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विश्व आत्महत्या निवारण दिवस: डिप्रेशन के चलते आत्महत्या कर रहे हैं लोग।
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जिला अस्पताल के प्रांगण में विश्व आत्महत्या निवारण दिवस का आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डा. विजय दहिया ने बताया कि सभी को अपने कार्यस्थल अन्य स्थान पर कर्मचारियों व परिजनों के साथ सहानुभूतिपूर्वक बात सुननी व उनका जवाब ध्यानपूर्वक देना चाहिए। कोरोना महामारी के दौरान कुछ व्यक्ति मानसिक परेशानी महसूस कर रहे हैं और कई बार व्यक्ति या उसके अभिभावक इतने हताश व तनाव में आ जाते हैं कि आत्महत्या जैसा गंभीर कदम भी उठा सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों को उचित परामर्श की अति आवश्यकता होती है। इच्छाएं पूरी न होने पर अधिकतर नौजवान आजकल विभिन्न प्रकार के नशे करने में संलिप्त हैं। जिसके कारण तनाव में रहना, मित्रों व परिजनों से दूरी बनाना, आक्रामकता, अनियंत्रित क्रोध व बदला लेने की भावना और आत्महत्या करने के प्रयास व लगातार खतरनाक विचार आना मृत्यु के बारे में बात करना तथा निराश रहना आदि बुरी आदतों में फंस जाते हैं। इस समय पर हम सबको सहानुभूति भरा व्यवहार करना चाहिए। इस अवसर पर स्वास्थय विभाग के उप सिविल सर्जन डा. बुलबुल, डा. अनूप, डा. राजेश, डा. विजय आदि मौजूद रहे।
अपने संबंधियों को बताएं सभी बातें
मानसिक रोग विशेषज्ञ व उप सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के बारे में अधिक बात करते हुए पाया जाता है, निराश रहता हो, लगातार नकारात्मक विचार रखता हो और मादक पदार्थों का उपयोग अधिक मात्रा में कर रहा हो, अधिक गुस्सा करता हो, ऐसे व्यक्ति को तो इन सब बातों को अपने तक सीमित न रखकर अपने निकट सगे संबंधियों को बता देना चाहिए। मनोरोग चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए ताकि समय रहते इस प्रकार के मानसिक रोगों पर नियंत्रण पाया जा सके।
सबको मिलकर नियंत्रण पाना है
पैनल एडवोकेट वीपीएस सिद्धू ने बताया कि समाज में बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, प्रतिद्वंदिता, वैवाहिक जीवन में परेशानियां, लव मैरिज दहेज प्रथा अनपढ़ता व अज्ञानता एवं सामाजिक मतभेद आदि के कारण आत्महत्या करने कि प्रवृति लगातार बढ़ती जारी है। जिस पर हम सबको मिलकर नियंत्रण पाना है।
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अपने संबंधियों को बताएं सभी बातें
मानसिक रोग विशेषज्ञ व उप सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के बारे में अधिक बात करते हुए पाया जाता है, निराश रहता हो, लगातार नकारात्मक विचार रखता हो और मादक पदार्थों का उपयोग अधिक मात्रा में कर रहा हो, अधिक गुस्सा करता हो, ऐसे व्यक्ति को तो इन सब बातों को अपने तक सीमित न रखकर अपने निकट सगे संबंधियों को बता देना चाहिए। मनोरोग चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए ताकि समय रहते इस प्रकार के मानसिक रोगों पर नियंत्रण पाया जा सके।
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सबको मिलकर नियंत्रण पाना है
पैनल एडवोकेट वीपीएस सिद्धू ने बताया कि समाज में बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, प्रतिद्वंदिता, वैवाहिक जीवन में परेशानियां, लव मैरिज दहेज प्रथा अनपढ़ता व अज्ञानता एवं सामाजिक मतभेद आदि के कारण आत्महत्या करने कि प्रवृति लगातार बढ़ती जारी है। जिस पर हम सबको मिलकर नियंत्रण पाना है।
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