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Yamuna Nagar News: दोहरा मानदेय लेने पर सरपंच पदमुक्त
Mon, 26 Jan 2026 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले के खंड सरस्वती नगर अंतर्गत ग्राम पंचायत दौलतपुर मालियान की सरपंच पिंकी रानी को दोहरे पद पर रहते हुए दोहरा मानदेय लेने के मामले में पद से हटा दिया गया है। उपायुक्त ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें सरपंच पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार पिंकी रानी ने सरपंच का चुनाव लड़ने से पहले 12 अक्तूबर 2022 को एसएमओ सरस्वती नगर को प्रार्थना पत्र और शपथ पत्र दिया था। इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा था कि यदि वह सरपंच पद का चुनाव जीतती हैं तो आशा कार्यकर्ता के पद से त्यागपत्र दे देंगी। यह पत्र 14 अक्तूबर 2022 को संबंधित कार्यालयों को अग्रेषित भी किया गया। चुनाव जीतने के बाद पिंकी रानी ने आशा वर्कर के पद से त्यागपत्र नहीं दिया और आशा वर्कर तथा सरपंच दोनों पदों का मानदेय लेती रहीं।
इस संबंध में गांव की एक महिला ने 27 अक्तूबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सरपंच की ोर से नियमों के विपरीत दो पदों पर रहते हुए दोहरा लाभ लिया जा रहा है। शिकायत पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, सरस्वती नगर ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार आशा वर्कर केवल एक ही पद पर कार्य कर सकती हैं। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी निर्देश जारी हैं कि कोई भी व्यक्ति सरपंच और आशा वर्कर के पद पर एक साथ कार्य नहीं कर सकता।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। सरपंच ने जवाब में स्वयं को वालंटियर और समाजसेवक बताते हुए नियुक्ति पत्र न होने की दलील दी, लेकिन जांच अधिकारी और प्रशासन ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना। प्रशासन का कहना है कि शपथ पत्र और लिखित आश्वासन के बावजूद त्यागपत्र न देना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके बाद उपायुक्त ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(3) व 175 के तहत कार्रवाई करते हुए पिंकी रानी को सरपंच पद से पदमुक्त कर दिया। आदेश में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पंचायत से संबंधित सभी रिकॉर्ड, चल-अचल संपत्ति और कार्यभार तत्काल बहुमत प्राप्त पंच को सौंपा जाए। इस कार्रवाई से जिले की पंचायतों में नियमों के पालन को लेकर सख्त संदेश गया है।
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यमुनानगर। जिले के खंड सरस्वती नगर अंतर्गत ग्राम पंचायत दौलतपुर मालियान की सरपंच पिंकी रानी को दोहरे पद पर रहते हुए दोहरा मानदेय लेने के मामले में पद से हटा दिया गया है। उपायुक्त ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उन्हें सरपंच पद से तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के आदेश जारी किए हैं।
मामले के अनुसार पिंकी रानी ने सरपंच का चुनाव लड़ने से पहले 12 अक्तूबर 2022 को एसएमओ सरस्वती नगर को प्रार्थना पत्र और शपथ पत्र दिया था। इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा था कि यदि वह सरपंच पद का चुनाव जीतती हैं तो आशा कार्यकर्ता के पद से त्यागपत्र दे देंगी। यह पत्र 14 अक्तूबर 2022 को संबंधित कार्यालयों को अग्रेषित भी किया गया। चुनाव जीतने के बाद पिंकी रानी ने आशा वर्कर के पद से त्यागपत्र नहीं दिया और आशा वर्कर तथा सरपंच दोनों पदों का मानदेय लेती रहीं।
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इस संबंध में गांव की एक महिला ने 27 अक्तूबर 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सरपंच की ोर से नियमों के विपरीत दो पदों पर रहते हुए दोहरा लाभ लिया जा रहा है। शिकायत पर खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, सरस्वती नगर ने जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार आशा वर्कर केवल एक ही पद पर कार्य कर सकती हैं। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी निर्देश जारी हैं कि कोई भी व्यक्ति सरपंच और आशा वर्कर के पद पर एक साथ कार्य नहीं कर सकता।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। सरपंच ने जवाब में स्वयं को वालंटियर और समाजसेवक बताते हुए नियुक्ति पत्र न होने की दलील दी, लेकिन जांच अधिकारी और प्रशासन ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना। प्रशासन का कहना है कि शपथ पत्र और लिखित आश्वासन के बावजूद त्यागपत्र न देना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके बाद उपायुक्त ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(3) व 175 के तहत कार्रवाई करते हुए पिंकी रानी को सरपंच पद से पदमुक्त कर दिया। आदेश में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पंचायत से संबंधित सभी रिकॉर्ड, चल-अचल संपत्ति और कार्यभार तत्काल बहुमत प्राप्त पंच को सौंपा जाए। इस कार्रवाई से जिले की पंचायतों में नियमों के पालन को लेकर सख्त संदेश गया है।