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400 एमटी के बनेंगे तीन ऑक्सीजन प्लांट, बच्चों के लिए 100 बेड के अस्पताल की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 01:43 AM IST
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three Oxygen plant built for 400 MT
कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर से निपटने की तैयारी है। जिले के डीसी मुकुल कुमार ने इसके लिए कमर कस ली है। इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट की संख्या बढ़ाने से लेकर अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बढ़ाया जाएगा।
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अमर उजाला से बातचीत में आगामी प्लानिंग पर चर्चा करते हुए जिले के डीसी मुकुल कुमार ने बताया कि ीसरी लहर से निपटने के लिए हमने अभी से तैयारी कर ली है। करीब चार सौ एमटी के तीन ऑक्सीजन प्लांट बनाए जा रहे हैं। इनमें एक कोविड अस्पताल ईएसआई, एक सिविल अस्पताल यमुनानगर और एक जगाधरी में बनाया जा रहा है। वहीं बच्चों के लिए भी 100 बेड का एक समर्पित अस्पताल शॉर्ट मैसेज पर बनाने के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं। इसकी सारी व्यवस्था हमने कर ली है।
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डीसी ने बताया कि लगभग सभी बड़े गांवों में आइसोलेशन सेंटर खोल दिए गए हैं। ऐसे करीब 30 सेंटर एक्टिव हैं। जबकि 50 सेंटर और खोलने की व्यवस्था है। चूंकि स्टाफ की कमी रहती है, ऐसे में टेलीमेडिसिन पर भी जोर दिया जाएगा। हर सेंटर में वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा होगी। जो डॉक्टर एक साथी काफी मरीजों से बात कर सकेंगे।
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दो प्रयोग, जो मिसाल बने
जिला उपायुक्त मुकुल कुमार ने बताया कि जैसे ही केस बढ़ने शुरू हुए तो स्वास्थ्य टीम को ज्यादा से ज्यादा सैंपल लेने को कहा गया। चार सौ की क्षमता वाली मशीनों से एक दिन में एक हजार से ज्यादा सैंपल लिए गए। दूसरी व्यवस्था ये की गई कि जिला मुख्यालय के साथ-साथ सभी ब्लॉक में कोविड सेंटर बनाया गया। जहां सैंपलिंग से लेकर इलाज तक की सुविधा उपलब्ध करवाई गई। जिससे समय पर संक्रमण पकड़ में आया और उस पर काबू पाने में मदद मिली।
निगरानी से तोड़ी चेन
जिला प्रशासन की तरफ से कंटेनमेंट जोन की सख्ती से निगरानी की गई। यहां न केवल लोगों को जागरूक किया गया, बल्कि जरूरत का सामान लोगों के घरों पहुंचाया गया। कड़ी निगरानी की वजह से संक्रमित लोग और उनके परिवार के लोग बाहर नहीं जा पाएं और संक्रमण की चेन तोड़ी गई। उन्होंने बताया कि 70 फीसदी तक कोरोना पर काबू पा लिया गया है। उम्मीद है कि जून के दूसरे सप्ताह तक नाम मात्र के केस रह जाएंगे। उनके अनुसार ये बेहतर मैनेजमेंट का ही नतीजा है कि आज करीब 13 लाख की आबादी वाले जिले केवल एक हजार एक्टिव केस बचे हैं और रिकवरी रेट अन्य जिलों से बेहतर 93.57 प्रतिशत है।
पुलिस अफसरों संग बैठ बनाई प्लानिंग
डीसी मुकुल कुमार ने बताया कि दूसरी लहर खतरनाक बनकर उभरी थी। ऐसे में सरकार की तरफ से लगाए गए लॉकडाउन की लोग परवाह नहीं कर रहे थे। पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकर नए सिरे से प्लानिंग की और पुलिस को बिना वजह घूमने वालों के चालान, जुर्माना और एफआईआर दर्ज करने को कहा गया। जीटी रोड बेल्ट के जिलों में सबसे ज्यादा लोगों के चालान अपने जिले में हुए हैं। इस सख्ती का असर भी दिखाई दिया।

डीसी ने बताया कि जिले में मौत का आंकड़ा ज्यादा नहीं है। संदिग्ध लक्षणों वाले लोगों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही संस्कार करवाया जाता है। ताकि परिवार वाले अलर्ट रहे और वे होम आइसोलेशन का पालन करें।
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