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Yamuna Nagar News: दो माह बाद ठीक हुई अल्ट्रासाउंड मशीन
Wed, 06 Sep 2023 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 06 Sep 2023 01:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मुकंद लाल जिला अस्पताल की एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन दो माह बाद ठीक हो गई। इससे गर्भवतियों को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली से आए इंजीनियर ने मंगलवार कोमशीन को ठीक किया। अल्ट्रासाउंड मशीन का पार्ट खराब हो गया था। यह पार्ट कहीं नहीं मिल रहा था। काफी प्रयासों के बाद पार्ट मिला और मशीन ठीक हो गई।
जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन 13 जुलाई को खराब हो गई थी। इस मशीन से गर्भवती महिलाओं का लेवल-वन का अल्ट्रासाउंड होता है। इससे पता चलता है कि कोई महिला गर्भवती है या नहीं। परंतु मशीन खराब होने से महिलाओं को काफी परेशान हो रही थी। उन्हें मजबूरन निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा था। जिसके लिए उन्हें 1000 से 1200 रुपये खर्च कर ने पड़ रहे थे।
वहीं सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मुफ्त होता है। वहीं प्रदीप तहलान अल्ट्रासाउंड सेंटर स्वास्थ्य विभाग के पैनल पर है। यहां पर गर्भवती महिलाएं 300 रुपये अल्ट्रासाउंड करवा सकती हैं। यहां एक सप्ताह की वेटिंग चल रही है। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन तो ठीक हो गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसमें स्टाफ नहीं भेजा गया। डॉ. संजना दुआ इसमें अल्ट्रासाउंड करती हैं। वहीं इसमें एक महिला स्टाफ नर्स की जरूरत होती है और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की।
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जिस गर्भवती का अल्ट्रासाउंड होता है उसे पहले फार्म एफ भरना होता है। इस फार्म में महिला का नाम, पता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर समेत सारी डिटेल होती है। इस फार्म को भरने में एक तो काफी समय लगता है और रिकॉर्ड भी ऑनलाइन करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि सिविल सर्जन कार्यालय व पीएमओ को सूचना दिए जाने के बावजूद स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। जिस कारण पहले दिन केवल तीन अल्ट्रासाउंड ही हो सके, जबकि रोजाना 30 से 40 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होते हैं।
मशीन ठीक हो गई है : डॉ. संजना दुआ
अल्ट्रासाउंड केंद्र की नोडल ऑफिसर डॉ. संजना दुआ ने बताया कि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन पार्ट में फाल्ट आने से खराब हो गई थी। मंगलवार को इंजीनियर ने मशीन ठीक कर दी है। अब गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड अस्पताल में ही होंगे।
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यमुनानगर। मुकंद लाल जिला अस्पताल की एकमात्र अल्ट्रासाउंड मशीन दो माह बाद ठीक हो गई। इससे गर्भवतियों को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली से आए इंजीनियर ने मंगलवार कोमशीन को ठीक किया। अल्ट्रासाउंड मशीन का पार्ट खराब हो गया था। यह पार्ट कहीं नहीं मिल रहा था। काफी प्रयासों के बाद पार्ट मिला और मशीन ठीक हो गई।
जिला अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन 13 जुलाई को खराब हो गई थी। इस मशीन से गर्भवती महिलाओं का लेवल-वन का अल्ट्रासाउंड होता है। इससे पता चलता है कि कोई महिला गर्भवती है या नहीं। परंतु मशीन खराब होने से महिलाओं को काफी परेशान हो रही थी। उन्हें मजबूरन निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा था। जिसके लिए उन्हें 1000 से 1200 रुपये खर्च कर ने पड़ रहे थे।
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वहीं सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मुफ्त होता है। वहीं प्रदीप तहलान अल्ट्रासाउंड सेंटर स्वास्थ्य विभाग के पैनल पर है। यहां पर गर्भवती महिलाएं 300 रुपये अल्ट्रासाउंड करवा सकती हैं। यहां एक सप्ताह की वेटिंग चल रही है। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन तो ठीक हो गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसमें स्टाफ नहीं भेजा गया। डॉ. संजना दुआ इसमें अल्ट्रासाउंड करती हैं। वहीं इसमें एक महिला स्टाफ नर्स की जरूरत होती है और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की।
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जिस गर्भवती का अल्ट्रासाउंड होता है उसे पहले फार्म एफ भरना होता है। इस फार्म में महिला का नाम, पता, आधार नंबर, मोबाइल नंबर समेत सारी डिटेल होती है। इस फार्म को भरने में एक तो काफी समय लगता है और रिकॉर्ड भी ऑनलाइन करना पड़ता है। बताया जा रहा है कि सिविल सर्जन कार्यालय व पीएमओ को सूचना दिए जाने के बावजूद स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। जिस कारण पहले दिन केवल तीन अल्ट्रासाउंड ही हो सके, जबकि रोजाना 30 से 40 महिलाओं के अल्ट्रासाउंड होते हैं।
मशीन ठीक हो गई है : डॉ. संजना दुआ
अल्ट्रासाउंड केंद्र की नोडल ऑफिसर डॉ. संजना दुआ ने बताया कि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन पार्ट में फाल्ट आने से खराब हो गई थी। मंगलवार को इंजीनियर ने मशीन ठीक कर दी है। अब गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड अस्पताल में ही होंगे।