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रेल बजट की आहट से हरे हो जाते हैं जख्म

Mon, 07 Jul 2014 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर।
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर। Updated Mon, 07 Jul 2014 12:05 AM IST
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Turn green scarred by the sound of railway budget
नरेंद्र मोदी की सरकार जल्द ही रेल बजट लाने वाली है। जिलावासियों को हर बार यह उम्मीद रहती है कि कोई नई ट्रेन की घोषणा हो, जो जगाधरी रेलवे स्टेशन से होकर गुजरे। जिलावासियों को इस बात का मलाल है कि रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं अब तक हकीकत का रूप अख्तियार नहीं कर पाई हैं।
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सरकार को करोड़ों का राजस्व देने वाले बर्तन उद्योग के लिए भी रेल बजट के पिटारे से आज तक कुछ नहीं निकला। जगाधरी रेलवे स्टेशन कई साल पहले माडर्न रेलवे स्टेशन की फेहरिस्त में शामिल कर लिया गया, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है।
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प्रधानमंत्री ने जब से रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट की तरह बनाने की बात कही है, तब से जिलावासी उन्हें उम्मीद भरी नजराें से देख रहे हैं। 


यमुनानगर-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के इंतजार में युवा हो गए बुजुर्ग
यमुनानगर-चंडीगढ़ रेलवे लाइन का निर्माण अब तक सपना बना हुआ है। इस अति महत्वाकांक्षी परियोजना पर चार दशक पहले सर्वे हुआ था, लेकिन रेलवे लाइन के निर्माण की दिशा में इससे आगे कुछ नहीं हुआ। यूपीए सरकार के कार्यकाल में पेश किए गए रेल बजट में इस रेलवे लाइन के निर्माण को दोबारा हरी झंडी दी गई।
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इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष यमुनानगर-चंडीगढ़ रेलवे निर्माण के प्रति अपनी गंभीरता जाहिर करते हुए इस परियोजना के निर्माण केे लिए प्रदेश सरकार के हिस्से का आधा खर्च देने की घोषणा की थी। लेकिन इस घोषणा को आज तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

इस रेल लाइन की जब से मांग की जा रही है, तब से अंबाला संसदीय सीट से कांग्रेस और भाजपा दोनों के सांसद बनते रहे हैं। यदि यह रेलवे लाइन धरातल पर आती है तो न सिर्फ यमुनानगर, अंबाला, पंचकूला और चंडीगढ़ के लोगों को फायदा होगा। साथ ही उपेक्षित पड़े साढौरा और नारायणगढ़ का तेजी से विकास हो सकेगा।

बर्तन नगरी से सिर्फ कमाई तक सीमित है रेलवे
जगाधरी को बर्तन नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहां की फैक्टरियों में बनने वाले बर्तन देश भर में भेजे जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जगाधरी की बर्तन फैक्टरियों में प्रतिदिन टनों बर्तन बनाए जाते हैं। इनमें अधिकतर रेलवे द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जातेे हैं। इस प्रकार जगाधरी के बर्तन उद्योग से रेलवे को मोटी कमाई होती है। लेकिन विडंबना है कि बर्तन निर्माताओं को रेलवे रत्ती भर भी सुविधा नहीं देता है। जगाधरी रेलवे स्टेशन से लंबी दूरी की ट्रेनों में बर्तन बुक नहीं हो पाते। इसके लिए पहले जगाधरी से सहारनपुर बर्तनों की बुकिंग करवानी पड़ती है। सहारनपुर से कमीशन एजेंट आगे की बुकिंग करवाते हैं। इससे बर्तन निर्माताओं का खर्च काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा जगाधरी में बर्तन बनाने के लिए आने वाले कच्चे माल को स्टेशन पर रखने के एवज में रेलवे बर्तन निर्माता से दो रुपये प्रति घंटा प्रति नग वसूल करता है। बर्तन निर्माताओं का कहना है कि कच्चे माल की बिल्टी उन्हें तीन-चार बाद मिलती है, जबकि माल पहले स्टेशन पर आ जाता है। उनकी वर्षों से मांग है कि स्टेशन पर कच्चा माल आने के 48 घंटे बाद डैमरेज लगाया जाए।

लैटर जारी कर स्टेशन का नाम बदलना भूला रेलवे
रेलवे स्टेशन का नाम अमूमन जिले के नाम पर होता है। लेकिन यमुनानगर जिले के रेलवे स्टेशन का नाम जगाधरी ही चल रहा है। इस कारण यहां आने वाले बाहरी और जिले से अनजान यात्रियों और व्यापारियाें को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शहर के विभिन्न व्यापारिक, सामाजिक और राजनीति संगठन रेलवे स्टेशन के नाम के साथ यमुनानगर जोड़ने की मांग कर रहे हैं। पूर्व सांसद कुमारी सैलजा के प्रयासों से रेलवे विभाग ने जगाधरी रेलवे स्टेशन का नाम जगाधरी-यमुनानगर रेलवे स्टेशन करने की स्वीकृति प्रदान कर दी। पिछले वर्ष नवंबर माह में स्टेशन के नाम के साथ यमुनानगर जोड़े जाने का पत्र भी जारी कर दिया गया, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी अब तक रेलवे स्टेशन पर कही भी यमुनानगर का नाम नहीं जुड़ पाया है।


प्लेटफार्म नंबर एक पर पूरी नहीं आती है ट्रेन
स्टेशन पर सबसे बड़ी दिक्कत प्लेटफार्म नंबर एक की लंबाई कम होना है। इसके लिए यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रेन पर चढ़ना और उतरना पड़ता है। प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन के आने पर ट्रेन के चार-पांच डिब्बे प्लेटफार्म से पीछे रह जाते हैं। ऐसे में ट्रेन से उतरने वाले बुजुर्ग और महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अन्य माडर्न रेलवे स्टेशन की तर्ज पर यहां डिस्पले बोर्ड नहीं लगा है। इससे यात्रियों को यह नहीं पता चल पाता कि कौन सा कोच कहां आएगा। रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों का स्टापेज दो मिनट का होता है। ऐसे में यदि कोच दूर हो तो बुजुर्ग और महिला यात्रियों को ट्रेन पर चढ़ना मुश्किल हो जाता है। जगाधरी रेलवे स्टेशन पर दिल्ली और अन्य राज्यों की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों का स्टापेज नहीं है। इससे यात्रियों को अंबाला या सहारनपुर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है। दैनिक यात्री संघ लंबे समय से रेलवे प्रशासन से जगाधरी रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के स्टापेज की मांग कर रहा है।
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