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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को समझाया गुरु सेवा का महत्व
Mon, 05 May 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 05 May 2025 01:20 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी वंशिका भारती ने प्रवचन में श्रद्धालुओं को गुरु सेवा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि निराकार ब्रह्म जब संपूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु साकार स्वरूप धारण करके अवतरित होता है, तब वह संपूर्ण मानव जाति को अपने आत्म कल्याण एवं आध्यात्मिक उत्थान हेतु एक अवसर प्रदान करता है। जो इस सुअवसर का लाभ उठा लेते हैं वे ही अपने मानव जीवन को सार्थक कर लेते हैं। गुरु आशुतोष महाराज ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान रूपी आधार हम सभी को प्रदान किया है, जिसके द्वारा हम अपना कल्याण कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि जब एक शिष्य पूर्ण निष्ठा एवं दृढ़ संकल्प के द्वारा सत्संग, सेवा, सुमिरन, साधना रूपी चारों आज्ञाओं का पालन करता है तो वह साधारण से असाधारण हो जाता है। गुरू आज्ञा में चलते हुए एक शिष्य के भीतर स्वतः ही दिव्य गुणों का संचार होता है। फिर ऐसा सच्चा शिष्य ही धैर्य, संयम एवं समर्पण भाव से सेवारत हो जाता है।
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उसकी ओर से किया गया प्रत्येक कार्य ही सेवा भाव से परिपूर्ण होता है। निःस्वार्थ भाव व परोपकार की भावना से परिपूर्ण होकर कोई कार्य करना ही वास्तविक सेवा है। गुरु सेवा ऐसा दिव्य अस्त्र है जो गुरु अपने शिष्य के कल्याण हेतु उसके संचित कर्मों को काटने के लिए उसे प्रदान करता है।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। साध्वी वंशिका भारती ने प्रवचन में श्रद्धालुओं को गुरु सेवा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि निराकार ब्रह्म जब संपूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु साकार स्वरूप धारण करके अवतरित होता है, तब वह संपूर्ण मानव जाति को अपने आत्म कल्याण एवं आध्यात्मिक उत्थान हेतु एक अवसर प्रदान करता है। जो इस सुअवसर का लाभ उठा लेते हैं वे ही अपने मानव जीवन को सार्थक कर लेते हैं। गुरु आशुतोष महाराज ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान रूपी आधार हम सभी को प्रदान किया है, जिसके द्वारा हम अपना कल्याण कर सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि जब एक शिष्य पूर्ण निष्ठा एवं दृढ़ संकल्प के द्वारा सत्संग, सेवा, सुमिरन, साधना रूपी चारों आज्ञाओं का पालन करता है तो वह साधारण से असाधारण हो जाता है। गुरू आज्ञा में चलते हुए एक शिष्य के भीतर स्वतः ही दिव्य गुणों का संचार होता है। फिर ऐसा सच्चा शिष्य ही धैर्य, संयम एवं समर्पण भाव से सेवारत हो जाता है।
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उसकी ओर से किया गया प्रत्येक कार्य ही सेवा भाव से परिपूर्ण होता है। निःस्वार्थ भाव व परोपकार की भावना से परिपूर्ण होकर कोई कार्य करना ही वास्तविक सेवा है। गुरु सेवा ऐसा दिव्य अस्त्र है जो गुरु अपने शिष्य के कल्याण हेतु उसके संचित कर्मों को काटने के लिए उसे प्रदान करता है।