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यमुना नगर: गेहूं की फसल में पीले रतुए की दस्तक, किसानों की बढ़ी चिंता
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गांव बकाना में गेहूं की फसल में पीले रतुए ने दस्तक दे दी है, जिससे गेहूं उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ी गई है। हालांकि फसल को बीमारी से बचाव के लिए किसानों की ओर से दवाई का छिड़काव भी किया है, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौसम के लगातार बदलाव के कारण इस समय किसान को सुबह शाम फसल की निगरानी करनी की जरूरत है।
फरवरी माह में भी लोगों को मार्च के पहले सप्ताह जैसी गर्माहट देखने को मिल रही है, वही सुबह शाम ठंड व दिन में मौसम गर्म रहने के कारण इसका गेहूं की फसल पर बेहद खराब असर देखने को मिल रहा है। रादौर के गांव बकाना के किसान प्रवेश कुमार की गेहूं की फसल पीला रतुआ नामक बीमारी की चपेट में है। जिससे किसान के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ देखने को मिल रही है।
किसान प्रवेश कुमार ने बताया की कृषि विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर उसने फसल पर दवा का छिड़काव किया है। उन्होंने बताया कि इससे फसल पर पहले से कुछ हालत ठीक है, लेकिन अगर बीमारी का प्रकोप नहीं रुका तो सारी फसल खराब हो सकती है, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
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खंड कृषि विकास अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण पीले रतुए का गेहूं की फसल पर असर देखने को मिल रहा है। उन्होंने पीले रतुए से प्रभावित फसल को लेकर किसान को छिड़काव के लिए कहा गया है, ताकि यह बीमारी अन्य किसानों खेतों खड़ी फसल को भी प्रभावित न कर दे। उन्होंने किसानों को प्रोपिकोनाजॉल 200 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव की सलाह दी है, ताकि बीमारी का असर खत्म हो जाए। वही उन्होंने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि वे सुबह शाम खेतों में नजर बनाए रखें और अगर इस प्रकार की बीमारी का असर फसल पर नजर आता है,तो वह समय रहते दवा का छिड़काव करे।
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फरवरी माह में भी लोगों को मार्च के पहले सप्ताह जैसी गर्माहट देखने को मिल रही है, वही सुबह शाम ठंड व दिन में मौसम गर्म रहने के कारण इसका गेहूं की फसल पर बेहद खराब असर देखने को मिल रहा है। रादौर के गांव बकाना के किसान प्रवेश कुमार की गेहूं की फसल पीला रतुआ नामक बीमारी की चपेट में है। जिससे किसान के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ देखने को मिल रही है।
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किसान प्रवेश कुमार ने बताया की कृषि विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर उसने फसल पर दवा का छिड़काव किया है। उन्होंने बताया कि इससे फसल पर पहले से कुछ हालत ठीक है, लेकिन अगर बीमारी का प्रकोप नहीं रुका तो सारी फसल खराब हो सकती है, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
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खंड कृषि विकास अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण पीले रतुए का गेहूं की फसल पर असर देखने को मिल रहा है। उन्होंने पीले रतुए से प्रभावित फसल को लेकर किसान को छिड़काव के लिए कहा गया है, ताकि यह बीमारी अन्य किसानों खेतों खड़ी फसल को भी प्रभावित न कर दे। उन्होंने किसानों को प्रोपिकोनाजॉल 200 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव की सलाह दी है, ताकि बीमारी का असर खत्म हो जाए। वही उन्होंने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि वे सुबह शाम खेतों में नजर बनाए रखें और अगर इस प्रकार की बीमारी का असर फसल पर नजर आता है,तो वह समय रहते दवा का छिड़काव करे।