फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   The stairs of the temple were made of tents

Yamuna Nagar News: टेंट से बने मंदिर की बनाई थीं सीढ़ियां

Tue, 16 Jan 2024 04:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 16 Jan 2024 04:14 AM IST
विज्ञापन
The stairs of the temple were made of tents
राहुल शर्मा
विज्ञापन

यमुनानगर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां देख कारसेवक गर्व महसूस कर रहे हैँ, वहीं अक्तूबर-1990 व दिसंबर-1992 के दौरान आंखों देखे संघर्ष के क्षण व आपबीती घटनाएं याद कर सिहर जा रहे हैं। इन्हीं में एक रामपुरा निवासी 66 वर्षीय अश्वनी शर्मा हैं। उनकी मानें तो अयोध्या में श्रीराम लला के लिए टेंट से बने मंदिर की सीढ़ियां बनाई फिर यादगारी के लिए गिराए गुंबद की दो ईंटं साथ लेकर आए। शहर लौटने पर रामपुरा के हनुमान मंदिर में फोटो भी खिंचवाई।
अश्वनी शर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में दो अक्तूबर को अयोध्या पहुंचने का आह्वान हुआ। इसके लिए वह और अन्य साथी 27 सितंबर को शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में इकट्ठे हुए। यहां से एक ट्रक अंबाला के लिए चला। जिसे पुलिस द्वारा रोका न जाए, इसलिए आगे सत्संग का बैनर लगाया गया था। अंबाला में उन्हें अयोध्या की ट्रेन के लिए टिकटें दी गईं।
विज्ञापन

इसके बाद ट्रेन आते ही सभी बोगियों में चढ़ गए। लेकिन ट्रेन के उत्तरप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही हर स्टेशन पर पुलिस कारसेवकों को उतारती गई। इस तरह लखनऊ पहुंचने तक बहुत कम कारसेवक रह गए, जो लखनऊ से गोरखपुर की ट्रेन में बैठ गए। यह ट्रेन लखनऊ से चलते ही रास्ते में रुकी। इससे पहले ट्रेन से पुलिस पकड़ती, सभी कार सेवक ट्रेन से उतर कर खेतों में घुस गए। जहां से जंगल के रास्ते तीन दिन व रात पैदल चले।
विज्ञापन
विज्ञापन

गांवों में ग्रामीणों ने पत्तल पर भोजन में दाल-चावल दिए। ऐसे करते सभी कारसेवक गोंडा पहुंचे, पर यहां पुलिस ने पकड़ लिया। सभी को बसों से ले जाया जाने लगा, पर उनमें काफी लोग खिड़कियों से कूदकर निकल एक अक्तूबर को अयोध्या पहुंचे। यहां सरयू नदी समीप जंगल में रहे। तभी ऊपर हेलीकॉप्टर के जरिए उन पर नजर रखी जाने लगी। देखते ही पुलिस ने कारसेवकों को घेर लिया। संवाद
विवादित ढांचे को देखा फिर अखाड़े में ठहरे
अश्वनी शर्मा ने बताया कि पहली बार विवादित ढांचे पर पहुंचने से पहले ही उन्हें व बाकी साथियों को लौटना पड़ा। लेकिन वर्ष-1992 में तीन दिसंबर फिर अयोध्या रवाना हुए, जहां चार दिसंबर को पहुंच गए थे। पहले दिन सभी ने विवादित ढांचे को देखा फिर एक अखाड़े में ठहरे। पांच दिसंबर को जय श्री राम के जयकारों से गूंजने लगे और गुंबद गिरा दिए गए।

इसके बाद जो मंदिर टेंट से बनाया गया, उसमें रेता-बजरी से उन्होंने व अन्य साथियों ने सीढ़ियां बनाई। साथ ही यादगारी के लिए गिराए गुंबद के मलबा से दो ईंट ले ली, जिसे अयोध्या से यमुनानगर लौट स्टोर में रख दिया। साथ ही रामपुरा हनुमान मंदिर में साथियों के साथ फोटो भी कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed