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Yamuna Nagar News: महिषासुरमर्दिनी की उपासना कर मांगी शक्ति
Mon, 29 Sep 2025 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 29 Sep 2025 01:17 AM IST
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आईटीआई स्थित देवा मंदिर में संकीर्तन के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। नवरात्र पष्टमी तिथि को भक्तों ने मां के महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की पूजा की। मां दुर्गा के इस स्वरूप कात्यायनी के रूप में जाना है। अश्विनी माह की षष्टमी पर रविवार को मां कात्यायनी की पूजा के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। छुट्टी का दिन होने के चलते अन्य दिनों की अपेक्षा मंदिरों में ज्यादा भीड़ रही।
शहर सहित जिले के तमाम मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा है। भक्तों के लिए तड़के चार बजे ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे। भोर में ही भक्तों ने आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा की। मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ से नगरी जय माता दी के घोष से गूंज उठी। वहीं, नवरात्र की सप्तमी पर आदिशक्ति के रौद्र रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
रविवार सुबह से ही जिले के सभी मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली। पौराणिक व ऐतिहासिक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर में सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के ऐतिहासिक देवी भवन और यमुनानगर जगाधरी स्टेशन स्थित श्रीमूर्तिदेवी मंदिर में देखने को मिल रही है। नवरात्र के चलते सभी मंदिरों में प्रात: व संध्याकालीन विशेष पूजन व आरती की जा रही है।
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सुबह-शाम आरती के समय मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ हो रही है। रविवार को छुट्टी का दिन होने के चलते अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रही। मंदिरों के अलावा लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन व विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। वहीं, सोमवार को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।
ऐसे करें कालरात्रि की पूजा
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। प्रात: उठकर स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर गंगाजल छिड़कर शुद्धि करें आसन बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। कलश पूजन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद मां कालरात्रि को जल, फूल, अक्षत, धूप, दीप, गंध, फल, कुमकुम, सिंदूर इत्यादि अर्पित करें। मां को लाल पुष्प अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए लाल पुष्प अर्पित करें। गुड़हल का पुष्प अर्पित करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इसके बाद मां का ध्यान कर मंत्र उच्चारण करें। दुर्गा चालीसा, मां कालरात्रि की कथा का पाठ करें। आरती से पूजन का समापन करें। मां को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। पूजन के बाद मां से भूल व गलतियों की क्षमा याचना करें।
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जगाधरी। नवरात्र पष्टमी तिथि को भक्तों ने मां के महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की पूजा की। मां दुर्गा के इस स्वरूप कात्यायनी के रूप में जाना है। अश्विनी माह की षष्टमी पर रविवार को मां कात्यायनी की पूजा के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। छुट्टी का दिन होने के चलते अन्य दिनों की अपेक्षा मंदिरों में ज्यादा भीड़ रही।
शहर सहित जिले के तमाम मंदिरों में सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहा है। भक्तों के लिए तड़के चार बजे ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे। भोर में ही भक्तों ने आदिशक्ति मां दुर्गा की पूजा की। मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ से नगरी जय माता दी के घोष से गूंज उठी। वहीं, नवरात्र की सप्तमी पर आदिशक्ति के रौद्र रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।
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रविवार सुबह से ही जिले के सभी मंदिरों में भारी भीड़ देखने को मिली। पौराणिक व ऐतिहासिक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। शहर में सबसे ज्यादा भीड़ जगाधरी के ऐतिहासिक देवी भवन और यमुनानगर जगाधरी स्टेशन स्थित श्रीमूर्तिदेवी मंदिर में देखने को मिल रही है। नवरात्र के चलते सभी मंदिरों में प्रात: व संध्याकालीन विशेष पूजन व आरती की जा रही है।
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सुबह-शाम आरती के समय मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़ हो रही है। रविवार को छुट्टी का दिन होने के चलते अन्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रही। मंदिरों के अलावा लोगों ने घरों में भी मां की आराधना की। प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर भक्तों ने मां कात्यायनी की पूजा की। मां कात्यायनी की पूजा से वैवाहिक जीवन व विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। वहीं, सोमवार को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।
ऐसे करें कालरात्रि की पूजा
पंडित रमन वत्स ने बताया कि नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां के सातवें रूप मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। प्रात: उठकर स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चौकी पर गंगाजल छिड़कर शुद्धि करें आसन बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। कलश पूजन करने के बाद दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद मां कालरात्रि को जल, फूल, अक्षत, धूप, दीप, गंध, फल, कुमकुम, सिंदूर इत्यादि अर्पित करें। मां को लाल पुष्प अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए लाल पुष्प अर्पित करें। गुड़हल का पुष्प अर्पित करने से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इसके बाद मां का ध्यान कर मंत्र उच्चारण करें। दुर्गा चालीसा, मां कालरात्रि की कथा का पाठ करें। आरती से पूजन का समापन करें। मां को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थों का भोग लगाना चाहिए। पूजन के बाद मां से भूल व गलतियों की क्षमा याचना करें।