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निर्दोष जानवरों को हलाल करना कोई धर्म नहीं : तरुण सागर
amar ujala beuro yamunanagar
Updated Tue, 13 Dec 2016 12:22 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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क्रांतिकारी राष्ट्रीय जैन संत तरुण सागर जी महाराज ने पेपर मिल ग्राउंड में चल रहे प्रवचन श्रंखला के अंतिम दिन धूम-धाम से समापन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में विधायक घनश्याम दास अरोड़ा तथा विशिष्ठ अतिथि के रूप में एमडी ईशान प्लाईवुड सुरेंद्र गर्ग व पंजाब प्लाईवुड के एमडी नरेश गर्ग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान आनंद जैन ने की और संचालन ब्रह्मचारी सतीश जैन ने किया। सबसे पहले अतिथियों ने श्री फल चढ़ा कर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रवचन से पूर्व आनंद जैन व संजू जैन ने पाद प्रक्षलन किया, गिरिराज जैन व स्नेहलता जैन ने पूजा की, रमन जैन व शालू जैन ने शास्त्र भेंट किया व प्रमोद जैन व बाला जैन ने आरती की। बच्चों द्वारा सुंदर सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। महाराज तरुण सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक बार जब घड़े से पूछा गया कि वह ठंडा क्यों होता है तो उसने जवाब दिया कि जिसका अतीत भी मिट्टी का है और भविष्य भी मिट्टी का हो उसे गर्मी कहां से आ सकती है। जिसकी जॉकेट में गर्मी हो, पॉकेट में गर्मी हो या लॉकेट में गर्मी हो उसे चैन नहीं आएगा।
सोने की चेन पहनने वाला नहीं चेन से सोने वाला ज्यादा सुखी है। आदमी चाहे सोने की चैन पहनता हो फिर भी वह बेचैन रहता है। मनुष्य को तर्क नहीं करना चाहिए क्योंकि तर्क से ही तकरार पैदा होती है। मनुष्य को सदैव सर्पण भाव रखना चाहिए, क्योंकि सौहार्द बढ़ता है। सपर्ण समाधान देता है। जो सुख झुकने में है वह अकड़ में नहीं है। दीवार या किसी भी आदमी से टकराने की जरुरत नहीं, क्योंकि बीसों लोग आपसे टकराने की कोशिश करते है। उन्होंने आगे कहा कि गली संकरी थी, राजा उससे निकल रहा था तो आगे से एक सांड दौड़ता हुआ आ रहा था, तो क्या राजा उससे टकराएगा। अगर राजा को बचना होगा तो राजा को ही झुकना पड़ेगा। अर्थात दिन भर में हमें कई सांड मिलते है पर हमें उनसे टकराना नहीं है, क्योंकि तकराट ही बिखराव का कारण है। हमें एक नियम बनाना चाहिए, प्रतिदिन एक घंटे का मौन रखना चाहिए, भजन के लिए भोजन भूलना संयम है और भोजन के लिए भजन को भूल जाना पाप है। शाकाहारी बने, शाकाहार केवल आहार नहीं सेहत भी है। जीभ जो मांगे वह न दे लेकिन पेट जो मांगे वह दे, यही संयम की पहचान है।
अपनी भूख के लिए किसी भी बकरा, मुर्गी या जीव को हलाल न करें। किसी भी निर्दोष जानवरों को हलाल करना कोई धर्म नहीं है। मुनि सागर महाराज ने आह्वान करते हुए कहा कि अपने दो खोट शराब और मीट आज तरुण की झोली में डाल दें, और सुख-चैन की जिंदगी जिये। पैसा सुविधा है, सुख नहीं। गरीब आदमी भी संतो की शरण में आकर सुखी हो सकता है। धर्म करना सेवा का अवसर है लेकिन कल जब बुढ़ापा आएगा वह निमंत्रण है। इस अवसर पर सुभाष जैन, एसपी जैन, राजेंद्र जैन, चक्रेश जैन, गौरव जैन, सुशील जैन, प्रमोद जैन, मुकेश जैन, नितिन जैन, आनंद प्रकाश जैन, रमन जैन, पंड़ित शीलचंद जैन, मनीष जैन, पुनित जैन, सुनिल जैन, प्रकाश जैन, पवन जैन, कमल जैन, अरविंद जैन, राजेश जैन, राजीव जैन, अंकुर जैन, नितिन जैन, विजेंद्र आदि ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में जैन समाज व शहर के गणमान्य व्यक्ति, महिलायें तथा बच्चे उपस्थित रहे।
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सोने की चेन पहनने वाला नहीं चेन से सोने वाला ज्यादा सुखी है। आदमी चाहे सोने की चैन पहनता हो फिर भी वह बेचैन रहता है। मनुष्य को तर्क नहीं करना चाहिए क्योंकि तर्क से ही तकरार पैदा होती है। मनुष्य को सदैव सर्पण भाव रखना चाहिए, क्योंकि सौहार्द बढ़ता है। सपर्ण समाधान देता है। जो सुख झुकने में है वह अकड़ में नहीं है। दीवार या किसी भी आदमी से टकराने की जरुरत नहीं, क्योंकि बीसों लोग आपसे टकराने की कोशिश करते है। उन्होंने आगे कहा कि गली संकरी थी, राजा उससे निकल रहा था तो आगे से एक सांड दौड़ता हुआ आ रहा था, तो क्या राजा उससे टकराएगा। अगर राजा को बचना होगा तो राजा को ही झुकना पड़ेगा। अर्थात दिन भर में हमें कई सांड मिलते है पर हमें उनसे टकराना नहीं है, क्योंकि तकराट ही बिखराव का कारण है। हमें एक नियम बनाना चाहिए, प्रतिदिन एक घंटे का मौन रखना चाहिए, भजन के लिए भोजन भूलना संयम है और भोजन के लिए भजन को भूल जाना पाप है। शाकाहारी बने, शाकाहार केवल आहार नहीं सेहत भी है। जीभ जो मांगे वह न दे लेकिन पेट जो मांगे वह दे, यही संयम की पहचान है।
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अपनी भूख के लिए किसी भी बकरा, मुर्गी या जीव को हलाल न करें। किसी भी निर्दोष जानवरों को हलाल करना कोई धर्म नहीं है। मुनि सागर महाराज ने आह्वान करते हुए कहा कि अपने दो खोट शराब और मीट आज तरुण की झोली में डाल दें, और सुख-चैन की जिंदगी जिये। पैसा सुविधा है, सुख नहीं। गरीब आदमी भी संतो की शरण में आकर सुखी हो सकता है। धर्म करना सेवा का अवसर है लेकिन कल जब बुढ़ापा आएगा वह निमंत्रण है। इस अवसर पर सुभाष जैन, एसपी जैन, राजेंद्र जैन, चक्रेश जैन, गौरव जैन, सुशील जैन, प्रमोद जैन, मुकेश जैन, नितिन जैन, आनंद प्रकाश जैन, रमन जैन, पंड़ित शीलचंद जैन, मनीष जैन, पुनित जैन, सुनिल जैन, प्रकाश जैन, पवन जैन, कमल जैन, अरविंद जैन, राजेश जैन, राजीव जैन, अंकुर जैन, नितिन जैन, विजेंद्र आदि ने सहयोग दिया। कार्यक्रम में जैन समाज व शहर के गणमान्य व्यक्ति, महिलायें तथा बच्चे उपस्थित रहे।
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