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पत्नी के हत्यारे पति को उम्रकैद
ब्यूरो/अमर उजाला, जगाधरी।
Updated Fri, 30 May 2014 11:13 PM IST
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पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद 45 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है।
कोर्ट में करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान 10 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत कोर्ट ने हत्यारे पति को दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया। जबकि सबूतों के अभाव में मृतका के देवर महावीर को बरी कर दिया गया।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 11 अक्टूबर 2012 को पुलिस को सूचना मिली थी कि पूनम पत्नी धर्मबीर गांव दसौरा को ससुराल वालोें ने मार दिया है। सूचना मिलने के बाद एएसआई सुरेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने घटना स्थल पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया।
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पुलिस को दसौरा गांव में मृतका का भाई संजय मिला। जो कि हैदरपुर थाना सरसावा का रहने वाला है। पुलिस को दी शिकायत में संजय ने कहा कि करीब 11 साल पहले उन्होंने पूनम की शादी गांव दसौरा निवासी धर्मबीर से की थी। शादी के समय हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था।
करीब तीन साल पहले पूनम के ससुर भोपाल सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद पूनम के पति धर्मबीर तथा देवर महाबीर ने अपनी मां के बहकावे में आकर उसकी बहन के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी थी। इसके बारे में पूनम ने उन्हें बताया था।
बहन से मारपीट की घटना के बाद दोनों पक्षों के रिश्तेदार दसौरा गांव में एकत्रित हुए और पूनम व उसके पति को अलग करवा दिया, लेकिन कुछ दिनों के बाद धर्मबीर तथा पूनम फिर से उन्हीं के साथ रहना शुरू कर दिया।
10 अक्टूबर की रात को करीब तीन बजे उसे मामा के लड़के विनोद का फोन आया, जिसने बताया कि पूनम की तबीयत खराब है, इसलिए वह परिजनों के साथ तुरंत दसौरा चला जाए।
सूचना मिलने के बाद जब वह दसौरा पहुंचा, तो उसे अपनी बहन पूनम का शव बरामदे में जमीन पर पड़ा मिला। इसके देखकर उसके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई। जब उसने इस घटना के बारे में पूनम के पति धर्मबीर, देवर महावीर और सास संतोष से पूछा तो उन्होंने कहा कि पूनम को दौरा पड़ा था।
हार्ट अटैक की वजह से उसकी मौत हो गई है। लेकिन जब उसने पूनम के गले को ध्यान से देखा, तो उस पर लाल तथा नीला निशान पड़ा हुआ था। जिसे देखकर प्रतीत होता है कि उपरोक्त लोगों ने उसकी बहन का गला दबाकर हत्या की है। पुलिस ने संजय की शिकायत पर मृतका के पति धर्मबीर और देवर महावीर के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 201 तथा 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने 12 अक्टूबर 2012 को धर्मबीर तथा महावीर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। रिमांड के दौरान पूनम की हत्या में प्रयोग चुन्नी तथा अन्य सामान बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया।
जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सरकारी वकील बीडी सोनी ने बताया कि कोर्ट में करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान 10 लोगों की गवाही हुई। मृतका के देवर महावीर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
जबकि मृतका के पति धर्मबीर को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना तथा भादंसं की धारा 201 में सात साल कैद तथा 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
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कोर्ट में करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान 10 लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत कोर्ट ने हत्यारे पति को दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया। जबकि सबूतों के अभाव में मृतका के देवर महावीर को बरी कर दिया गया।
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पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 11 अक्टूबर 2012 को पुलिस को सूचना मिली थी कि पूनम पत्नी धर्मबीर गांव दसौरा को ससुराल वालोें ने मार दिया है। सूचना मिलने के बाद एएसआई सुरेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने घटना स्थल पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया।
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पुलिस को दसौरा गांव में मृतका का भाई संजय मिला। जो कि हैदरपुर थाना सरसावा का रहने वाला है। पुलिस को दी शिकायत में संजय ने कहा कि करीब 11 साल पहले उन्होंने पूनम की शादी गांव दसौरा निवासी धर्मबीर से की थी। शादी के समय हैसियत के मुताबिक दान दहेज दिया था।
करीब तीन साल पहले पूनम के ससुर भोपाल सिंह की मौत हो गई थी। इसके बाद पूनम के पति धर्मबीर तथा देवर महाबीर ने अपनी मां के बहकावे में आकर उसकी बहन के साथ मारपीट करनी शुरू कर दी थी। इसके बारे में पूनम ने उन्हें बताया था।
बहन से मारपीट की घटना के बाद दोनों पक्षों के रिश्तेदार दसौरा गांव में एकत्रित हुए और पूनम व उसके पति को अलग करवा दिया, लेकिन कुछ दिनों के बाद धर्मबीर तथा पूनम फिर से उन्हीं के साथ रहना शुरू कर दिया।
10 अक्टूबर की रात को करीब तीन बजे उसे मामा के लड़के विनोद का फोन आया, जिसने बताया कि पूनम की तबीयत खराब है, इसलिए वह परिजनों के साथ तुरंत दसौरा चला जाए।
सूचना मिलने के बाद जब वह दसौरा पहुंचा, तो उसे अपनी बहन पूनम का शव बरामदे में जमीन पर पड़ा मिला। इसके देखकर उसके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई। जब उसने इस घटना के बारे में पूनम के पति धर्मबीर, देवर महावीर और सास संतोष से पूछा तो उन्होंने कहा कि पूनम को दौरा पड़ा था।
हार्ट अटैक की वजह से उसकी मौत हो गई है। लेकिन जब उसने पूनम के गले को ध्यान से देखा, तो उस पर लाल तथा नीला निशान पड़ा हुआ था। जिसे देखकर प्रतीत होता है कि उपरोक्त लोगों ने उसकी बहन का गला दबाकर हत्या की है। पुलिस ने संजय की शिकायत पर मृतका के पति धर्मबीर और देवर महावीर के खिलाफ भादंसं की धारा 302, 201 तथा 34 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने 12 अक्टूबर 2012 को धर्मबीर तथा महावीर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। वहां से उन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। रिमांड के दौरान पूनम की हत्या में प्रयोग चुन्नी तथा अन्य सामान बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया।
जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सरकारी वकील बीडी सोनी ने बताया कि कोर्ट में करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के दौरान 10 लोगों की गवाही हुई। मृतका के देवर महावीर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
जबकि मृतका के पति धर्मबीर को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना तथा भादंसं की धारा 201 में सात साल कैद तथा 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर तीन महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।