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एलएनजेपी अस्पताल में उपचार के लिए नहीं, बेड के लिए धक्के खा रहे हैं मरीज व तीमारदार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Nov 2021 02:18 AM IST
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Wheelchair without bed, treatment on stretcher, patient helpless in LNJP hospital
जिला अस्पताल में मरीज उपचार से पहले बेड के लिए धक्के खा रहे हैं। स्थिति यह है कि एक-एक बेड पर तीन-तीन मरीजों को लिटाया जा रहा है। जिन्हें बेड नहीं नसीब हो रहा है वे व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर उपचार करा रहे हैं। यही नहीं ठंड में मरीज जमीन पर लेटकर भी उपचार कराने को मजबूर हैं। वहीं अस्पताल के वार्डों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था करने में स्वास्थ्य विभाग असमर्थता जता रहा है।
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जानकारी के अनुसार 100 बेड की सुविधा से लैस जिला अस्पताल में 28 नवंबर तक पुरुष वार्ड में 55, महिला वार्ड में 46 और एसएनसीयू में 11 मरीजों सहित कुल 187 मरीज दाखिल थे, जबकि सोमवार को भी 63 नए मरीजों को दाखिल किया गया। इससे पहले प्रदेश सरकार द्वारा 39 करोड़ रुपये की लागत से सौ बेड की सुविधा से लैस नई वातानुकूलित इमारत तैयार करने के साथ-साथ जिला अस्पताल को 200 बेड का करने की घोषणा की गई थी, जो आज तक सिरे नहीं चढ़ पाई।
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दो दिन से जमीन पर लेट कर उपचार करा रहा मनदीप
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गांव गुढ़ा वासी मनदीप को सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आई थी। चिकित्सकों ने दो तीन दिन दाखिल करने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था। रविवार को फिर तबीयत अचानक बिगड़ने पर पिता जसपाल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां मनदीप को बेड नहीं मिला। रविवार से ही वह नीचे जमीन पर लेट कर उपचार कराने को मजबूर है। उनके माता-पिता अस्पताल स्टाफ के सामने बेड उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ।
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साहिल को व्हीलचेयर पर दिया उपचार
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बिरला मंदिर निकट वासी साहिल शर्मा को सड़क दुर्घटना में सिर और मुंह सहित शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। परिजनों द्वारा गुहार लगाने के बावजूद बेड की व्यवस्था नहीं हो पाई। अस्पताल स्टाफ ने साहिल को व्हीलचेयर पर ही उपचार दिया। परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
प्राइवेट रूम में चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय और चिकित्सकों की ओपीडी
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अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर नई बिल्डिंग तैयार करने का प्रस्ताव है। यहीं चिकित्सकों की ओपीडी होगी, लेकिन अस्पताल की नई बिल्डिंग में जिन प्राइवेट रूम को मरीजों के लिए तैयार किया गया था, अब उसमें चिकित्सकों की ओपीडी और चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय को शिफ्ट किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोविड के चलते पुरानी बिल्डिंग को तोड़ा नहीं जा सकता। जब तक अस्पताल की दूसरी बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं होगी, तब तक प्राइवेट रूम में चिकित्सकों की ओपीडी चलानी पड़ेगी।

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जब जगह ही नहीं, अस्पताल प्रशासन कैसे करें बेड की व्यवस्था: डॉ. सारा
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जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सारा अग्रवाल का कहना है कि एक-एक वार्ड में जहां छह बेड की व्यवस्था होनी थी, वहां आठ-आठ बेड की व्यवस्था की गई है। मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और अस्पताल में सौ बेड की व्यवस्था है। आइसोलेशन वार्ड के चलते अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में सामान्य मरीजों को शिफ्ट नहीं कर सकते। अस्पताल में जगह ही नहीं है तो वे कहां से बेड की व्यवस्था करें।
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