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Yamuna Nagar News: महिलाओं ने सिर पर कलश रख निकाली यात्रा
Sun, 10 Nov 2024 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 10 Nov 2024 01:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। इंद्रा मार्केट स्थित ग्राउंड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम के द्वारा सात दिवसीय राम कथा का आयोजन 11 से 17 नवंबर होगा। कथा के उपलक्ष्य में शनिवार को महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली।
आश्रम के अनुसार कथा का समय प्रतिदिन शाम छह बजे से रात्रि नौ बजे तक रहेगा। गुरुदेव आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याएं राम कथा के लिए मंचासीन रहेंगे, जिनमें साध्वी श्रेया भारती कथा व्यास के रूप में उपस्थित रहेंगी। राम कथा के उपलक्ष्य में आज भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें बहुत बड़ी संख्या में भक्त जनों एवं श्रद्धालुओं ने योगदान दिया।
कथा अनुष्ठान से पहले कलश उठाने की प्रथा भारतीय संस्कृति में पुरातन है। कलश सुख, समृद्धि , वैभव, ऐश्वर्य एवं शांति का प्रतीक है और कलश ब्रह्म ज्ञान रूपी अमृत का भी द्योतक है जिसे धारण करने से ही आत्मा रूपी स्त्री सदा के लिए सौभाग्यशाली हो जाती है। सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने सिर पर कलश उठाकर संपूर्ण नगर निवासियों को कथा का निमंत्रण देते हुए कथा पंडाल तक पहुंच कर वहां अपना कलश स्थापित करती हैं।
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जगाधरी। इंद्रा मार्केट स्थित ग्राउंड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम के द्वारा सात दिवसीय राम कथा का आयोजन 11 से 17 नवंबर होगा। कथा के उपलक्ष्य में शनिवार को महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली।
आश्रम के अनुसार कथा का समय प्रतिदिन शाम छह बजे से रात्रि नौ बजे तक रहेगा। गुरुदेव आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याएं राम कथा के लिए मंचासीन रहेंगे, जिनमें साध्वी श्रेया भारती कथा व्यास के रूप में उपस्थित रहेंगी। राम कथा के उपलक्ष्य में आज भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें बहुत बड़ी संख्या में भक्त जनों एवं श्रद्धालुओं ने योगदान दिया।
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कथा अनुष्ठान से पहले कलश उठाने की प्रथा भारतीय संस्कृति में पुरातन है। कलश सुख, समृद्धि , वैभव, ऐश्वर्य एवं शांति का प्रतीक है और कलश ब्रह्म ज्ञान रूपी अमृत का भी द्योतक है जिसे धारण करने से ही आत्मा रूपी स्त्री सदा के लिए सौभाग्यशाली हो जाती है। सौभाग्यशाली स्त्रियां अपने सिर पर कलश उठाकर संपूर्ण नगर निवासियों को कथा का निमंत्रण देते हुए कथा पंडाल तक पहुंच कर वहां अपना कलश स्थापित करती हैं।
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