे सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लोगों को एलर्जी की दिक्कतें शुरू हो जाती है।
बोर्ड द्वारा दिवाली के दिन शाम छह बजे से लेकर रात 12 बजे तक फव्वारा चौक, नेहरू पार्क और बस स्टैंड यमुनानगर के पास हर घंटे ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए सैंपल लिए जाएंगे। जिन्हें हेड ऑफिस भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट आने पर पता चल पाएगा कि दिवाली के दिन ध्वनि प्रदूषण का स्तर क्या रहा।
डा. जयभगवान, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुनानगर।