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सौ-सौ के छह नोट देकर दो हजार ले जाओ....
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:36 PM IST
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नोट बंदी के चलते पेंशन धारकों की मुसीबतें कम नहीं हो रही है। दो हजार के नए नोट तो बैंक में पर्याप्त संख्या में पहुंच रहे हैं, लेकिन सौ-सौ के नोटों की शार्टेज बैंक कर्मचारियों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। सूरते हाल यह है कि बैंक कर्मचारी पेंशन धारकों को 1400 रुपये की पेमेंट देने के लिए छह सौ रुपये खुल्ले मंगवा रहे हैं। अधिकतर पेंशन धारकों के पास खुल्ले नोट न होने के कारण वे पेंशन से वंचित हो रहे हैं।
पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद अब बैंकों में दो हजार रुपये के नए नोट पहुंचने लगे हैं, जबकि पांच सौ रुपये के नए नोट बहुत कम संख्या में ही आए हैं। बैंको में भी सौ-सौ रुपये के नोट काफी कम आ रहे हैं। उधर, मार्किट में भी सौ-सौ रुपये के नोटों की किल्लत बनी हुई है। इन दिनों बैंकों में सामाजिक पेंशन बांटी जा रही है।
बैंकों में पेंशन धारकों को देने के लिए दो हजार रुपये के नोट है, जबकि पेंशन 1400 रुपये है। बैंक कर्मचारियों के सामने दिक्कत ये है कि उनके पास पेेंशन धारकों को देने के लिए चार सौ रुपये कम पड़ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बैंक कर्मचारियों ने पेंशन धारकों से छह सौ रुपये खुल्ले मांगने शुरू कर दिए है। सोमवार को कैंप स्थित सिंडिकेट बैंक में पेंशन लेने आए पेंशन धारकों को बैंक कर्मचारियों ने पेंशन लेने के लिए छह सौ रुपये खुल्ले लाने को कहा। बैंक की ओर से बाकायदा इसकी सूचना बैंक में चस्पा कर दी गई। बैंक मेें बड़ी संख्या में पेंशन धारक पेंशन लेने पहुंचे। इक्का-दुक्का पेंशन धारकों के पास सौ-सौ के खुल्ले नोट थे। जबकि अधिकतर खाली जेंब ही थे। पेंशन धारकों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वे सौ-सौ के नोट कहां से लेकर आए।
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पुरानी हमीदा के मांगेराम ने कहा कि उसका कमाई का कोई और जरिया नहीं है। महीने का खर्च पेंशन से ही चलता है। खुल्ले नोट कहां से लेकर आए, यह उसके लिए बड़ी समस्या है। वह काफी देर तक बैंक में ही रुका रहा ताकि बैंक कर्मचारी के पास खुल्ले नोट आ जाए तो वह अपनी पेंशन ले सके। खुल्ले नोट न होने के कारण वह पेंशन नहीं ले सका।
जम्मू कालोनी की वीना रानी भी अपना खर्चा चलाने के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर है। बैंक कर्मचारी ने उसे सौ-सौ के खुल्ले नोट लाने को कहा तो उसने आसपास खड़े लोगों से दो हजार रुपये के खुल्ले मांगे, लेकिन किसी के पास भी सौ-सौ के नोट नहीं निकलें। इस कारण वह भी अपनी पेंशन नहीं ले सकी।
कैंप निवासी कृष्णा विधवा पेंशन लेेने के लिए बैंक में आई थी। लाइन में लगने के बाद उसका नंबर आया तो बैंक कर्मचारी ने खुल्ले नोट मांगे। कृष्णा देवी के पास सौ-सौ के नोट न होने पर उसे भी पेंशन नहीं मिल पाई।
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पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने के बाद अब बैंकों में दो हजार रुपये के नए नोट पहुंचने लगे हैं, जबकि पांच सौ रुपये के नए नोट बहुत कम संख्या में ही आए हैं। बैंको में भी सौ-सौ रुपये के नोट काफी कम आ रहे हैं। उधर, मार्किट में भी सौ-सौ रुपये के नोटों की किल्लत बनी हुई है। इन दिनों बैंकों में सामाजिक पेंशन बांटी जा रही है।
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बैंकों में पेंशन धारकों को देने के लिए दो हजार रुपये के नोट है, जबकि पेंशन 1400 रुपये है। बैंक कर्मचारियों के सामने दिक्कत ये है कि उनके पास पेेंशन धारकों को देने के लिए चार सौ रुपये कम पड़ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बैंक कर्मचारियों ने पेंशन धारकों से छह सौ रुपये खुल्ले मांगने शुरू कर दिए है। सोमवार को कैंप स्थित सिंडिकेट बैंक में पेंशन लेने आए पेंशन धारकों को बैंक कर्मचारियों ने पेंशन लेने के लिए छह सौ रुपये खुल्ले लाने को कहा। बैंक की ओर से बाकायदा इसकी सूचना बैंक में चस्पा कर दी गई। बैंक मेें बड़ी संख्या में पेंशन धारक पेंशन लेने पहुंचे। इक्का-दुक्का पेंशन धारकों के पास सौ-सौ के खुल्ले नोट थे। जबकि अधिकतर खाली जेंब ही थे। पेंशन धारकों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वे सौ-सौ के नोट कहां से लेकर आए।
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पुरानी हमीदा के मांगेराम ने कहा कि उसका कमाई का कोई और जरिया नहीं है। महीने का खर्च पेंशन से ही चलता है। खुल्ले नोट कहां से लेकर आए, यह उसके लिए बड़ी समस्या है। वह काफी देर तक बैंक में ही रुका रहा ताकि बैंक कर्मचारी के पास खुल्ले नोट आ जाए तो वह अपनी पेंशन ले सके। खुल्ले नोट न होने के कारण वह पेंशन नहीं ले सका।
जम्मू कालोनी की वीना रानी भी अपना खर्चा चलाने के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर है। बैंक कर्मचारी ने उसे सौ-सौ के खुल्ले नोट लाने को कहा तो उसने आसपास खड़े लोगों से दो हजार रुपये के खुल्ले मांगे, लेकिन किसी के पास भी सौ-सौ के नोट नहीं निकलें। इस कारण वह भी अपनी पेंशन नहीं ले सकी।
कैंप निवासी कृष्णा विधवा पेंशन लेेने के लिए बैंक में आई थी। लाइन में लगने के बाद उसका नंबर आया तो बैंक कर्मचारी ने खुल्ले नोट मांगे। कृष्णा देवी के पास सौ-सौ के नोट न होने पर उसे भी पेंशन नहीं मिल पाई।