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पुरुषोत्तम मास में करें प्रभु की आराधना : श्यामानंद
Fri, 22 May 2026 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 22 May 2026 12:34 AM IST
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श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। कस्बे के खेड़ा मंदिर लंगर हाल में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी श्यामानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास अत्यंत पुण्यदायी होता है। इस पावन माह में प्रत्येक व्यक्ति को भजन-कीर्तन, प्रभु स्मरण और अपने इष्ट देव की आराधना में समय लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। मनुष्य को अपनी वाणी और मन पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा किसी के प्रति कटु वचन नहीं बोलने चाहिए। शब्दों का प्रभाव बहुत गहरा होता है और अच्छे शब्द समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाते हैं।
उन्होंने श्रद्धालुओं को अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों से बचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि हर कर्म का फल अवश्य मिलता है। सभी लोगों के प्रति समदृष्टि रखनी चाहिए तथा किसी को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए। समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी सम्मान की भावना ही सच्चे धर्म का आधार है।
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कथा व्यास ने कहा कि जिस प्रकार कपड़ों के दाग धोने से साफ होते हैं, उसी प्रकार आत्मा के दोष और विकार प्रभु सिमरन, भक्ति और आत्मचिंतन से दूर होते हैं। कथा के दौरान पूरा वातावरण भजन-कीर्तन और प्रभु भक्ति से भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद में सराबोर दिखाई दिए। इस दौरान सरपंच कीर्ति खुराना, अनुकृति खुराना, पंकुश खुराना, संदीप कुमार बंटी, अशोक धीमान, डॉ. सुभाष, जगदीश अरोड़ा आदि माैजूद रहे।
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व्यासपुर। कस्बे के खेड़ा मंदिर लंगर हाल में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी श्यामानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास अत्यंत पुण्यदायी होता है। इस पावन माह में प्रत्येक व्यक्ति को भजन-कीर्तन, प्रभु स्मरण और अपने इष्ट देव की आराधना में समय लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। मनुष्य को अपनी वाणी और मन पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा किसी के प्रति कटु वचन नहीं बोलने चाहिए। शब्दों का प्रभाव बहुत गहरा होता है और अच्छे शब्द समाज में प्रेम व सद्भाव बढ़ाते हैं।
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उन्होंने श्रद्धालुओं को अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों से बचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि हर कर्म का फल अवश्य मिलता है। सभी लोगों के प्रति समदृष्टि रखनी चाहिए तथा किसी को छोटा या तुच्छ नहीं समझना चाहिए। समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी सम्मान की भावना ही सच्चे धर्म का आधार है।
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कथा व्यास ने कहा कि जिस प्रकार कपड़ों के दाग धोने से साफ होते हैं, उसी प्रकार आत्मा के दोष और विकार प्रभु सिमरन, भक्ति और आत्मचिंतन से दूर होते हैं। कथा के दौरान पूरा वातावरण भजन-कीर्तन और प्रभु भक्ति से भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु कथा श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद में सराबोर दिखाई दिए। इस दौरान सरपंच कीर्ति खुराना, अनुकृति खुराना, पंकुश खुराना, संदीप कुमार बंटी, अशोक धीमान, डॉ. सुभाष, जगदीश अरोड़ा आदि माैजूद रहे।