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जंगली तेंदुए ने मचाया आतंक, सहमे टिब्बड़ियों के लोग
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राष्ट्रीय उद्यान कलेसर के जंगल से निकलकर तेंदुआ आबादी का रुख करने लगा है। पिछले दो सप्ताह के अंदर जंगली तेंदुआ कई बकरियों, कुत्ते और अन्य पशुओं पर हमला कर चुका है। ऐसे में तेंदुए के आतंक से टिब्बड़ियों के लोग काफी सहमे हुए हैं। बताया जा रहा है तेंदुआ अब गांव की नदी और चौकी के आसपास भी देखा गया है। ग्रामीणों ने वन्य प्राणी विभाग से सुरक्षा की गुहार लगाई है।
क्षेत्रवासी ग्रामीण आलिम, फकरू, इंतजार, सुलेमान और इसरार आदि का कहना है पिछले कई दशक से पहाड़ी की तलहटी में गांव बसे हुए हैं और ग्रामीणों का मुख्य कार्य पशुपालन व खेती करना है। पशुपालक अपने पशुओं को लेकर जंगल में आसपास के क्षेत्र में चराते हैं, लेकिन लगभग दो सप्ताह से क्षेत्र में तेंदुए का आतंक है। इस दौरान तेंदुआ कई पशुओं पर हमला कर चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के साथ लगते गांव में वन्य प्राणी विभाग की तरफ से पहले लोगों को जागरूक करने और जंगली जानवरों से बचाने के उपाय बताए जाते थे, लेकिन अब कोई जागरूकता शिविर भी नहीं लगाया जाता है। विभाग को चाहिए लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करे।
पहरा देने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक जंगली जानवरों के डर से ग्रामीण रातभर जाग कर पशुओं और परिवार वालों की रक्षा के लिए पहरा देते हैं। चूंकि पहले भी कई बार जंगली जानवर गांव में घुसकर कुत्तों व बकरियों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। ऐसे में ग्रामीण दहशत में हैं। उन्होंने सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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जिन लोगों की बकरियों को तेंदुए ने घायल किया है, वह बकरियां जंगल में चर रही थीं। गांव की आबादी के साथ लगते क्षेत्र में तेंदुआ घूमता रहता है, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता क्योंकि वहां भी जंगली क्षेत्र है। फिर भी लोगों को जंगली जानवरों से बचाव के लिए आवश्यक एहतियात बरतना होगा। शिवालिक की तलहटी में जहां पर लोगों के घर हैं, वहां भी घना जंगल है। ऐसे में जंगली जानवरों का आना स्वाभाविक है।
- लीलू राम, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग।
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क्षेत्रवासी ग्रामीण आलिम, फकरू, इंतजार, सुलेमान और इसरार आदि का कहना है पिछले कई दशक से पहाड़ी की तलहटी में गांव बसे हुए हैं और ग्रामीणों का मुख्य कार्य पशुपालन व खेती करना है। पशुपालक अपने पशुओं को लेकर जंगल में आसपास के क्षेत्र में चराते हैं, लेकिन लगभग दो सप्ताह से क्षेत्र में तेंदुए का आतंक है। इस दौरान तेंदुआ कई पशुओं पर हमला कर चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के साथ लगते गांव में वन्य प्राणी विभाग की तरफ से पहले लोगों को जागरूक करने और जंगली जानवरों से बचाने के उपाय बताए जाते थे, लेकिन अब कोई जागरूकता शिविर भी नहीं लगाया जाता है। विभाग को चाहिए लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करे।
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पहरा देने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के मुताबिक जंगली जानवरों के डर से ग्रामीण रातभर जाग कर पशुओं और परिवार वालों की रक्षा के लिए पहरा देते हैं। चूंकि पहले भी कई बार जंगली जानवर गांव में घुसकर कुत्तों व बकरियों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। ऐसे में ग्रामीण दहशत में हैं। उन्होंने सुरक्षा की गुहार लगाई है।
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जिन लोगों की बकरियों को तेंदुए ने घायल किया है, वह बकरियां जंगल में चर रही थीं। गांव की आबादी के साथ लगते क्षेत्र में तेंदुआ घूमता रहता है, लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता क्योंकि वहां भी जंगली क्षेत्र है। फिर भी लोगों को जंगली जानवरों से बचाव के लिए आवश्यक एहतियात बरतना होगा। शिवालिक की तलहटी में जहां पर लोगों के घर हैं, वहां भी घना जंगल है। ऐसे में जंगली जानवरों का आना स्वाभाविक है।
- लीलू राम, इंस्पेक्टर, वन्य प्राणी विभाग।