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Yamuna Nagar News: बीमा कंपनी को सात फीसदी ब्याज के साथ लौटानी होगी धनराशि
Fri, 17 Apr 2026 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:34 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम से जुड़े एक मामले में निजी बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 2,50,571 रुपये की राशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 11 हजार रुपये अलग से देने के आदेश भी दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता राजेश ने याचिका दायर की थी कि उन्होंने पहले एक हेल्थ इंश्योरेंस से मेडिक्लेम पॉलिसी ली हुई थी, जिसे बाद में एजेंट के कहने पर पोर्ट कर नई बीमा कंपनी की फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ले ली। यह पॉलिसी एक साल के लिए 10 लाख रुपये के कवर के साथ जारी की गई थी, जिसके लिए 1,10,377 रुपये प्रीमियम जमा कराया गया। इसी दौरान उनकी पत्नी ने गंभीर समस्या होने पर हरिद्वार स्थित सेंटर में इलाज कराया गया, जिस पर करीब 1.30 लाख रुपये खर्च हुए। परंतु बीमा कंपनी ने इसमें से केवल 42 हजार रुपये ही दिए और बाकी राशि देने से इंकार कर दिया। बाद में मोहाली के अस्पताल में जनवरी 2025 में कैशलेस सुविधा मांगी गई, लेकिन कंपनी ने बीमारी को प्री-एक्सिस्टिंग बताते हुए 36 महीने के वेटिंग का हवाला देकर इन्कार कर दिया।
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम से जुड़े एक मामले में निजी बीमा कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 2,50,571 रुपये की राशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए 11 हजार रुपये अलग से देने के आदेश भी दिए गए हैं।
शिकायतकर्ता राजेश ने याचिका दायर की थी कि उन्होंने पहले एक हेल्थ इंश्योरेंस से मेडिक्लेम पॉलिसी ली हुई थी, जिसे बाद में एजेंट के कहने पर पोर्ट कर नई बीमा कंपनी की फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ले ली। यह पॉलिसी एक साल के लिए 10 लाख रुपये के कवर के साथ जारी की गई थी, जिसके लिए 1,10,377 रुपये प्रीमियम जमा कराया गया। इसी दौरान उनकी पत्नी ने गंभीर समस्या होने पर हरिद्वार स्थित सेंटर में इलाज कराया गया, जिस पर करीब 1.30 लाख रुपये खर्च हुए। परंतु बीमा कंपनी ने इसमें से केवल 42 हजार रुपये ही दिए और बाकी राशि देने से इंकार कर दिया। बाद में मोहाली के अस्पताल में जनवरी 2025 में कैशलेस सुविधा मांगी गई, लेकिन कंपनी ने बीमारी को प्री-एक्सिस्टिंग बताते हुए 36 महीने के वेटिंग का हवाला देकर इन्कार कर दिया।
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