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Yamuna Nagar News: साध्वी ने श्रद्धालुओं को बताया गोवर्धन पूजा का महत्व
Fri, 22 May 2026 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 22 May 2026 12:23 AM IST
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रादौर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सुनने पहुंचे श्रद्वालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। शहर के खेड़ा मोहल्ला स्थित प्राचीन नगर खेड़े पर चल रही आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान कथावाचक साध्वी आत्मानंद पुरी ने गोवर्धन पूजा का महत्व बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में दीपावली के अगले दिन ब्रज मंडल में इंद्र देव की पूजा की जाती थी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को प्रकृति, पर्वत, वृक्ष और गोवंश की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पर्वतों और भूमि पर पेड़-पौधे लगाकर वन महोत्सव मनाना चाहिए तथा गोबर को ईश्वर स्वरूप मानकर उसका सम्मान करना चाहिए। गोबर जलाने के बजाय खेतों में खाद के रूप में उपयोग करने से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और देश की उन्नति होती है।
साध्वी ने कहा कि जब लोगों ने श्रीकृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत, वन और गोबर की पूजा शुरू की तो इंद्र देव क्रोधित हो गए और सात दिन तक लगातार वर्षा हुई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। भगवान की यह लीला देवराज इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए थी।
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रादौर। शहर के खेड़ा मोहल्ला स्थित प्राचीन नगर खेड़े पर चल रही आठ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान कथावाचक साध्वी आत्मानंद पुरी ने गोवर्धन पूजा का महत्व बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में दीपावली के अगले दिन ब्रज मंडल में इंद्र देव की पूजा की जाती थी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने लोगों को प्रकृति, पर्वत, वृक्ष और गोवंश की रक्षा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पर्वतों और भूमि पर पेड़-पौधे लगाकर वन महोत्सव मनाना चाहिए तथा गोबर को ईश्वर स्वरूप मानकर उसका सम्मान करना चाहिए। गोबर जलाने के बजाय खेतों में खाद के रूप में उपयोग करने से भूमि की उर्वरता बढ़ती है और देश की उन्नति होती है।
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साध्वी ने कहा कि जब लोगों ने श्रीकृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत, वन और गोबर की पूजा शुरू की तो इंद्र देव क्रोधित हो गए और सात दिन तक लगातार वर्षा हुई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। भगवान की यह लीला देवराज इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए थी।
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