{"_id":"66d2456c84eedc40fe098c84","slug":"we-should-see-good-qualities-in-every-living-being-dr-swati-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1022-124604-2024-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर प्राणी में गुण देखना चाहिए: डॉ. स्वाति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर प्राणी में गुण देखना चाहिए: डॉ. स्वाति
विज्ञापन
यमुनानगर। एसएस जैन सभा माडल टाउन में चल रहे चातुर्मास कार्यक्रम के 42वें दिन साध्वी डॉ. स्वाति महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि एक बार भगवान महावीर से पूछा गया कि प्रभु महापुरुषों की स्तुति करने से, उनका गुणगान करने से प्राणी को किस फल की प्राप्ति होती है। प्रभु ने अपने श्री मुख से फरमाया कि महापुरुषों की स्तुति करने से वीतराग भगवान की प्राप्ति होती है।
कहने का तात्पर्य है कि व्यक्ति जैसा देखता है, वैसा ही उसका जीवन बनता जाता है। जैसे कि कहा भी गया है जैसी संगत बैठिए, तैसोई फल दीन। इसलिए हमें हर प्राणी में गुण देखना चाहिए।
दूसरों के अवगुण देखने से, दूसरों की बुराई देखने से, निंदा करने से हमारा जीवन अवगुणों की खान बन जाता है। यदि हम दूसरों के गुण देखते हैं और उनकी सराहना, प्रशंसा करते हैं तो वह गुण हमारे अंदर अपने आप ही उभरने लगते हैं। इसलिए महापुरुषों की, संत की, गुरुओं की स्तुति लगातार करनी चाहिए। आमतौर पर देखा गया है कि माता-पिता बच्चों से यही अपेक्षा रखते हैं कि वह अच्छी संगति में रहे और बुरी संगति से बचे रहे।
विज्ञापन
इसके पीछे भी केवल यही भावना होती है कि यदि उनका बच्चा अच्छी संगति में रहेगा तो वह उसी की तरह बनेगा। उसके अंदर अच्छे संस्कार व अच्छे गुण आएंगे। यदि वह बुरी संगत में रहा तो वही बुरी आदतें उसके अंदर आएगी, जो आगे जाकर उसको भी दुखी करेंगी और माता-पिता के साथ समाज को भी।
-- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
कहने का तात्पर्य है कि व्यक्ति जैसा देखता है, वैसा ही उसका जीवन बनता जाता है। जैसे कि कहा भी गया है जैसी संगत बैठिए, तैसोई फल दीन। इसलिए हमें हर प्राणी में गुण देखना चाहिए।
विज्ञापन
दूसरों के अवगुण देखने से, दूसरों की बुराई देखने से, निंदा करने से हमारा जीवन अवगुणों की खान बन जाता है। यदि हम दूसरों के गुण देखते हैं और उनकी सराहना, प्रशंसा करते हैं तो वह गुण हमारे अंदर अपने आप ही उभरने लगते हैं। इसलिए महापुरुषों की, संत की, गुरुओं की स्तुति लगातार करनी चाहिए। आमतौर पर देखा गया है कि माता-पिता बच्चों से यही अपेक्षा रखते हैं कि वह अच्छी संगति में रहे और बुरी संगति से बचे रहे।
विज्ञापन
इसके पीछे भी केवल यही भावना होती है कि यदि उनका बच्चा अच्छी संगति में रहेगा तो वह उसी की तरह बनेगा। उसके अंदर अच्छे संस्कार व अच्छे गुण आएंगे। यदि वह बुरी संगत में रहा तो वही बुरी आदतें उसके अंदर आएगी, जो आगे जाकर उसको भी दुखी करेंगी और माता-पिता के साथ समाज को भी।