फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   yamuna nagar, swsth seva bekar

जिले में पर्याप्त नहीं है सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं

Fri, 28 Oct 2016 11:13 PM IST
amar ujala beuro yamunanagar
amar ujala beuro yamunanagar Updated Fri, 28 Oct 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
yamuna nagar, swsth seva bekar
ds - फोटो : ds
स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से यमुनानगर प्रदेश के गठन के समय से पिछड़ता आया है। जिस समय हरियाणा प्रदेश अस्तित्व में आया, उस समय यमुनानगर अंबाला जिले का हिस्सा था। इस कारण यहां सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं केवल काम चलाऊ ही रही। अलग जिला बनने के बाद यमुनानगर की विधायक डॉ. कमला वर्मा स्वास्थ्य मंत्री बनीं और उन्होंने जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी करवाई।
विज्ञापन



प्रदेश के गठन के समय यमुनानगर व जगाधरी में सरकारी अस्पताल नहीं थे। केवल यमुनानगर में समाज सेवा में अग्रणी मुकंद लाल परिवार द्वारा संचालित धर्मार्थ अस्पताल था। जगाधरी के लोग भी इसी अस्पताल में इलाज के लिए आते थे। प्रदेश के गठन के करीब डेढ़ दशक बाद यमुनानगर व जगाधरी में सिविल अस्पताल बने, लेकिन इनमें डाक्टरों की संख्या काफी कम थी।
विज्ञापन


उस दौरान यमुनानगर से डॉ. कमला वर्मा तीन बार विधायक बनीं और तीनों बार वह प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहीं। डॉ. कमला वर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करवाया। उस समय यमुनानगर सिविल अस्पताल 20 बेड का था, जिन्हें डॉ. वर्मा ने 100 बेड का करवाया। इसके अलावा कई प्राइमरी हेल्थ सेंटरों को अपग्रेड कर कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर करवाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


न बेड पूरे, न डाक्टर...
मौजूदा समय में जिले में दो सिविल अस्पताल, छह कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर, 12 प्राइमरी हेल्थ सेंटर तथा पांच अर्बन हेल्थ सेंटर हैं। ट्रामा सेंटर की क्षमता 100 बेड की है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जिले की जनसंख्या को देखते हुए ट्रामा सेंटर में 300 बेड की चिकित्सा सुविधाएं होनी चाहिए। ट्रामा सेंटर में बेड कम होने का खामियाजा मरीजों को भुगतान पड़ रहा है। आलम यह है कि एक बेड पर दो-दो मरीजों को लिटाना पड़ता है। इससे गर्मी के दिनों में मरीजों का बुरा हाल हो जाता है। वहीं, डाक्टरों की संख्या भी कम है। जिले की जनसंख्या के लिहाज से करीब 40 प्रतिशत डाक्टर कम हैं।

-डेंगू टेस्ट व प्लेटलेट्स की सुविधा
ट्रामा सेंटर में भले ही बेडों की संख्या कम है, लेकिन जिले की कुछ स्वास्थ्य सेवाएं अन्य जिलों से बेहतर है। जगाधरी के सिविल अस्पताल में डेंगू टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। पहले संदिग्ध डेंगू मरीजों को इसके लिए चंड़ीगढ जाना पड़ता था या प्राइवेट अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता था। जिले मेें डेंगू टेस्ट की सुविधा होने पर प्राइवेट अस्पतालों की लूट खसोट पर कुछ हद तक अंकुश लगा है। इसके अलावा जिले में सरकारी ब्लड बैंक भी है, जहां प्लेटलेट्स उपलब्ध है। प्लेटलेट्स की सबसे अधिक जरूरत डेंगू के मरीजों को होती है।

-प्राइवेट अस्पतालों मेें हर मर्ज का इलाज-
जिले के प्राइवेट अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं उच्च क्वालिटी की हैं। प्राइवेट अस्पतालों में कैंसर, ब्रेन, हार्ट, किडनी, लीवर व नेत्र रोगियों के स्पेशलिस्ट डाक्टर्स हैं। इन हास्पिटल में अत्याधुनिक सुविधाएं होने के कारण जिले से लगते उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के मरीज भी यहां इलाज के आते हैं।


जिस समय हरियाणा अलग प्रदेश बना, उस समय यमुनानगर व जगाधरी में कोई भी सरकारी अस्पताल नहीं था। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इलाज के लिए अंबाला ले जाना पड़ता था। यमुनानगर के अलग जिला बनने के बाद सरकारी सुविधाएं बढीं। प्राइवेट अस्पताल खुलने से अमीरों के लिए इलाज आसान हुआ है। इतने सालों में सरकारी अस्पतालों की संख्या जरूर बढी, लेकिन इनमें सुविधाएं कम हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed