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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताई गुरु की महिमा
Mon, 06 Oct 2025 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 06 Oct 2025 01:46 AM IST
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सत्संग के दौरान प्रवचन करतीं साध्वीं। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी नीलम भारती ने श्रद्धालुओं को गुरु की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि गुरु की सेवा कर्म संस्कार काटने का अचूक शस्त्र है, जो कार्य कई जन्मों तक तपस्या करके भी सिद्ध नहीं हो सकता, वह कार्य मात्र गुरु की कृपा दृष्टि से ही संभव हो जाता है
साध्वी नीलम ने कहा कि निराकार स्वरूप परब्रह्म सत्ता जब साकार स्वरूप धारण करके गुरु रूप में धरती पर आती है, तो वह अपनी किसी निजी सेवा के लिए अपनी जीवात्माओं को नहीं लगाती अपितु वह निःस्वार्थ भाव से समाज कल्याण एवं परोपकार की भावना से कार्य करने के लिए ही संपूर्ण मानव जाति को प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि स्वयं के सुधार के लिए किया सच्चा पुरुषार्थ गुरु सेवा का प्रथम पड़ाव है और अपने जीवन को जन कल्याण एवं समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर देना सेवा की पराकाष्ठा है। गुरु सेवा आध्यात्मिक उत्थान का सरल और सहज मार्ग है। सेवा के द्वारा गुरु की प्रसन्नता प्राप्त करके शिष्य अपने साथ साथ अपने संपूर्ण कुल का भी उद्धार कर लेता है, चूंकि गुरु सेवा का फल अनंत है।
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उन्होंने कहा कि पूर्ण निष्ठा और दृढ़ विश्वास के साथ गुरु सेवा में लगे एक साधक के अंतःकरण में दया, क्षमा, दया, धैर्य,नम्रता और समर्पण जैसे गुण सहज ही प्रकट हो जाते हैं। शांति आत्मा का स्वभाव है किंतु जब हमारा मन संसार की आसक्ति में उलझ जाता है तो आत्मा अपना शांत स्वरूप भूलाकर भ्रम और अशांति से पीड़ित होती है।
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी नीलम भारती ने श्रद्धालुओं को गुरु की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि गुरु की सेवा कर्म संस्कार काटने का अचूक शस्त्र है, जो कार्य कई जन्मों तक तपस्या करके भी सिद्ध नहीं हो सकता, वह कार्य मात्र गुरु की कृपा दृष्टि से ही संभव हो जाता है
साध्वी नीलम ने कहा कि निराकार स्वरूप परब्रह्म सत्ता जब साकार स्वरूप धारण करके गुरु रूप में धरती पर आती है, तो वह अपनी किसी निजी सेवा के लिए अपनी जीवात्माओं को नहीं लगाती अपितु वह निःस्वार्थ भाव से समाज कल्याण एवं परोपकार की भावना से कार्य करने के लिए ही संपूर्ण मानव जाति को प्रेरित करती है।
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उन्होंने कहा कि स्वयं के सुधार के लिए किया सच्चा पुरुषार्थ गुरु सेवा का प्रथम पड़ाव है और अपने जीवन को जन कल्याण एवं समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर देना सेवा की पराकाष्ठा है। गुरु सेवा आध्यात्मिक उत्थान का सरल और सहज मार्ग है। सेवा के द्वारा गुरु की प्रसन्नता प्राप्त करके शिष्य अपने साथ साथ अपने संपूर्ण कुल का भी उद्धार कर लेता है, चूंकि गुरु सेवा का फल अनंत है।
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उन्होंने कहा कि पूर्ण निष्ठा और दृढ़ विश्वास के साथ गुरु सेवा में लगे एक साधक के अंतःकरण में दया, क्षमा, दया, धैर्य,नम्रता और समर्पण जैसे गुण सहज ही प्रकट हो जाते हैं। शांति आत्मा का स्वभाव है किंतु जब हमारा मन संसार की आसक्ति में उलझ जाता है तो आत्मा अपना शांत स्वरूप भूलाकर भ्रम और अशांति से पीड़ित होती है।

सत्संग के दौरान प्रवचन करतीं साध्वीं। संस्थान