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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया गुरु की भक्ति का महत्व
Sun, 17 May 2026 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 17 May 2026 11:08 PM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। आयोजक
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वंशिका भारती ने गुरु भक्ति का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि गुरु महिमा शब्दों में पूरी नहीं हो सकती है। हमें भक्ति का मर्म तभी समझ में आता है, जब हमारे जीवन में एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु का पदार्पण हो। साध्वी ने कहा कि परमात्मा के निराकार स्वरूप की भक्ति हमारी मनोकामनाओं की पूर्ति का साधन अवश्य बन सकती है। परंतु आत्मिक उत्थान एवं जन्म मरण के चक्रव्यूह से मुक्ति का मार्ग केवल गुरु भक्ति से होकर ही निकलता है। कई जन्मों के पुण्य पुंज एकत्रित होने पर ही हमारे जीवन में ऐसे गुरु का आगमन होता है, जो हमें आत्म कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
उन्होंने बताया कि मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख-दुख अथवा बाहरी परिस्थितियां उसके स्वयं के कर्म फलों के कारण आते हैं, जिनमें प्रकृति व ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। परंतु एक मात्र गुरु का सामर्थ्य प्रकृति के नियमों से बाहर जाकर भी अपने शिष्य के प्रारब्ध में हस्तक्षेप कर सकता है।
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साध्वी ने कहा कि गुरु अपने शिष्य को सेवा, साधना, सत्संग, सुमिरन इत्यादि शुद्ध कर्मों में लगाकर उसके क्रियामान कर्मों में संशोधन करके अपने तपोबल के द्वारा उसके संचित कर्मों को विनष्ट करके प्रारब्ध की उस धार को कुंठित कर देता है, जो कदाचित उनके शिष्य को आहत करने के लिए तैयार खड़ी हो। गुरु भक्ति में पगा हुआ हृदय ही भक्ति के वास्तविक स्वरूप का रसास्वादन कर सकता है।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वंशिका भारती ने गुरु भक्ति का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि गुरु महिमा शब्दों में पूरी नहीं हो सकती है। हमें भक्ति का मर्म तभी समझ में आता है, जब हमारे जीवन में एक ब्रह्मनिष्ठ गुरु का पदार्पण हो। साध्वी ने कहा कि परमात्मा के निराकार स्वरूप की भक्ति हमारी मनोकामनाओं की पूर्ति का साधन अवश्य बन सकती है। परंतु आत्मिक उत्थान एवं जन्म मरण के चक्रव्यूह से मुक्ति का मार्ग केवल गुरु भक्ति से होकर ही निकलता है। कई जन्मों के पुण्य पुंज एकत्रित होने पर ही हमारे जीवन में ऐसे गुरु का आगमन होता है, जो हमें आत्म कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
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उन्होंने बताया कि मनुष्य के जीवन में आने वाले सुख-दुख अथवा बाहरी परिस्थितियां उसके स्वयं के कर्म फलों के कारण आते हैं, जिनमें प्रकृति व ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। परंतु एक मात्र गुरु का सामर्थ्य प्रकृति के नियमों से बाहर जाकर भी अपने शिष्य के प्रारब्ध में हस्तक्षेप कर सकता है।
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साध्वी ने कहा कि गुरु अपने शिष्य को सेवा, साधना, सत्संग, सुमिरन इत्यादि शुद्ध कर्मों में लगाकर उसके क्रियामान कर्मों में संशोधन करके अपने तपोबल के द्वारा उसके संचित कर्मों को विनष्ट करके प्रारब्ध की उस धार को कुंठित कर देता है, जो कदाचित उनके शिष्य को आहत करने के लिए तैयार खड़ी हो। गुरु भक्ति में पगा हुआ हृदय ही भक्ति के वास्तविक स्वरूप का रसास्वादन कर सकता है।

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। आयोजक