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Yamuna Nagar News: 25 दिन में पांच फीसदी काम, 54 दिन में कैसे पूरा होगा
Fri, 08 May 2026 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 08 May 2026 02:01 AM IST
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पोबारी में बाढ़ राहत कार्यों में मिक्स किए जा रहे छोटे पत्थर। संवाद
- फोटो : samvad
राजेश कुमार
यमुनानगर। जिले में मानसून से पहले किए जाने वाले बाढ़ बचाव कार्य इस बार भी सुस्ती का शिकार दिखाई दे रहे हैं। सिंचाई विभाग को 30 जून तक सभी कार्य पूरे करने हैं। 20 से 25 दिन पहले जो कार्य शुरू हुए हैं, उनकी प्रगति भी केवल औसतन पांच प्रतिशत तक ही पहुंची है।
वहीं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और किसानों ने छोटे पत्थर व मिट्टी मिलाने का आरोप लगाया है। जिले में इस बार करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से 28 बाढ़ बचाव कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें यमुना, सोम और अन्य बरसाती नदियों के किनारे कटाव रोकने, स्टड निर्माण और सुरक्षा तटबंध मजबूत करने जैसे कार्य शामिल हैं। हर साल मानसून के दौरान यमुना और अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से गांवों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इन कार्यों को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी माना जाता है।
रादौर खंड के पोबारी गांव में पहली बार सिंचाई विभाग की ओर से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। यह गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है और हर साल बाढ़ के दौरान यहां भारी कटाव और जलभराव की स्थिति बनती है। हालांकि यहां भी कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि स्टड निर्माण में नियमानुसार 18 किलोग्राम वजन वाले पत्थरों का उपयोग होना चाहिए।
उनका कहना है कि मौके पर दो से चार किलोग्राम तक के छोटे पत्थर लगाए जा रहे हैं। छोटे पत्थर तेज बहाव के दौरान टिक नहीं पाएंगे और पहली ही बाढ़ में बह सकते हैं। इससे करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। पोबारी सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों में इसको लेकर रोष बना हुआ है। संवाद
बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील यमुनानगर
बाढ़ के लिहाज से यमुनानगर जिला अतिसंवेदनशील है। हर वर्ष बाढ़ का पानी खेतों के साथ-साथ यमुना से सटे गांवों तक पहुंच जाता है। भूमि कटाव के कारण कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है। साढौरा, जगाधरी, यमुनानगर और रादौर चारों विधानसभा क्षेत्रों के गांव इससे प्रभावित होते हैं। उन्हेड़ी निवासी रामबीर सिंह चौहान और संधाला निवासी शिव कुमार का आरोप है कि अधिकतर कार्य मानसून से ठीक पहले शुरू किए जाते हैं, जिससे वे समय पर पूरे नहीं हो पाते और ग्रामीणों को हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। व्यासपुर क्षेत्र के किसान सोहनलाल, सुल्तान सिंह, कर्म सिंह और जसमेर सिंह का कहना है कि बाढ़ राहत कार्यों में उपयोग किए जा रहे पत्थरों के ढेर में मिट्टी मिलाई जा रही है।
बाढ़ राहत कार्य शुरू करवा दिए गए हैं। जिन्हें 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जहां पर छोटे पत्थर लग रहे हैं दरअसल में वह मशीन से भरे जाते हैं। जिन्हें छंटाई कर साइट पर अलग-अलग किया जाता है। समय रहते सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। -राहिल सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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यमुनानगर। जिले में मानसून से पहले किए जाने वाले बाढ़ बचाव कार्य इस बार भी सुस्ती का शिकार दिखाई दे रहे हैं। सिंचाई विभाग को 30 जून तक सभी कार्य पूरे करने हैं। 20 से 25 दिन पहले जो कार्य शुरू हुए हैं, उनकी प्रगति भी केवल औसतन पांच प्रतिशत तक ही पहुंची है।
वहीं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और किसानों ने छोटे पत्थर व मिट्टी मिलाने का आरोप लगाया है। जिले में इस बार करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से 28 बाढ़ बचाव कार्य प्रस्तावित हैं। इनमें यमुना, सोम और अन्य बरसाती नदियों के किनारे कटाव रोकने, स्टड निर्माण और सुरक्षा तटबंध मजबूत करने जैसे कार्य शामिल हैं। हर साल मानसून के दौरान यमुना और अन्य नदियों में जलस्तर बढ़ने से गांवों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचता है। ऐसे में इन कार्यों को समय पर पूरा करना बेहद जरूरी माना जाता है।
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रादौर खंड के पोबारी गांव में पहली बार सिंचाई विभाग की ओर से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। यह गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है और हर साल बाढ़ के दौरान यहां भारी कटाव और जलभराव की स्थिति बनती है। हालांकि यहां भी कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं।
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ग्रामीणों का आरोप है कि स्टड निर्माण में नियमानुसार 18 किलोग्राम वजन वाले पत्थरों का उपयोग होना चाहिए।
उनका कहना है कि मौके पर दो से चार किलोग्राम तक के छोटे पत्थर लगाए जा रहे हैं। छोटे पत्थर तेज बहाव के दौरान टिक नहीं पाएंगे और पहली ही बाढ़ में बह सकते हैं। इससे करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित सुरक्षा नहीं मिल पाएगी। पोबारी सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों में इसको लेकर रोष बना हुआ है। संवाद
बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील यमुनानगर
बाढ़ के लिहाज से यमुनानगर जिला अतिसंवेदनशील है। हर वर्ष बाढ़ का पानी खेतों के साथ-साथ यमुना से सटे गांवों तक पहुंच जाता है। भूमि कटाव के कारण कई किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है। साढौरा, जगाधरी, यमुनानगर और रादौर चारों विधानसभा क्षेत्रों के गांव इससे प्रभावित होते हैं। उन्हेड़ी निवासी रामबीर सिंह चौहान और संधाला निवासी शिव कुमार का आरोप है कि अधिकतर कार्य मानसून से ठीक पहले शुरू किए जाते हैं, जिससे वे समय पर पूरे नहीं हो पाते और ग्रामीणों को हर साल नुकसान झेलना पड़ता है। व्यासपुर क्षेत्र के किसान सोहनलाल, सुल्तान सिंह, कर्म सिंह और जसमेर सिंह का कहना है कि बाढ़ राहत कार्यों में उपयोग किए जा रहे पत्थरों के ढेर में मिट्टी मिलाई जा रही है।
बाढ़ राहत कार्य शुरू करवा दिए गए हैं। जिन्हें 30 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। जहां पर छोटे पत्थर लग रहे हैं दरअसल में वह मशीन से भरे जाते हैं। जिन्हें छंटाई कर साइट पर अलग-अलग किया जाता है। समय रहते सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। -राहिल सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।