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Yamuna nagar : संकट में प्लाईवुड उद्योग, बढ़ती लागत से 400 फैक्टरियों की कमर टूटने की नौबत
Mon, 06 Mar 2023 06:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राजेश कुमार, यमुनानगर
राजेश कुमार, यमुनानगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 06 Mar 2023 06:10 AM IST
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प्लाईवुड...
- फोटो : अमर उजाला
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केरल के बाद नेपाल से आने वाली प्लाई ने यमुनानगर में चल रही उत्तर भारत की प्लाईवुड उद्योग की कमर तोड़ दी है। केरल और नेपाल की प्लाई की तुलना में दाम अधिक होने कारण यहां की प्लाईवुड की मांग गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व कर्नाटक के साथ दक्षिण भारत के कई राज्यों में घटने लगी है। हालांकि, गुणवत्ता में यमुनानगर की प्लाईवुड ज्यादा बेहतर है।
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हरियाणा की प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग की 400 से अधिक फैक्टरियां इस समय संकट के दौर से गुजर रही हैं। इनमें 300 से अधिक यमुनानगर जिले में ही हैं। प्लाईवुड कारोबारियों के अनुसार, दूसरे राज्यों के लिए होने वाली प्लाईवुड की आपूर्ति पिछले एक साल में सिर्फ एक तिहाई रह गई है। बिक्री घटने से उत्पादन कम करने को मजबूर हुए उद्यमी अब कामगारों की संख्या घटाने पर विचार कर रहे हैं।
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उनका कहना है कि करीब एक साल से नेपाल से बड़ी मात्रा में प्लाईवुड की आपूर्ति भारत में की जा रही है। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा नेपाल से लगने के कारण इन दोनों राज्यों में यहां की प्लाईवुड काफी आ रही है। वहीं, केरल में बन रही प्लाईवुड महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और गुजरात में जा रही है।
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अधिक मालभाड़ा भी समस्या
यमुनानगर से अगर 18 एमएम का प्लाईबोर्ड महाराष्ट्र या गुजरात भेजा जाता है तो वह जीएसटी और मालभाड़ा मिलाकर 57-58 रुपये प्रति वर्ग फुट का पड़ता है। वहीं, केरल से यही बोर्ड 47 से 48 रुपये में उपलब्ध होता है, जबकि नेपाल से आने वाली प्लाईवुड का खर्च तो इससे भी कम आता है। इन राज्यों को यमुनानगर से प्लाईवुड मंगवाने पर 6 रुपये प्रति वर्ग फुट मालभाड़ा देना पड़ता है, जबकि केरल से यह मात्र 2 रुपये प्रति वर्ग फुट पड़ता है। केरल से समुद्र के रास्ते गुजरात के कांडला बंदरगाह पर प्लाईवुड लाने पर खर्च हरियाणा से सड़क मार्ग से ले जाने की तुलना में काफी कम है।
बढ़ी लागत ने घटाई मांग, निर्यात सिर्फ एक तिहाई
प्लाईवुड उद्यमी अंकुर जैन ने बताया कि लकड़ी की जो ट्रॉली पहले 80 से 90 हजार रुपये की मिलती थी, अब वह करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये की पड़ती है। प्लाईवुड कारोबारी विमल मलिक ने बताया कि प्रदेश में प्लाईवुड का सालाना टर्नओवर करीब 2,000 करोड़ रुपये का है। प्रदेश की 70 फीसदी प्लाईवुड फैक्टरियां यमुनानगर में हैं। करीब 1,400 करोड़ का टर्नओवर यमुनानगर से है। लेकिन, जब से नेपाल और केरल की प्लाईवुड की मांग बढ़ी है, तब से जिले का निर्यात केवल एक तिहाई रह गया है।
पापुलर और सफेदे की लकड़ी को अपने अधीन ले सरकार
पापुलर की लकड़ी 450 से बढ़कर 1,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। सफेदा लकड़ी भी महंगी हो गई है। उद्यमियों की मांग है कि सरकार लकड़ी को अपने अधीन लेकर इसकी दर तय करे।
40 फीसदी रह गया है उत्पादन
एक साल से नेपाल से प्लाईवुड आयात हो रहा है। इससे कारोबार को काफी नुकसान पहुंचा है। प्लाईवुड मांग घटने से उत्पादन 40 फीसदी रह गया है। अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में बड़ा संकट पैदा हो जाएगा।
-जेके बिहानी, जिलाध्यक्ष, हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन