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Yamuna Nagar News: करोड़ों खर्च पर दूर नहीं हुआ गड्ढों का मर्ज
Tue, 21 May 2024 03:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 21 May 2024 03:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। सड़कों को विकास की धुरी माना जाता है, पर जिले की ज्यादातर सड़कें टूट रही हैं या गड्ढों में तबदील हैं। हालांकि गत पांच वर्षों में सड़कों के निर्माण व मरम्मत पर करोड़ों रुपये भी खर्चे गए, पर बावजूद इसके तय समय से पहले सड़कें टूट गईं। खासकर मानसून सीजन की बारिश में जलभराव होने से सड़कें टूट कर बिखरती है, इस वजह का पता होने के बाद भी संबंधित अफसर सड़कों पर जलभराव न हो, इसके लिए निकासी के पुख्ता इंतजाम पूरे नहीं कर पाते हैं। यह बातें लोकसभा चुनाव देख लोगों की जुबान पर आ रही हैं। स्थानीय लोग सड़कों को चुनावी मुद्दा बताते हुए इनके निर्माण व मरम्मत की मांग उठा रहे हैं।
मनीष सांगवान ने कहा कि जिले में कोई बाहर से आता है तो सबसे पहले वह सड़कों की स्थिति देखकर ही विकास का आकलन करता है। लेकिन जिले की सड़कों के हाल वर्षों से बदतर रहे हैं। जिससे न सिर्फ स्थानीय लोग दुखी है बल्कि अन्य स्थानों से जिले में आने लोगों में भी जिले की खराब छवि बनती है। संबंधित विभागों को सड़कों की स्थिति में हमेशा सुधार रखना चाहिए।
बिट्टू ने कहा कि हर सड़क के निर्माण कार्य के लिए जारी ई निविदा में सड़क की लाइफ यानी वह कब तक सही हालात रहेगी, यह दिया गया होता है। लेकिन ज्यादातर सड़कें बनने के कुछ माह व साल में ही टूट जाती हैं। ऐसे मामलों में संबंधित ठेकेदार व अफसर पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा होने से ही सड़कें तय मानक मुताबिक बनेगी और ज्यादा समय तक सही सलामत रहेंगी।
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चरणजीत सिंह ने कहा कि जिले में मेटल, बर्तन व अन्य उद्योग हैं। इसके अलावा भी अन्य वर्ग से करोड़ों रुपये का राजस्व होता है। इसके बाद भी जिले को सड़क जैसी मूल जरूरत के लिए जूझना पड़ रहा है। अधिकांश सड़कें टूटकर बिखरी मिलती है या उन पर गड्ढों के झटके मिलते हैं। होना यह चाहिए कि जिले से प्राप्त हो रहे राजस्व का पैसा यहां सड़कों व अन्य विकास पर लगे।
प्रमोद कांबोज ने कहा कि हर सड़क पर उसका निर्माण कब हुआ, किस ठेकेदार व विभाग ने किया। और उसके लिए तय मानक का ब्योरा बोर्ड पर होना चाहिए। जिससे आमजन भी सड़क के बारे में पूरी जानकारी रख सके। अगर समय से पहले सड़क टूटती है तो कार्रवाई की मांग की जा सके। ऐसा होने से पारदर्शिता आने के साथ सड़क निर्माण में मनमानी पर अंकुश लग सकेगा।
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यमुनानगर। सड़कों को विकास की धुरी माना जाता है, पर जिले की ज्यादातर सड़कें टूट रही हैं या गड्ढों में तबदील हैं। हालांकि गत पांच वर्षों में सड़कों के निर्माण व मरम्मत पर करोड़ों रुपये भी खर्चे गए, पर बावजूद इसके तय समय से पहले सड़कें टूट गईं। खासकर मानसून सीजन की बारिश में जलभराव होने से सड़कें टूट कर बिखरती है, इस वजह का पता होने के बाद भी संबंधित अफसर सड़कों पर जलभराव न हो, इसके लिए निकासी के पुख्ता इंतजाम पूरे नहीं कर पाते हैं। यह बातें लोकसभा चुनाव देख लोगों की जुबान पर आ रही हैं। स्थानीय लोग सड़कों को चुनावी मुद्दा बताते हुए इनके निर्माण व मरम्मत की मांग उठा रहे हैं।
मनीष सांगवान ने कहा कि जिले में कोई बाहर से आता है तो सबसे पहले वह सड़कों की स्थिति देखकर ही विकास का आकलन करता है। लेकिन जिले की सड़कों के हाल वर्षों से बदतर रहे हैं। जिससे न सिर्फ स्थानीय लोग दुखी है बल्कि अन्य स्थानों से जिले में आने लोगों में भी जिले की खराब छवि बनती है। संबंधित विभागों को सड़कों की स्थिति में हमेशा सुधार रखना चाहिए।
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बिट्टू ने कहा कि हर सड़क के निर्माण कार्य के लिए जारी ई निविदा में सड़क की लाइफ यानी वह कब तक सही हालात रहेगी, यह दिया गया होता है। लेकिन ज्यादातर सड़कें बनने के कुछ माह व साल में ही टूट जाती हैं। ऐसे मामलों में संबंधित ठेकेदार व अफसर पर कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा होने से ही सड़कें तय मानक मुताबिक बनेगी और ज्यादा समय तक सही सलामत रहेंगी।
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चरणजीत सिंह ने कहा कि जिले में मेटल, बर्तन व अन्य उद्योग हैं। इसके अलावा भी अन्य वर्ग से करोड़ों रुपये का राजस्व होता है। इसके बाद भी जिले को सड़क जैसी मूल जरूरत के लिए जूझना पड़ रहा है। अधिकांश सड़कें टूटकर बिखरी मिलती है या उन पर गड्ढों के झटके मिलते हैं। होना यह चाहिए कि जिले से प्राप्त हो रहे राजस्व का पैसा यहां सड़कों व अन्य विकास पर लगे।
प्रमोद कांबोज ने कहा कि हर सड़क पर उसका निर्माण कब हुआ, किस ठेकेदार व विभाग ने किया। और उसके लिए तय मानक का ब्योरा बोर्ड पर होना चाहिए। जिससे आमजन भी सड़क के बारे में पूरी जानकारी रख सके। अगर समय से पहले सड़क टूटती है तो कार्रवाई की मांग की जा सके। ऐसा होने से पारदर्शिता आने के साथ सड़क निर्माण में मनमानी पर अंकुश लग सकेगा।