{"_id":"67ec36cf1363e935fa0a69b4","slug":"the-story-describes-nine-forms-of-the-mother-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-135516-2025-04-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: कथा में किया मां के नौ रूपों का वर्णन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: कथा में किया मां के नौ रूपों का वर्णन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अमादलपुर के प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर में चल रही देवी भागवत कथा का मंगलवार को तीसरा दिन रहा। कथा में बनारस के अखिल भारतवर्ष धर्म संघ के दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती प्रवचन कर रहे हैं। यह कथा प्राचीन सूर्यकुंड मंदिर सेवा फाउंडेशन, अखिल भारतवर्ष धर्म संघ व स्वामी करपात्री फाउंडेशन की ओर से करवाई जा रही है। कथा का समापन रामनवमी के दिन होगा। तीसरे दिन ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने मां दुर्गा के नौ रूपों व उनकी उत्पत्ति की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि मां दुर्गा ने नौ रूपों की उत्पत्ति धर्म स्थापना व मानव कल्याण के लिए हुई है। विभिन्न दुष्टों का नाश करने के लिए मां विभिन्न समय में अवतार लिए हैं। मां के सभी स्वरूप शक्तिदायनी मां पवित्र के हैं। उन्होंने बताया कि जब दुष्टों का अत्याचार बढ़ा और धर्म की हानि हुई, तब-तब मां ने जनकल्याण के लिए दुष्टों का संहार किया। देवी भागवत में मां की महिमा और भक्ति का मार्ग निहित है।
भक्ति के लिए मनुष्य में ममता व करुणा का होना आवश्यक है। देवी भागवत का श्रवण करने से मानव के पाप कर्मों का नाश होता है और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। सूर्यकुंड मंदिर के महंत डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए विषमतम परिस्थितियों में मन में विकार छाया हुआ है। उन्हें सनातन के उत्कृष्ट पथ व सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। माता-पिता को ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में बच्चों को लेकर जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
जगाधरी। अमादलपुर के प्राचीन सूर्य कुंड मंदिर में चल रही देवी भागवत कथा का मंगलवार को तीसरा दिन रहा। कथा में बनारस के अखिल भारतवर्ष धर्म संघ के दंडी स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती प्रवचन कर रहे हैं। यह कथा प्राचीन सूर्यकुंड मंदिर सेवा फाउंडेशन, अखिल भारतवर्ष धर्म संघ व स्वामी करपात्री फाउंडेशन की ओर से करवाई जा रही है। कथा का समापन रामनवमी के दिन होगा। तीसरे दिन ब्रह्मानंद सरस्वती महाराज ने मां दुर्गा के नौ रूपों व उनकी उत्पत्ति की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि मां दुर्गा ने नौ रूपों की उत्पत्ति धर्म स्थापना व मानव कल्याण के लिए हुई है। विभिन्न दुष्टों का नाश करने के लिए मां विभिन्न समय में अवतार लिए हैं। मां के सभी स्वरूप शक्तिदायनी मां पवित्र के हैं। उन्होंने बताया कि जब दुष्टों का अत्याचार बढ़ा और धर्म की हानि हुई, तब-तब मां ने जनकल्याण के लिए दुष्टों का संहार किया। देवी भागवत में मां की महिमा और भक्ति का मार्ग निहित है।
विज्ञापन
भक्ति के लिए मनुष्य में ममता व करुणा का होना आवश्यक है। देवी भागवत का श्रवण करने से मानव के पाप कर्मों का नाश होता है और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। सूर्यकुंड मंदिर के महंत डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि युवा पीढ़ी के लिए विषमतम परिस्थितियों में मन में विकार छाया हुआ है। उन्हें सनातन के उत्कृष्ट पथ व सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए। माता-पिता को ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में बच्चों को लेकर जाना चाहिए।
विज्ञापन