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Yamuna Nagar News: पांडवों ने यहां स्थापित किया था पंचमुखी शिवलिंग

Wed, 19 Feb 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 19 Feb 2025 01:36 AM IST
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The Pandavas had established Panchmukhi Shivling here
संवाद न्यूज एजेंसी
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साढौरा। झंडा गांव के पास शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित सतकुंभा मंदिर में बालू पत्थर से बना पंचमुखी विलक्षण शिवलिंग मौजूद है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद यहां पहुंचे पांडवों ने पंचमुखी शिवलिंग स्थापित किया था। इसी जगह पर मौजूद बावड़ी की सप्त धाराओं में स्नान करके पांडवों को महाभारत युद्ध में निर्दोष लोगों के वध की आत्मग्लानि से मुक्ति मिली थी।
इस स्थल का संबंध भगवान शिव, महर्षि वेद व्यास के अलावा महाभारत से भी बताया जाता है। महाशिवरात्रि के अगले दिन 27 फरवरी को सतकुंभा में एक विशाल मेला आयोजित करने की तैयारियां जारी हैं। महादेव सतकुंभा धाम ट्रस्ट के प्रधान रमेश उर्फ बिट्टू ने बताया कि 27 फरवरी को सतकुंभा में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा।
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इस दौरान शिव भक्तों की सुविधा के लिए जलपान व ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। झंडा के रणजीत सिंह, नरेश, मान सिंह व नारायणगढ़ के मनीष का मानना है कि नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर सतकुंभा मंदिर को धार्मिक के अलावा पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। इसके अलावा ट्रैकिंग के शौकीन लोगों के लिए भी यह जगह बहुत अधिक रुचिकर हो सकती है, लेकिन मांग करने के बावजूद सरकार यहां विकास कार्य करवाने की तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
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सतकुंभा मंदिर के वर्तमान महंत बाबा सत्य स्वरूप ने बताया कि किवदंती है कि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त करने के बावजूद युद्ध के दौरान निर्दोष लोगों का रक्त बहने से पांडवों का मन आत्मग्लानि से भर गया था। इस आत्मग्लानि को दूर करने के लिए पांडवों को एक ऋषि ने फाल्गुनी अमावस्या को एक ही दिन में सात पवित्र नदियों के जल में स्नान करने का उपाय बताया था।
तब युधिष्ठिर को स्वप्न में भगवान शंकर ने दर्शन देकर सतकुंभा में एक ही स्थान पर सात नदियों की धाराएं मौजूद होने की बात बताई गई। इसके बाद फाल्गुनी अमावस्या को पांचों पांडव सतकुंभा पहुंचे और यहां स्थित सप्त धाराओं में स्नान करके युद्ध की आत्मग्लानि से मुक्त हुए।
यही सात धाराएं सतकुंभा की बावड़ी की गोमुख आकार की तली में आज भी स्पष्ट नजर आती हैं। यहां दूरदराज से आए लोग स्नान करके पुण्य कर्म कमाने का सौभाग्य समझते हैं। मान्यता है कि इस बावड़ी के जल के सेवन से कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। उसी समय पांडवों ने खुद के पांच भाई होने के कारण बालू पत्थर से बने पंचमुखी शिवलिंग की यहां स्थापना की थी।

सतकुंभा मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना : बाबा सत्यस्वरुप
बाबा सत्यस्वरुप ने बताया कि सतकुंभा मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना के तहत यहां साधना कक्ष, संत निवास, आचार्य निवास, अतिथि निवास, ब्रह्मविद्या साधना कक्ष, कैलाश भवन, भगवान शिव का मंदिर, भोले बाबा का धूना, माता काली का मंदिर, सत्संग भवन व पिरामिड ध्यान सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
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