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कैलेंडर नहीं स्वयं को बदलना होगा : निर्मल दास
Mon, 05 Jan 2026 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 05 Jan 2026 01:09 AM IST
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प्रवचन करते महंत निर्मल दास व अन्य। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। नव वर्ष के आगमन पर रविवार को कपालमोचन स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लालदास में सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन से की गई। कार्यक्रम में आध्यात्मिक कलाकारों ने भजन प्रस्तुत कर उपस्थित साध-संगत को भक्ति से सराबोर किया।
डेरा कपालमोचन के गद्दीनशीन महंत निर्मल दास महाराज ने कहा कि नव वर्ष का आगमन केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक जागृति का समय भी है। भारत के महान संतों और विचारकों ने नए साल को लेकर बहुत ही गहरे और प्रेरणादायक विचार किए हैं।
उन्होंने कहा कि संतों का मानना है कि बाहर की तारीखें बदलने से जीवन तब तक नहीं बदलता, जब तक हम अपने भीतर के विचारों को नहीं बदलते। नए साल के शुभ अवसर पर संत समागम का आयोजन आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ वर्ष की शुरुआत करने का एक बेहतरीन तरीका है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में सद्भाव, ज्ञान और नैतिकता का प्रसार करना होता है। संतों के विचार युवाओं और परिवारों को सही संस्कार देते हैं।
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संत बलवंत दास ने कहा कि हमें हर दिन एक नया जन्म मानना चाहिए। नया साल संकल्प लेने का नहीं, बल्कि खुद को यह याद दिलाने का समय है कि हम अनंत शक्ति के स्वामी हैं। संत जी कहा कि असली नया साल वह है जब हम अपने पुराने दोषों को त्याग कर नए सद्गुणों को अपनाते हैं। अध्यात्म में समय को काल कहा गया है। पिछले वर्ष में मिले अनुभवों, संघर्षों और सुखों के लिए ईश्वर या प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।
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व्यासपुर। नव वर्ष के आगमन पर रविवार को कपालमोचन स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर डेरा बाबा लालदास में सत्संग का आयोजन किया गया। इसकी शुरुआत मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन से की गई। कार्यक्रम में आध्यात्मिक कलाकारों ने भजन प्रस्तुत कर उपस्थित साध-संगत को भक्ति से सराबोर किया।
डेरा कपालमोचन के गद्दीनशीन महंत निर्मल दास महाराज ने कहा कि नव वर्ष का आगमन केवल कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक जागृति का समय भी है। भारत के महान संतों और विचारकों ने नए साल को लेकर बहुत ही गहरे और प्रेरणादायक विचार किए हैं।
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उन्होंने कहा कि संतों का मानना है कि बाहर की तारीखें बदलने से जीवन तब तक नहीं बदलता, जब तक हम अपने भीतर के विचारों को नहीं बदलते। नए साल के शुभ अवसर पर संत समागम का आयोजन आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ वर्ष की शुरुआत करने का एक बेहतरीन तरीका है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य समाज में सद्भाव, ज्ञान और नैतिकता का प्रसार करना होता है। संतों के विचार युवाओं और परिवारों को सही संस्कार देते हैं।
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संत बलवंत दास ने कहा कि हमें हर दिन एक नया जन्म मानना चाहिए। नया साल संकल्प लेने का नहीं, बल्कि खुद को यह याद दिलाने का समय है कि हम अनंत शक्ति के स्वामी हैं। संत जी कहा कि असली नया साल वह है जब हम अपने पुराने दोषों को त्याग कर नए सद्गुणों को अपनाते हैं। अध्यात्म में समय को काल कहा गया है। पिछले वर्ष में मिले अनुभवों, संघर्षों और सुखों के लिए ईश्वर या प्रकृति का आभार व्यक्त करना चाहिए।

प्रवचन करते महंत निर्मल दास व अन्य। प्रवक्ता