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दूसरे दिन भी रोडवेज कर्मियों ने किया चक्काजाम, यात्री रहे परेशान
yamuna nagar beuro
Updated Wed, 12 Apr 2017 12:01 AM IST
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- फोटो : yamuna nagar
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निजी बसों को परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मियों ने दूसरे दिन भी रोडवेज बसों का चक्काजाम रखा। बसें नहीं चलने से यात्री इधर-उधर भटकतेे रहे तो कई बस स्टैंड परिसर में ही बसों के चलने का इंतजार करते रहे। रोडवेज कर्मियों के हड़ताल पर जाने से डेढ़ दिन में रोडवेज को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं हड़ताल पर रहे कर्मी मंगलवार अलसुबह से बस स्टैंड परिसर में धरने पर बैठ नारेबाजी करते रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी यदि उनकी मांग जल्द पूरी नहीं की गई तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
सरकार द्वारा प्राइवेट बसों को दी जा रही परमिट के विरोध में हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर हड़ताल होने के बाद सभी यूनियन के नेता व कर्मचारी एक हो गए हैं। कमेटी के प्रदेश स्तर के नेता हरिनारायण शर्मा की अध्यक्षता में सभी कर्मचारी मंगलवार अलसुबह यमुनानगर बस स्टैंड का गेट बंद कर धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। हड़ताल के दौरान धरने पर बैठे कर्मचारियों को डिपो प्रधान रतन सिंह कलानौर, वरयाम सिंह, फूल कुमार, नंद लाल, सुमित सूद, प्रताप सिंह आदि नेताओं ने संबोधित कर सरकार की नीतियों का जमकर विरोध किया। कर्मचारियों नेताओं ने कहा सरकार ने सोचा था कि कर्मचारियों एकजुट नहीं है। इनकी कई यूनियन हैं, ये आपस में एक नहीं हो सकते। लेकिन कर्मचारियों ने जिस तरह से एकता का परिचय दिया है इससे सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया है। सरकार तो रोडवेज का निजीकरण करने पर तुली है।
परंतु हम ऐसा नहीं होने देंगे। कर्मचारी नेताओं ने सरकार को कोसते हुए कहा जब से प्रदेश में भाजपा सरकार आई है तब से रोडवेज के बेड़े में नई बसें नहीं आई। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज बयान देते थे कि रोडवेज का निजीकरण नहीं किया जाएगा। परंतु अब एक शब्द भी निजीकरण के खिलाफ नहीं बोल रहे हैं। प्राइवेट बसों को परमिट देकर सरकार प्रदेश की जनता से धोखा कर रही है। कहा प्राइवेट बसों के चलने से लोगों को कोई फायदा नहीं होगा। वह अपनी मर्जी से बसों को चलाते हैं। यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। यदि सरकारी बसें चलेंगी तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। यात्रियों और स्कूल कॉलेज आने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। यूनियन नेताओं ने चेतावनी देते कहा यदि जल्द ही सरकार ने अपने फैसले का वापस नहीं लिया तो वे अनिश्चितकालीन तक हड़ताल पर बैठे रहेंगे।
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पहली शिफ्ट में 414 कर्मचारी रहे हड़ताल पर
यमुनानगर डिपो में कुल 684 रोडवेज कर्मचारी है। पहली शिफ्ट तक इसमें से 414 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बाकी का स्टाफ हड़ताल पर रहेगा या काम पर लौटेगा इसका पता दूसरी शिफ्ट की हाजिरी के बाद पता चलेगा। रोडवेज के सभी चालक व परिचालक बसों को वर्कशाप के अंदर खड़ी कर धरने पर बैठे रहे। हड़ताल के दौरान भी वर्कशाप व बस स्टैंड परिसर में नाममात्र स्टाफ देखने को मिला। करीब सौ कर्मचारी ही वर्कशाप में दिखाई दिए।
कॉलेज पहुंचने में हुई देरी
रोडवेज की हड़ताल से विद्यार्थियों को स्कूल व कॉलेज आने में दिक्कतों को सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते अधिकतर विद्यार्थी निजी वाहनों, ऑटों, टैक्सी या लिफ्ट लेकर कॉलेज पहुंचे। छात्राओं को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ा। जिसके चलते उन्हें कॉलेज पहुंचने में देरी हुई। ट्विनसिटी में तीन गर्ल्स कॉलेज है। जिनमें जिले भर से हजारों विद्यार्थी बसों के माध्यम से कॉलेज पहुंचते है।
इन रूट के अधिक यात्री हुए परेशान
