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लंपी से बचाव के लिए देसी नुस्खों के सहारे पशुपालक, गोशालाओं में तेजी से फैल रहा वायरस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Aug 2022 02:36 AM IST
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To prevent lumpi, animal husbandry with the help of indigenous tips
यमुनानगर। लंपी वायरस पशुओं में तेजी से फैल रहा है। वीरवार तक जिले में 9279 पशु इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जबकि एक दिन पहले बुधवार को यह आंकड़ा 9033 था। राहत की बात यह है कि इस बीमारी की चपेट में आए पशुओं में से अब तक 5471 पशु लंपी वायरस को मात देकर ठीक भी हुए हैं। वहीं बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए पशुपालक देसी नुस्खों के सहारे हैं। वह पशु बाड़ों में कपूर व गूगल की धूप कर रहे हैं। जहां पर पशुओं को बांधा जाता है वहां पर चूना भी डाला जा रहा है। इसके अलावा पशुओं को फिटकरी के पानी व नीम के पत्तों से तैयार काढ़े से नहलाया जा रहा है।
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छछरौली स्थित गोशाला में तो शीतला माता के नाम का जाप व हवन भी किया गया। ज्यादातर पशुपालक लंपी वायरस को चेचक बीमारी से जोड़कर देख रहे हैं। मान्यता है कि जब चेचक फैलता है तो शीतला माता की पूजा करने से बीमारी ठीक हो जाती है। इसलिए लंपी वायरस को चेचक मान कर शीतला माता का जाप किया जाने लगा है।
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गोशालाओं में गोवंश की हालत ज्यादा खराब
गोशालाओं में रहने वाले काफी गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आ रहे हैं। साढौरा स्थित श्री श्याम गोशाला के संचालक ब्रह्मचारी शोभा दास ने बताया कि उनके पास करीब 300 गोवंश हैं। जिनमें से 100 गोवंश लंपी वायरस की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से काफी ठीक हुए हुए। आठ गोवंश की मौत अब तक बीमारी से हो चुकी है। बीमारी से बचाव के लिए गोशाला में कपूर-गूगल की धूप कर रहे हैं।
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छछरौली स्थित श्री गोशाला के संचालक कंवर कुमार ने बताया कि उनकी गोशाला में करीब 900 गोवंश हैं। जिनमें से 100 गोवंश बीमारी की चपेट में हैं। कुछ लोग होम्योपैथिक दवा व फिटकरी दान करके गए हैं। चार गोवंश की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग की तरफ से पांच-छह दिन पहले फोन आया था कि वह दवाई भेजेंगे, परंतु अब तक कोई भी डॉक्टर देखने के लिए नहीं आया। गोवंश के जख्मों पर लगाने के लिए दवा व पट्टियां विभाग ने भेजी हैं। जो गाय घास खाना बिल्कुल ही छोड़ देती है उनको बचाना बहुत मुश्किल हो रहा है।

रिकवरी में तेजी आई है : डॉ. प्रेम सिंह
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि 9279 पशु लंपी वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जिनमें से 5,471 ठीक हो चुके हैं, जो पशु इस बीमारी से ग्रस्त हैं उन्हें स्वस्थ पशु से दूर रखना चाहिए। पशुबाड़े में साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए।
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