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देश के लिए दिया गया बलिदान अमर : राणा
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कारगिल विजय दिवस पर वीर एवं शहीद सैनिकों के शौर्य एवं बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि देश के लिए दिया गया बलिदान अमर होता है। कारगिल विजय दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं है बल्कि मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों की विरासत का सम्मान करने का संकल्प है।
द्यश्याम सिंह राणा ने बताया कि कारगिल घाटी में 1999 में पाकिस्तान की कायराना हरकत का करारा जवाब देते हुए वीर भारतीय सेना ने उसे कारगिल की रणभूमि में धूल चटा दी थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के बहुत से जांबाज जवान, मां भारती की रक्षा करते हुए शहीद हुए। कारगिल युद्ध अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था।
हमारे सैनिकों ने दुर्गम, बर्फीली चोटियों पर चढ़ाई की, न केवल एक मजबूत दुश्मन से बल्कि कठोर जलवायु और चुनौतीपूर्ण भूभाग से भी जूझते हुए विपरीत परिस्थितियों में उनका अटूट संकल्प, अदम्य साहस और सैन्य वीरता के सर्वोच्च आदर्शों का प्रमाण है। कारगिल युद्ध की विजय के बाद भारत वैश्विक ताकत बन कर उभरा।
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यमुनानगर। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कारगिल विजय दिवस पर वीर एवं शहीद सैनिकों के शौर्य एवं बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि देश के लिए दिया गया बलिदान अमर होता है। कारगिल विजय दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं है बल्कि मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों की विरासत का सम्मान करने का संकल्प है।
द्यश्याम सिंह राणा ने बताया कि कारगिल घाटी में 1999 में पाकिस्तान की कायराना हरकत का करारा जवाब देते हुए वीर भारतीय सेना ने उसे कारगिल की रणभूमि में धूल चटा दी थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के बहुत से जांबाज जवान, मां भारती की रक्षा करते हुए शहीद हुए। कारगिल युद्ध अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था।
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हमारे सैनिकों ने दुर्गम, बर्फीली चोटियों पर चढ़ाई की, न केवल एक मजबूत दुश्मन से बल्कि कठोर जलवायु और चुनौतीपूर्ण भूभाग से भी जूझते हुए विपरीत परिस्थितियों में उनका अटूट संकल्प, अदम्य साहस और सैन्य वीरता के सर्वोच्च आदर्शों का प्रमाण है। कारगिल युद्ध की विजय के बाद भारत वैश्विक ताकत बन कर उभरा।
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