यमुनानगर से सबसे अधिक रोडवेज बस सर्विस दिल्ली, कुरुक्षेत्र, अंबाला, चंडीगढ़, करनाल, पानीपत, पौंटा साहिब, सहारनपुर आदि की है। रोडवेज की हड़ताल के चलते इन रूट पर जाने वाले यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कतों को सामना करना पड़ा। कुछ यात्री बस स्टैंड के अंदर खड़े होकर बसे चलने का इंतजार करते रहे, तो कुछ कमानी चौक पर जाकर प्राइवेट वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्यों की ओर निकले।
बस न चलने पर बेटे को बुलाया
शहजादपुर निवासी सत्या देवी का कहना है कि वे सोमवार को रिश्तेदारी में आंबवाला गई थी। मंगलवार को घर लौटना था। लेकिन सुबह पता चला कि रोडवेज बसों की हड़ताल है। जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 35 किलोमीटर दूर से अकेले आने में दिक्कत होती है। इसलिए उसने अपने बेटे को बाइक लेकर बुलाया।
डेढ़ दिन में रोडवेज को 20 लाख का फटका
हरियाणा रोडवेज यमुनानगर डिपो की एक दिन की 14 लाख रुपये की कमाई होती है। रोडवेज की हड़ताल सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे से जारी है। मंगलवार को दिनभर हड़ताल जारी रही। जिसके चलते डेढ़ दिन में करीब 20 लाख रुपये का रोडवेज का फटका लग चुका है। यदि हड़ताल बुधवार को भी जारी रही तो ढाई दिन में रोडवेज को 34 लाख रुपये का नुकसान होगा।
सरकार को करनी चाहिए थी वैकल्पिक व्यवस्था
बस स्टैंड पर परेशान खड़े यात्री रादौर निवासी कुलभूषण, अलाहर निवासी शुभम, बिलासपुर निवासी विनोद आदि का कहना है कि बस नहीं चलने से उन्हें काफी परेशानी हुई। सरकार को चाहिए कि रोडवेज हड़ताल के दौरान बसों को चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था करे। कहा सरकार को चाहिए की वह निजी बसों की बजाय सरकारी बसें चलाए। क्योंकि सरकारी बसें चलने से ही लोगों को फायदा है। सरकार की आमदनी बढ़ेगी। जबकि निजी बस चालक तो अपनी मनमर्जी करते हैं। जब तक बस सवारियों से फुल नहीं होती वे तब तक नहीं चलते।
मांग न मानी जाने तक जारी रहेगी हड़ताल
हरियाणा रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रदेश स्तर के नेता हरिनारायण शर्मा का कहना है कि निजी परमिटों के विरोध में हड़ताल है। सरकार से बातचीत की जा रही है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
यह हड़ताल पूरे प्रदेश में हैं। निजी बसों को परमिट देना या नहीं देना सरकार के स्तर पर ही तय होता है। इसी को लेकर सरकार व रोडवेज नेताओं के बीच बातचीत चल रही है। एक दिन में यमुनानगर डिपो को 14 लाख रुपये की कमाई होती है। डेढ़ दिन की हड़ताल से करीब 20 लाख रुपये का नुकसान है।
-रविंद्र पाठक, रोडवेज जीएम, यमुनानगर।
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सरकार द्वारा प्राइवेट बसों को दी जा रही परमिट के विरोध में हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर हड़ताल होने के बाद सभी यूनियन के नेता व कर्मचारी एक हो गए हैं। कमेटी के प्रदेश स्तर के नेता हरिनारायण शर्मा की अध्यक्षता में सभी कर्मचारी मंगलवार अलसुबह यमुनानगर बस स्टैंड का गेट बंद कर धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। हड़ताल के दौरान धरने पर बैठे कर्मचारियों को डिपो प्रधान रतन सिंह कलानौर, वरयाम सिंह, फूल कुमार, नंद लाल, सुमित सूद, प्रताप सिंह आदि नेताओं ने संबोधित कर सरकार की नीतियों का जमकर विरोध किया। कर्मचारियों नेताओं ने कहा सरकार ने सोचा था कि कर्मचारियों एकजुट नहीं है। इनकी कई यूनियन हैं, ये आपस में एक नहीं हो सकते। लेकिन कर्मचारियों ने जिस तरह से एकता का परिचय दिया है इससे सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया है। सरकार तो रोडवेज का निजीकरण करने पर तुली है।
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परंतु हम ऐसा नहीं होने देंगे। कर्मचारी नेताओं ने सरकार को कोसते हुए कहा जब से प्रदेश में भाजपा सरकार आई है तब से रोडवेज के बेड़े में नई बसें नहीं आई। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज बयान देते थे कि रोडवेज का निजीकरण नहीं किया जाएगा। परंतु अब एक शब्द भी निजीकरण के खिलाफ नहीं बोल रहे हैं। प्राइवेट बसों को परमिट देकर सरकार प्रदेश की जनता से धोखा कर रही है। कहा प्राइवेट बसों के चलने से लोगों को कोई फायदा नहीं होगा। वह अपनी मर्जी से बसों को चलाते हैं। यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। यदि सरकारी बसें चलेंगी तो बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। यात्रियों और स्कूल कॉलेज आने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। यूनियन नेताओं ने चेतावनी देते कहा यदि जल्द ही सरकार ने अपने फैसले का वापस नहीं लिया तो वे अनिश्चितकालीन तक हड़ताल पर बैठे रहेंगे।
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पहली शिफ्ट में 414 कर्मचारी रहे हड़ताल पर
यमुनानगर डिपो में कुल 684 रोडवेज कर्मचारी है। पहली शिफ्ट तक इसमें से 414 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बाकी का स्टाफ हड़ताल पर रहेगा या काम पर लौटेगा इसका पता दूसरी शिफ्ट की हाजिरी के बाद पता चलेगा। रोडवेज के सभी चालक व परिचालक बसों को वर्कशाप के अंदर खड़ी कर धरने पर बैठे रहे। हड़ताल के दौरान भी वर्कशाप व बस स्टैंड परिसर में नाममात्र स्टाफ देखने को मिला। करीब सौ कर्मचारी ही वर्कशाप में दिखाई दिए।
कॉलेज पहुंचने में हुई देरी
रोडवेज की हड़ताल से विद्यार्थियों को स्कूल व कॉलेज आने में दिक्कतों को सामना करना पड़ा। हड़ताल के चलते अधिकतर विद्यार्थी निजी वाहनों, ऑटों, टैक्सी या लिफ्ट लेकर कॉलेज पहुंचे। छात्राओं को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ा। जिसके चलते उन्हें कॉलेज पहुंचने में देरी हुई। ट्विनसिटी में तीन गर्ल्स कॉलेज है। जिनमें जिले भर से हजारों विद्यार्थी बसों के माध्यम से कॉलेज पहुंचते है।
इन रूट के अधिक यात्री हुए परेशान
यमुनानगर से सबसे अधिक रोडवेज बस सर्विस दिल्ली, कुरुक्षेत्र, अंबाला, चंडीगढ़, करनाल, पानीपत, पौंटा साहिब, सहारनपुर आदि की है। रोडवेज की हड़ताल के चलते इन रूट पर जाने वाले यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कतों को सामना करना पड़ा। कुछ यात्री बस स्टैंड के अंदर खड़े होकर बसे चलने का इंतजार करते रहे, तो कुछ कमानी चौक पर जाकर प्राइवेट वाहनों के माध्यम से अपने गंतव्यों की ओर निकले।
बस न चलने पर बेटे को बुलाया
शहजादपुर निवासी सत्या देवी का कहना है कि वे सोमवार को रिश्तेदारी में आंबवाला गई थी। मंगलवार को घर लौटना था। लेकिन सुबह पता चला कि रोडवेज बसों की हड़ताल है। जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 35 किलोमीटर दूर से अकेले आने में दिक्कत होती है। इसलिए उसने अपने बेटे को बाइक लेकर बुलाया।
डेढ़ दिन में रोडवेज को 20 लाख का फटका
हरियाणा रोडवेज यमुनानगर डिपो की एक दिन की 14 लाख रुपये की कमाई होती है। रोडवेज की हड़ताल सोमवार शाम करीब साढ़े चार बजे से जारी है। मंगलवार को दिनभर हड़ताल जारी रही। जिसके चलते डेढ़ दिन में करीब 20 लाख रुपये का रोडवेज का फटका लग चुका है। यदि हड़ताल बुधवार को भी जारी रही तो ढाई दिन में रोडवेज को 34 लाख रुपये का नुकसान होगा।
सरकार को करनी चाहिए थी वैकल्पिक व्यवस्था
बस स्टैंड पर परेशान खड़े यात्री रादौर निवासी कुलभूषण, अलाहर निवासी शुभम, बिलासपुर निवासी विनोद आदि का कहना है कि बस नहीं चलने से उन्हें काफी परेशानी हुई। सरकार को चाहिए कि रोडवेज हड़ताल के दौरान बसों को चलाने की वैकल्पिक व्यवस्था करे। कहा सरकार को चाहिए की वह निजी बसों की बजाय सरकारी बसें चलाए। क्योंकि सरकारी बसें चलने से ही लोगों को फायदा है। सरकार की आमदनी बढ़ेगी। जबकि निजी बस चालक तो अपनी मनमर्जी करते हैं। जब तक बस सवारियों से फुल नहीं होती वे तब तक नहीं चलते।
मांग न मानी जाने तक जारी रहेगी हड़ताल
हरियाणा रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रदेश स्तर के नेता हरिनारायण शर्मा का कहना है कि निजी परमिटों के विरोध में हड़ताल है। सरकार से बातचीत की जा रही है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
यह हड़ताल पूरे प्रदेश में हैं। निजी बसों को परमिट देना या नहीं देना सरकार के स्तर पर ही तय होता है। इसी को लेकर सरकार व रोडवेज नेताओं के बीच बातचीत चल रही है। एक दिन में यमुनानगर डिपो को 14 लाख रुपये की कमाई होती है। डेढ़ दिन की हड़ताल से करीब 20 लाख रुपये का नुकसान है।
-रविंद्र पाठक, रोडवेज जीएम, यमुनानगर।