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Yamuna Nagar News: शाम छह से नौ बजे का सफर खतरनाक
Wed, 29 Jan 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 Jan 2025 01:30 AM IST
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राजेश कुमार
यमुनानगर। जिले में शाम को छह बजे से रात नौ बजे तक सफर करना खतरे से खाली नहीं है। इन तीन घंटों में ही जिले में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। साल 2024 में कुल 445 हादसे हुए। इनमें 226 लोगों की मौत हुई। वहीं शाम छह से रात नौ बजे तक हुए 131 हादसों में 65 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। यह खुलासा आईरेड (इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डाटा) एजेंसी की ओर से जुटाए गए डाटा में हुआ है।
दरअसल शाम छह बजे से रात नौ बजे के बीच सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। सड़कों पर लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या हादसों का बड़ा कारण बन रही है। जो लोग सरकारी या फिर प्राइवेट नौकरी करते हैं, उनकी शाम को पांच से आठ बजे के दौरान छुट्टी होती है।
इस समय के दौरान सभी को काम से घर लौटने की जल्दबाजी रहती है। इस पर लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं, सड़कों पर बने अवैध कट से निकलते हैं। यही हड़बड़ाहट सड़क हादसों का कारण बन रही है, जिसमें लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
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हादसे केवल तेज रफ्तार व जल्दबाजी के कारण ही नहीं, सड़कों की खामियों की वजह से भी हो रहे हैं। सड़कों की खामियों को जिला प्रशासन दूर नहीं कर पा रहा है। शहर के सभी चौक क्षतिग्रस्त हैं। किसी भी चौक की ट्रैफिक लाइट ठीक से काम नहीं करती। डिवाइरों की हालत खराब है। लोगों ने इनमें अवैध कट बना लिए हैं। दूसरा सड़कों पर सफेद पट्टी तक नहीं है।
एक बार सफेद पट्टी मिट जाए तो उसे दोबारा लगाने का नाम नहीं लिया जाता। वहीं काफी सड़कों की पट्टी इतना धूमिल हो गई है कि वह रात को दिखाई तक नहीं देती। इसके अलावा बरम भी सड़कों के लेवल में नहीं हैं। अंधे मोड़ पर संकेतक नहीं हैं, जिससे भी लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।
जिले में वर्ष 2023 में कुल 429 दुर्घटनाएं हुई थी, जिसमें 234 लोगों की मौत हुई। वहीं 397 लोग घायल हुए थे। तब केवल दिसंबर माह में ही हुए 44 सड़क हादसों में 23 की मौत हुई थी और 39 लोग घायल हुए थे। 2024 में जिले में कुल 445 सड़क हादसे हुए और 226 लोगों की मौत हुई। दिसंबर 2024 में 34 हादसों में 18 लोगों की मौत हुई और 32 घायल हुए। संवाद
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यमुनानगर। जिले में शाम को छह बजे से रात नौ बजे तक सफर करना खतरे से खाली नहीं है। इन तीन घंटों में ही जिले में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं। साल 2024 में कुल 445 हादसे हुए। इनमें 226 लोगों की मौत हुई। वहीं शाम छह से रात नौ बजे तक हुए 131 हादसों में 65 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। यह खुलासा आईरेड (इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डाटा) एजेंसी की ओर से जुटाए गए डाटा में हुआ है।
दरअसल शाम छह बजे से रात नौ बजे के बीच सड़कों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। सड़कों पर लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या हादसों का बड़ा कारण बन रही है। जो लोग सरकारी या फिर प्राइवेट नौकरी करते हैं, उनकी शाम को पांच से आठ बजे के दौरान छुट्टी होती है।
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इस समय के दौरान सभी को काम से घर लौटने की जल्दबाजी रहती है। इस पर लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं, सड़कों पर बने अवैध कट से निकलते हैं। यही हड़बड़ाहट सड़क हादसों का कारण बन रही है, जिसमें लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
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हादसे केवल तेज रफ्तार व जल्दबाजी के कारण ही नहीं, सड़कों की खामियों की वजह से भी हो रहे हैं। सड़कों की खामियों को जिला प्रशासन दूर नहीं कर पा रहा है। शहर के सभी चौक क्षतिग्रस्त हैं। किसी भी चौक की ट्रैफिक लाइट ठीक से काम नहीं करती। डिवाइरों की हालत खराब है। लोगों ने इनमें अवैध कट बना लिए हैं। दूसरा सड़कों पर सफेद पट्टी तक नहीं है।
एक बार सफेद पट्टी मिट जाए तो उसे दोबारा लगाने का नाम नहीं लिया जाता। वहीं काफी सड़कों की पट्टी इतना धूमिल हो गई है कि वह रात को दिखाई तक नहीं देती। इसके अलावा बरम भी सड़कों के लेवल में नहीं हैं। अंधे मोड़ पर संकेतक नहीं हैं, जिससे भी लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।
जिले में वर्ष 2023 में कुल 429 दुर्घटनाएं हुई थी, जिसमें 234 लोगों की मौत हुई। वहीं 397 लोग घायल हुए थे। तब केवल दिसंबर माह में ही हुए 44 सड़क हादसों में 23 की मौत हुई थी और 39 लोग घायल हुए थे। 2024 में जिले में कुल 445 सड़क हादसे हुए और 226 लोगों की मौत हुई। दिसंबर 2024 में 34 हादसों में 18 लोगों की मौत हुई और 32 घायल हुए। संवाद