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बजिली किल्लत : चढूनी गुट के बाद अब टिकैत ग्रुप के किसानों ने घेरा एसई कार्यालय

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2022 02:18 AM IST
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The relatives protested in the police station for not arresting the accused of assault...
यमुनानगर। गांवों में बिजली किल्लत से परेशान किसान यूनियन (टिकैत) ग्रुप से जुड़े किसानों ने बुधवार को बिजली निगम के एसई कार्यालय का घेराव किया। बुधवार को यहां पहुंचे किसान एसई परिसर के सामने दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए और सरकार व बिजली निगम के खिलाफ पौने घंटे तक नारेबाजी की। इस दौरान कोई अप्रिय घटना ना हो, इसके लिए मौके पर थाना प्रभारी सुखबीर सिंह सहित पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
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टिकैत गुट के जिला कार्यकारी प्रधान संदीप संखेड़ा ने चेताया कि जब तक एसई ऑफिस को बाहर आकर बात नहीं करते, तब तक धरने पर रहेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़क पर जाम भी लगाएंगे। करीब आधे घंटे बाद एसई ऑफिस से बाहर आए और किसानों की मांगें सुन आश्वासन दिया। इस पर किसान वापस लौट गए। उल्लेखनीय है कि पांच दिन पहले 30 अप्रैल को गुरनाम सिंह चढूूनी गुट के किसानों ने घेराव किया था।
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किसान नेताओं ने गांव में बिजली आपूर्ति का समय सुबह 4 से 9 व 10 से 12 व शाम 5 से 6 बजे करने, आपूर्ति आठ घंटे लगातार करने अन्यथा शाम में एक घंटे की आपूर्ति का समय सुबह के 10 से 12 बजे की आपूर्ति के समय में समायोजित करने की मांग मांग की। इस बावत एसई ने कहा कि ग्रुप वाइज अलग-अलग समय तय है। अगर किसान शाम 5 से 6 बजे की आपूर्ति का एक घंटे का समय सुबह 10 से 12 बजे की आपूर्ति के समय में जुड़वाना चाहते हैं तो ऐसा करने का प्रयास करेंगे। किसानों ने कहा कि छह साल पहले ट्यूबवेल कनेक्शन अप्लाई किए थे, वो अब तक नहीं मिला। इस बावत एसई ने कहा कि 31 दिसंबर 2018 तक के सरकार ने डिमांड नोटिस मांगे थे, जिसमें 3400 कनेक्शन हैं, जो इस माह दे दिए जाएंगे।
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खेत में पानी पहुंचते ही लग जाता कट
दामला के ऋषिपाल ने बताया कि कहने को गांवों में बिजली निगम ने बिजली आपूर्ति देने का शेड्यूल तैयार किया है, लेकिन उसके अनुसार बिजली नहीं मिल रही। इसका कोई टाइम टेबल नहीं है। कल वे खेत में सिंचाई के लिए गए तो पूरे दिन में चार घंटे बिजली मिली, वह भी अलग-अलग एक-एक घंटे की। स्थिति यह है कि खेत में पानी पहुंचते ही बिजली कट लग जाता है। जबकि गन्ने समेत अन्य फसलों को सिंचाई के लिए लगातार बिजली चाहिए। इसलिए मांग है कि जितनी घंटे बिजली मिलती है, वह लगातार दी जाए। यूनियन की महिलाओं ने भी गांवों में बिजली किल्लत से घरेलू से लेकर पशुओं कार्य में आ रही दिक्कतें बताईं।
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