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Yamuna Nagar News: यहां स्थापित हैं पौराणिक स्वयंभू शिवलिंग
Sun, 23 Feb 2025 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 23 Feb 2025 12:15 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बूड़िया क्षेत्र के गांव दयालगढ़ में स्थित पौराणिक स्वयंभू शिवलिंग स्थापित पातालेश्वर महादेव मंदिर लोक आस्था का बड़ा केंद्र है। वैदिक काल का यह मंदिर स्वयं में कई रहस्य व कथाएं समेटे हुए हैं। सिद्धपीठ श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में श्री पातालेश्वर महादेव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं।
शिवलिंग के प्रकट होने की तिथि व समय को लेकर किसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। मंदिर प्रांगण में एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिव बावड़ी भी है। जो पाताल लोक से होते हुए कहां तक है इसका खुलासा कोई नहीं कर पाया। मान्यता है कि शिव बावड़ी का रास्ता पाताल लोक से स्वर्ग लोक तक जाता है।
अपने पाताली रहस्यों के कारण ही यह मंदिर श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात है। इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि महाशिवरात्रि व सावन में विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां पर बहुत बड़ा मेला लगता है। जिसमें हरियाणा सहित दूसरे राज्यों व विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।
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लोक मान्यता एवं कथाओं के अनुसार भले ही सूखा पड़ जाए परंतु यहां पानी कभी नहीं सूखता है। मंदिर के मुख्य पुजारी मुकेश गौतम ने बताया कि प्राचीन काल में जब इस क्षेत्र में अकाल पड़ता था तो लोग इसी बावड़ी से जल निकालकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते थे। ऐसा करते करते जब भगवान शंकर की जलहरी भर जाती थी तो वर्षा होने लगती थी। इसके अलावा यहां एक ऐतिहासिक पाताल कुआं भी है। जिसके बारे में लोगों की मान्यता है कि किसी समय यहां से दूध निकलता था।
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. जनार्दन शर्मा ने बताया कि यहां विभिन्न राज्यों व दूर दराज से श्रद्धालु मंदिर दर्शन करने आते हैं। स्वयं-भू शिवलिंग के रूप में विराजमान भगवान पातालेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस मंदिर में जिलावासियों की भारी आस्था है। यहां ऐसे श्रद्धालु भी आते हैं, जिनकी कई पीढि़यां मंदिर में श्री पातालेश्वर महादेव की पूजा व दर्शन के आ रही हैं। यहां आकर उन्हें मन की शांति मिलती है, उनकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
शंकराचार्य ने तप कर बताया सिद्धपीठ : डॉ. शर्मा
डॉ. जनार्दन शर्मा ने बताया कि 1985 में यहां जगन्नाथपुरी गोवर्धन पीठ से जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ महाराज आए थे। इस दौरान उन्होंने यहां पर कई दिनों तक तप किया था। जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर को एक सिद्ध पीठ बताया था। जगतगुरु ने इतिहास के कई सुनहरे पन्नों को खंगालते हुए इस स्थान से जुड़े कई रहस्यों को उजागर किया था। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि श्रावण माह व महाशिवरात्रि पर्व पर यहां बड़े समारोह होते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार भी महाशिवरात्रि महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
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जगाधरी। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर बूड़िया क्षेत्र के गांव दयालगढ़ में स्थित पौराणिक स्वयंभू शिवलिंग स्थापित पातालेश्वर महादेव मंदिर लोक आस्था का बड़ा केंद्र है। वैदिक काल का यह मंदिर स्वयं में कई रहस्य व कथाएं समेटे हुए हैं। सिद्धपीठ श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर में श्री पातालेश्वर महादेव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं।
शिवलिंग के प्रकट होने की तिथि व समय को लेकर किसी के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। मंदिर प्रांगण में एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक शिव बावड़ी भी है। जो पाताल लोक से होते हुए कहां तक है इसका खुलासा कोई नहीं कर पाया। मान्यता है कि शिव बावड़ी का रास्ता पाताल लोक से स्वर्ग लोक तक जाता है।
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अपने पाताली रहस्यों के कारण ही यह मंदिर श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात है। इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि महाशिवरात्रि व सावन में विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां पर बहुत बड़ा मेला लगता है। जिसमें हरियाणा सहित दूसरे राज्यों व विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं।
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लोक मान्यता एवं कथाओं के अनुसार भले ही सूखा पड़ जाए परंतु यहां पानी कभी नहीं सूखता है। मंदिर के मुख्य पुजारी मुकेश गौतम ने बताया कि प्राचीन काल में जब इस क्षेत्र में अकाल पड़ता था तो लोग इसी बावड़ी से जल निकालकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते थे। ऐसा करते करते जब भगवान शंकर की जलहरी भर जाती थी तो वर्षा होने लगती थी। इसके अलावा यहां एक ऐतिहासिक पाताल कुआं भी है। जिसके बारे में लोगों की मान्यता है कि किसी समय यहां से दूध निकलता था।
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष डॉ. जनार्दन शर्मा ने बताया कि यहां विभिन्न राज्यों व दूर दराज से श्रद्धालु मंदिर दर्शन करने आते हैं। स्वयं-भू शिवलिंग के रूप में विराजमान भगवान पातालेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस मंदिर में जिलावासियों की भारी आस्था है। यहां ऐसे श्रद्धालु भी आते हैं, जिनकी कई पीढि़यां मंदिर में श्री पातालेश्वर महादेव की पूजा व दर्शन के आ रही हैं। यहां आकर उन्हें मन की शांति मिलती है, उनकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।
शंकराचार्य ने तप कर बताया सिद्धपीठ : डॉ. शर्मा
डॉ. जनार्दन शर्मा ने बताया कि 1985 में यहां जगन्नाथपुरी गोवर्धन पीठ से जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निरंजन देव तीर्थ महाराज आए थे। इस दौरान उन्होंने यहां पर कई दिनों तक तप किया था। जिसके बाद उन्होंने इस मंदिर को एक सिद्ध पीठ बताया था। जगतगुरु ने इतिहास के कई सुनहरे पन्नों को खंगालते हुए इस स्थान से जुड़े कई रहस्यों को उजागर किया था। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष ने बताया कि श्रावण माह व महाशिवरात्रि पर्व पर यहां बड़े समारोह होते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार भी महाशिवरात्रि महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।